नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट आज सबरीमाला मंदिर में हर उमिर के महिला लोग के प्रवेश के इजाजत देवे वाला फैसला पs दोबारा विचार करे के मांग से जुड़ल 67 गो रिव्यू पिटीशन पs सुनवाई करी।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के अगुवाई में तीन जजन के बेंच बराबरी, आस्था के आजादी आ धार्मिक रीति-रिवाज के जरूरत से जुड़ल सवालन के जांच करी।
केरल में एह साल विधानसभा चुनाव होखे वाला बा। एकरा से पहिले राज्य सरकार के सबरीमाला मंदिर में महिला लोगन के एंट्री पs आपन रुख साफ करे के पड़ी।
सबरीमाला ममिला पs सुप्रीम कोर्ट के सुनवाई
सबरीमाला ममिला में सुप्रीम कोर्ट नव जजन के नया बेंच बनावे के निरदेस दे सकेला। 2019 में बनल पिछलस नव जजन के बेंच अब खतम हो चुकल बा, काहे कि जस्टिस सूर्यकांत के छोड़ के बाकी सब सदस्य रिटायर हो गइल बा लोग।
सबरीमाला के अलावा, एह नव जजन के बेंच से इहो उम्मेद कइल जा रहल बा कि ऊ मुस्लिम आ पारसी समुदाय में महिला लोगन के धार्मिक अधिकार, आस्था आ धार्मिक रीति-रिवाज में कोर्ट के दखल के सीमा जइसन बड़हन मुद्दा पs विचार करी।
दुविधा में केरल सरकार
सबरीमाला में महिला लोगन के एंट्री पs रिव्यू पिटीशन पs सुप्रीम कोर्ट के विचार से एक बेर फेर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के सरकार नीति के सवाल पs दुविधा में पड़ गइल बिया।
केरल सरकार सबरीमाला में महिला लोगन के एंट्री के समर्थन में ‘नवोधनम’ यानी नया जमाना के क्रांति के नारा देके आगे बढ़े के कोसिस कइले रहे। कोर्ट के आदेस के हवाला देत सरकार 2019 में सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करे वाली महिला लोगन के पुलिस सुरक्षा देले रहे।
सरकार आपन मजबूत रुख देखावत राज्य भर में महिला लोगन के ‘ह्यूमन चेन’ माने ‘विमेंस वॉल’ अभियान चलवले रहे। सरकार के दावा रहे कि एह अभियान में करीब 50 लाख महिला लोग सामिल भइल।
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