नई दिल्ली। दिल्ली दंगा ममिला में सुप्रीम कोर्ट एगो बड़ा फैसला सुनवले बा। अदालत शरजील इमाम आ उमर खालिद के जमानत याचिका खारिज कs दिहल गइल बा। एकरा संगे कोर्ट ईहो आदेस देलस कि अगिला एक साल तक ई दुनो आरोपी दोबारा जमानत खातिर अपील ना कs सकेलें। हालांकि, एह केस में सामिल पांच आउर आरोपियन के सुप्रीम कोर्ट सशर्त जमानत दे देलस।
दरअसल, दिल्ली दंगा ममिला में कुल सात आरोपी-गुलफिशा फातिमा, शरजील इमाम, मीरान हैदर, उमर खालिद, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद शकील खान आ शादाब अहमद- सुप्रीम कोर्ट में जमानत के गुहार लगवले रहलें। सब केहू के याचिका पs सुनवाई भइला के बाद कोर्ट फैसला सुनवलस। एह फैसला में शरजील इमाम आ उमर खालिद के राहत ना मिलल, जबकि बाकी पांच आरोपियन के जमानत मंजूर कइल गइल।
पांच आरोपियन के सशर्त जमानत
सुप्रीम कोर्ट गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद शकील खान आ शादाब अहमद के 12 सख्त शर्त के संगे जमानत देवे के आदेस देलस। कोर्ट साफ कहलस कि जदि जमानत के शर्त के उल्लंघन भइल, तs तुरंते जमानत रद्द हो सकेला आ कड़ा कार्रवाई होई।
UAPA के तहत दर्ज बा ममिला
ई सब ममिला साल 2020 में दिल्ली में भइल सांप्रदायिक दंगा से जुड़ल बा। आरोपियन पर गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत केस दर्ज कइल गइल रहे। पुलिस के आरोप बा कि CAA आ NRC के विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण आ साजिश के चलते दिल्ली में दंगा भड़क गइल। सुप्रीम कोर्ट पहिलहू एह केस में जमानत याचिका खारिज कs चुकल बा। 10 दिसंबर 2025 के अदालत सब पक्ष के दलील सुनला के बाद फैसला सुरक्षित रखले रहे।
पहिलहू हाईकोर्ट से ना मिलल राहत
आरोपियन के कहनाम बा कि ऊ लोग करीब पांच साल से जेल में बंद बा लोग आ अभी तक ओह लोगन के खिलाफ ठोस सबूत सामने नइखे आइल। हालांकि, 2 सितंबर 2025 के दिल्ली हाईकोर्ट सभे के जमानत देवे से इनकार कs देले रहे।
दिल्ली दंगा 2020 के पृष्ठभूमि
फरवरी 2020 में दिल्ली में भइल दंगा में 53 लोगन के मौत भइल रहे, जवना में 15 हिंदू सामिल रहलें। एह हिंसा में 700 से जादे लोग घायल भइल रहे। ई ममिला आजो देस के राजनीति आ न्यायिक बेवस्था में बहस के विषय बनल बा।
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