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भारतीय संत परंम्परा के वैविध्य विचारधारा के कवि संत रविदास-डॉ विक्रम

यायावरी वाया भोजपुरी के बुधवारी बईठकी में श्री वैभव मनि त्रिपाठी जी से बतकही करत आपन विचार रखनीं डॉ0 विक्रम जी....

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यायावरी वाया भोजपुरी के साप्ताहिक “बुधवारी” बईठकी में इलाहाबाद के सहायक प्राध्यापक डॉ विक्रम भारतीय संत परम्परा के बेजोड़ कवि आ समाजिक चिंतक संत रैदास के अलग-अलग विचार आ उनका व्यक्तित्व पs प्रकाश डालत कहले की “जे तरे हिंदी साहित्य में निराला जी के वैविध्य कवि कहल जाला ओहि तरे हिंदी साहित्य के संत परम्परा के कवि रैदासो जी के उपाधि मिलल बा”। ओह घरी के इतिहासकार लोग के बिसार दिहला के बादो जे तरे रैदास जी के हिंदी साहित्य में जगह मिलल बा उ उहाँ के संत आ उहाँ के सामाजिक चिंतक के रूप मे दर्शावे ला।

हिंदी साहित्य में पहिला बेर संत रैदास के बारे में परशुराम चतुर्वेदी जी लिखनी आ उहाँ के व्यक्तित्व आ कृतित्व पs प्रकाश डलनी ,बाक़िर दुःखद ई की जवना तरे उहाँ के इतिहास में जगह मिले के चाहीं उ ना मिलल बस कुछेक पन्नन में उहाँ के समेट दिहल गईल आ बहुत ढ़ेर बात ना भइल ,हिन्दियो साहित्य में उहाँ पs तब लिखाईल जब सिक्ख समाज के पबितर ग्रन्थ “गुरु ग्रन्थ साहिब” में जब उहाँ के वाणी छपल तब जाके हिंदी साहित्यकार लोग के ध्यान गईल। ई अपने आप मे ई एगो विरोधाभास वाली बात कि जवन इतिहास के चीज़ उ सहित्य में पढ़ावल जाला ।

आगे बतकही में बात करत उहाँ के कहनी कि जब समाज अपना नायक के पूजे लागेला तs ओह नायक पs वैचारिक हमला होखे लागेला बाक़िर संत रविदास जी एगो अइसन संत बनी जिनका के लोग नायक बना के पुजलस आ उ अभी तक चलल आवत बा ,समाज उहाँ के भगवान के दर्जा दिहलस।उहाँ के भगवान वाला चरित्र के मानत रविदास पुराण ,रविदास रामायण आ एहि तरे के ढेरे किताबन के रचना कइल गइल।

परशुराम चतुर्वेदी जी किताब के बारे बात करत कहनी की उहाँ के लोक में जवन बात मिलल जनश्रुति में बात मिलल ओह से ई बात निकल के आवेला की संत रैदास अपना पहिलका जनम में ब्राम्हण रहलन आ ई बात खाली एगो लेखक आ साहित्यकार नइखन कहले बलुक योगेंद्र सिहं ,महेश अहिरवार आ अउरी तमाम लेखक लोग एह बात के चरचा कइले बा अपना-अपना क़िताबिन में।

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ई रिपोर्ट खबर भोजपुरी खातिर सुधीर कुमार मिश्र के लिखल हs…

 

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