अतवार के भोजपुरी के प्रतिष्ठित रचनाकार आ आकाशवाणी गोरखपुर के सेवानिवृत्त कार्यक्रम अधिशासी 80 वर्षीय रवीन्द्र श्रीवास्तव उर्फ जुगानी भाई के व्यक्तित्व-कृतित्व प केन्द्रित डॉ फूलचन्द प्रसाद गुप्त द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘भोजपुरी कs बेटा’ के गोरखपुर प्रेस क्लब सभागार में लोकार्पण भइल। जुगानी भाई के बहुआयामी व्यक्तित्व से हमनी सभे विधिवत परिचित भइनी।
राकेश सिंह जी माटी के अखाड़ा के अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान हई, ई तs हमनी के जानत रहनी सs, बाकिर कवनो बड़ पहलवान साहित्यिक- सांस्कृतिक मंच से साहित्य/संस्कृति/धर्म प व्यवस्थित ढंग से बोल सकत बा, राकेश सिंह जी के सुनके बड़ा ताज्जुब भइल। राकेश सिंह जी जुगानी भाई के बहुआयामी व्यक्तित्व प करीब आधा घण्टा तक सन्तुलन के संगे मनोयोग से बोलले, बहुते निम्मन लागल, राकेश सिंह ‘पहलवान ‘अपना उद्बोधन में जुगानी भाई के व्यक्तित्व के कइयन अनजान पहलुअन के उद्घाटन कइलें। राकेश सिंह जी के कुश्ती हमनी के लड़ीकाई में बहुत बेर देखले बानी जा, बाकिर साहित्यिक मंच से उनका के पहिला बेर सुननी स। मालूम होखे कि राकेश सिंह ‘पहलवान’ जी के वाह्याभ्यन्तर व्यक्तित्व धार्मिकता से भरल बा, ऊ पहलवानिये के समय से कइयन गो सामाजिक सरोकारन में बढ़-चढ़ के हिस्सा लेत आइल बाड़े।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ अशोक जाह्नवी प्रसाद जइसन दुनिया के बड़ विद्वान् अपना मातृभाषा भोजपुरी में केतना सुन्दर ढंग से बोलत श्रोता लोगन के प्रभावित कर सकत बा, ई आश्चर्यजनक लागल। सामान्य तौर प देखल जाला, कि कवनो विषय के मामूली जानकारो मंच से आपन काबिलियत बघारे लागे ला लो, बाकिर डा. जाह्नवी प्रसाद के देख-सुनके लागल कि महानता मन से साधारण होखले में बा।
प्रोफ़ेसर रामदरश राय भाषा विज्ञान के निम्मन विद्वान् / साहित्यकार हवे, बाकिर भोजपुरियो पs उनकर असाधारण अधिकार बा, प्रोफ़ेसर राय आपन समूचा उद्बोधन खाटी भोजपुरी में देलें। कार्यक्रम पूरा तरे से सफल रहे। रवीन्द्र श्रीवास्तव उर्फ जुगानी भाई अपना उद्बोधन में गोरखपुर विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के कुछ विद्वानन के पीठ पीछे के व्यवहार से दुःखी लउकट रहस, बाकिर ओहि विभाग के दु-तीन साहित्य साधक आचार्यन के स्मरणो ऊ बहुते श्रद्धा पूर्वक कइले।