लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत मतदाता सूची से जुड़ल एगो बड़ फैसला सामने आइल बा। चुनाव आयोग साफ कs देले बा कि राज्य सरकार के सामान्य निवास प्रमाणपत्र एसआईआर प्रक्रिया में मान्य ना होई। एह फैसला से प्रदेश भर के लाखन आम मतदाता परेसान बा लोग।
बरेली के आंवला क्षेत्र के मधु (नाम बदलल) के ममिला एह समस्या के उदाहरण बा। मधु के 2003 के मतदाता सूची से मैपिंग ना हो पइला के चलते नोटिस भेजल गइल। सुनवाई के दौरान जब मधु सामान्य निवास प्रमाणपत्र पेश कइलीं, तs सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ) एकरा के स्वीकार करे से मना कs देलें। अधिकारी बतवलें कि चुनाव आयोग के साफ निरदेस बा कि सामान्य निवास प्रमाणपत्र ना मानल जाई। मधु के अगिला सुनवाई के तारीख दे दिहल गइल।
ई समस्या खाली एगो आदमी तक सीमित नइखे। यूपी के लगभग हर जिला में आम मतदाता एह परेसानी से जूझ रहल बा। आयोग 13 मान्य दस्तावेजन के सूची जारी कइले बा, जवना में छठा नंबर पs स्थायी निवास प्रमाणपत्र के मान्यता दिहल गइल बा। बाकिर जमीनी हकीकत ई बा कि उत्तर प्रदेश में अब तहसील स्तर पs स्थायी भा मूल निवास प्रमाणपत्र बनावल नइखे जात। लेखपालन के कहनाम बा कि अब खाली सामान्य निवास प्रमाणपत्र जारी हो रहल बा, जवन छात्रवृत्ति, पेंशन आ सरकार के बाकी योजना में मान्य बा।
एकरा पs यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा बतवलें कि सामान्य निवास प्रमाणपत्र 5-6 महीना के निवास पs बन जाला, एकरा से एसआईआर के मकसद पूरा ना हो सकेला। ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम ना मिलला पs नोटिस के जवाब में जवन दस्तावेज जमा होखेला, ओकरा में सामान्य निवास प्रमाणपत्र सामिल नइखे।
एसआईआर खातिर मान्य दस्तावेज
सरकारी कर्मचारी/पेंशन पहचान पत्र, 1987 से पहिले जारी पहचान प्रमाण, जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर, जमीन-मकान आवंटन पत्र, आधार (निरदेस के अनुसार) जइसन कुल 13 दस्तावेज मान्य कइल गइल बा।







