साल के आखिरी चंद्रग्रहण शनिचर के रात आश्विन पूर्णिमा तिथि के दिने होखी। इ चंद्रग्रहण भारत में भी देखाई दिही। जबकि शरद पूर्णिमा के दिन नौ साल बाद चंद्रग्रहण हो रहल बा। ए संबंध में ज्योतिषी प्रमोद श्रृंगारी बतवले कि सूतक अवधि चंद्रग्रहण से ठीक नौ घंटा पहिले शुरू होखेला। एह दौरान भक्त आठ बजे ले देवी लक्खी के पूजा कs सकेलें आ चंद्रमा के भोग अर्पित कs सकेलें। शरद पूर्णिमा के दिन 28 अक्टूबर यानी शनिवार के रात के 1:05 बजे से 2:23 बजे तक चंद्रग्रहण होई। श्री श्रृंगारी बतवले कि सूतक काल में बाबा मंदिर के दरवाजा बंद ना होखेला। इहाँ बाबा बैद्यनाथ के गर्भगृह के दरवाजा ग्रहण काल में ही बंद रहेला। अयीसना में रात में होखेवाला चंद्रग्रहण के चलते बाबा मंदिर में एकर असर ना देखाई दिही।
चंद्रग्रहण कवना समय होइ
भारतीय समय के मुताबिक सूतक अवधि चंद्रग्रहण से नौ घंटा पहिले यानी शनिचर के सांझ के 4:05 बजे से शुरू होई। चंद्रग्रहण रात 1:05 बजे से शुरू होखी आ रात 2:23 बजे ले चली। मतलब कि ग्रहण कुल एक घंटा 18 मिनट तक चली।
चंद्रग्रहण के समय बंद ना होई बाबा मंदिर के पट, होई श्रृंगार पूजा
सूतक काल में द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ मंदिर देवघर के गर्भ गृह बंद ना होई। ई परंपरा पहिले से चलत आ रहल बा। इहाँ के पुजारी लोग एह परम्परा के पालन करत आइल बा। ग्रहण काल में ही बाबा भोलेनाथ के छूवल अशुभ मानल जाला, एही से ग्रहण के दिन ही मंदिर में गर्भगृह में घुस के पूजा करे पs रोक बा। अयीसना में बाबा के श्रृंगार पूजा सामान्य दिन निहन देर शाम के हो जाई।