नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के अनुसार, आम लोग 26 मार्च के राम नवमी मनाई, जबकि वैष्णव समाज 27 मार्च के ई परब मनाई। भगवान श्रीराम के किरपा पावे खातिर एह दिन खास पूजा, मंत्र जप आ हवन करे के विधान बा।
एह तरीका से करीं पूजा
सबसे पहिले भोर में उठ के नहा-धो के साफ-सुथरा कपड़ा (खास कs के पीयर रंग) पहिनीं।
एक चौकी पs लाल भा पीयर कपड़ा बिछा के भगवान राम, सीता, लक्ष्मण आ हनुमान जी के मूर्ति भा फोटो रखीं।
हाथ में पानी आ अक्षत लेके पूजा के संकल्प लीं।
रामलला के पंचामृत से स्नान कराईं, नया कपड़ा पहिराईं आ चंदन के तिलक लगाईं।
पीयर फूल चढ़ाईं आ भगवान के मिठाई, केसर भात, पंचामृत आ धनिया पंजीरी के भोग लगाईं, संगही तुलसी जल जरूर डालीं।
पूजा के दौरान रामचरितमानस भा रामरक्षा स्तोत्र के पाठ करीं।
दूपहरिया 12 बजे शंखनाद के संगे भगवान के जन्मोत्सव मनाईं।
धूप, दीप आ कपूर जरा के आरती करीं आ प्रसाद बांटीं।
जदि व्रत रखले बानी तs पूजा के बाद प्रसाद खा के व्रत खोल लीं।
राम नवमी मध्याह्न मुहूर्त:
सबेरे 11:13 बजे से लेके दूपहरिया 1:41 बजे तक
एह मंत्रन के जप जरूर करीं
- ॐ श्री रामाय नमः
- ॐ श्री रामचन्द्राय नमः
- ॐ रां रामाय नमः
- श्री राम, जय राम, जय जय राम
- ॐ दाशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि, तन्नो रामः प्रचोदयात्
- ॐ ह्रां ह्रीं रां रामाय नमः
हवन करे के तरीका
नहइला के बाद साफ कपड़ा पहिनीं आ पूजा के जगह पs गंगाजल छिड़कीं।
हवन कुंड बना के आम के लकड़ी, कपूर आ उपला से आग जराईं।
गणेश जी के स्मरण कs के माता दुर्गा आ भगवान राम के ध्यान करीं।
जव, तिल, घी आ हवन सामग्री से 108 आहुति दीं।
अंत में सूखल नारियल में बचल सामग्री भर के “पूर्णाहुति” दीं आ फेर कपूर से आरती करीं।
एह तरे से सच्चा मन से पूजा-पाठ आ मंत्र जप कइला से भगवान राम के किरपा जरूर मिलेला आ जिनगी में सुख-शांति आवेला।








