सेंट्रल डेस्क। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटावल गइल नामन के ममिला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गइल बा। सुप्रीम कोर्ट एह मुद्दा पs दायर नया याचिका पs सुनवाई करे खातिर तइयार हो गइल बा। ई याचिका ओह लोग के तरफ से दायर कइल गइल बा, जेकर नाम चुनाव आयोग मतदाता सूची से हटा देले बा।
वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी अदालत में बतवली कि ई याचिका ओह मतदाता लोगन से जुड़ल बा, जे पहिले चुनाव में वोट डाल चुकल बा, बाकिर अब ओकर नाम मतदाता सूची से हटा दिहल गइल बा।
ममिला के सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत आ न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची के पीठ के सामने भइल। सुनवाई के दौरान वकील कहली कि बहुत लोग अइसन बा जे पहिले वोट दे चुकल बा, बाकिर अब ओह लोगन के दस्तावेज स्वीकार नइखे कइल जा रहल। एह पs मुख्य न्यायाधीश कहलें कि अदालत सीधे न्यायिक अधिकारी के फैसला पs अपील के तरे ना बइठ सकला। हालांकि वरिष्ठ अधिवक्ता के दलील सुनला के बाद अदालत एह ममिला पs मंगर के सुनवाई करे के फैसला कइलस।
गौर करे वाला बात बा कि 24 फरवरी के सुप्रीम कोर्ट पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया पूरा करे खातिर सिविल जज के तैनाती के अनुमति देले रहे। एह काम खातिर करीब 250 जिला जज आ झारखंड-ओडिशा के कइयन गो न्यायिक अधिकारियन के लगावल गइल बा।
एह लोगन के जिम्मेदारी लगभग 80 लाख दावा आ आपत्ति के जांच करे के बा, जवन मतदाता सूची से नाम हटावल जाये से जुड़ल बा। कोलकाता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल बतवले रहलें कि 250 जिला जज के एह काम के पूरा करे में करीब 80 दिन लाग सकेला।
जांच के दौरान 2002 के मतदाता सूची से जुड़ल कइयन गाे गड़बड़ियो सामने आइल बा। कइयन जगह माता-पिता के नाम में मेल ना खाये के ममिला मिलल बा। कुछ केस में मतदाता आ माता-पिता के उमिर में अंतर बहुत कम भा बहुत जादे पावल गइल बा।
सुप्रीम कोर्ट पहिलहू साफ कs चुकल बा कि SIR प्रक्रिया में कवनो तरे के बाधा बर्दाश्त ना कइल जाई। अदालत पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक के निरदेस देले रहे कि चुनाव आयोग के नोटिस जरावे के आरोप के जांच कs के हलफनामा दाखिल कइल जावs।







