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कुबेर नाथ मिश्र ‘विचित्र’ – जयंती प विशेष

कुबेर नाथ मिश्र 'विचित्र' - जयंती प विशेष

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कुबेर नाथ मिश्र ‘विचित्र’ – जयंती प विशेष

जन्मतिथि – 21 जून 1935
पुण्यतिथि – 25 फरवरी 2019

आखर परिवार , भोजपुरी के महान साहित्यकार व्यंग्यकार कुबेर नाथ मिश्र ‘ विचीत्र ‘ जी के जयंती प बेर बेर नमन क रहल बा ।

बिचित्र जी के परिचय –

पिता के नाव – श्री पं. जगजीतन मिश्र
रहनिहार – भिण्डा मिश्र, भाटपार रानी , देवरिया
शिक्षा – प्राइमरी, मिडिल, हाई स्कूल, इंटर, मध्यमा(विशारद), साहित्यरत्न, धर्मरत्न( बीए)
पेशा – अध्यापक, बाबा राघव दास कृषक इंटर कालेज, भाटपार रानी, देवरिया (उ.प्र.)

‘ विचित्र बिना झोरा के उदास हो जालें’

एगो संस्मरण विचित्र जी जुड़ल आखर के जरी –

विचित्र बाबा जइसन जिंदादिल आ खुशमिशाज कवि हम दोसर कहीं नइखीं देखले। विचित्र बाबा से कई बेर भेंट-मुलाकात आ साथे रहे के मौका मिलल बा। देवरिया जिला के भिंडा मिश्र गांव के रहनियार विचित्र बाबा देश-विदेश के काव्य मंचन पऽ आपन दमदार उपस्थिति दर्ज करावत रहीं। ऊंहा के लोकप्रिय-जनप्रिय कवि रहीं। आपन विचित्र वेश-भूषा से ऊंहा के पहचान बनल रहे। माथ पऽ गांधी टोपी, गोड़ में हवाई चप्पल, कांध पऽ लटकट झोरी, झोरी में शंख-पतरा आ आपन छपल पोथी आ बेछपल पांडुलिपी। हाथ में एगो छाता। गरदन में रूद्राक्ष के माला। चेहरा पऽ दिव्य तेज, धोती-कुरता आ गमछा। जब मंच पऽ ऊंहा के कविता पढ़े खातिर उठी तऽ लोग पेट दाब के हँसे। मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली के एगो कवि सम्मेलन में शामिल होखे खातिर ऊंहा के दिल्ली आइल रहीं। विचित्र बाबा अपना साथे दतुअन काटे खातिर एगो चाकू रखीं। दिल्ली मेट्रो के सुरक्षा जाँच में ऊंहा चाकू जमा हो गइल। बिचित्र बाबा बड़ा परेशान रहीं। आ हमरा से कहनी कि बबुआ एगो चाकू के इंतजाम करऽ, ना तऽ दतुअन कइसे बनाइब। हम कइनी बाबा रउआ ब्रश कर लिही। दिल्ली चाकू कहां मिली। बिचित्र बाबा खातिर हम पहाड़गंज साइड से जाके दतुअन ले अइनी तब बाबा के काम बनल। ऊंहा के पन्ना-पन्ना जोड़ के पतरा जइसन आपन पोथी निकालीं। ओह पऽ मुक्तक आ व्यंग्य कंडा के कलम से लिखल रहे।

ऊंहा के मुक्तक कहे में महारत हासिल रहे। ऊंहा के रचना के केंद्र में गांव आ समाज रहे। भूख- भ्रष्टाचार, घोटाला, नेता, सामाजिक आ नैतिक पतन, बदलत मूल्य पऽ ऊंहा के खूब लिखलें बानी। विचित्र बाबा के ‘कुबेर कविताई’, ‘भिनसहरा’, ‘दुपहरिया’, ‘तिजहरिया’, ‘डिबलर’ जइसन पोथी प्रकाशित बाड़ी सऽ।

केहु बैल के पीठी से पैना लड़ावत बा
केहु ककही के कहला से ऐना लड़ावत बा
जेकरा रहत बा, लहत बा, बहत बाटे
ऊ खिड़की से नैना से नैना लड़ावत बा।।

सूई बिना डोरा के, अन्न बिना बोरा के
सेनुर बिना सिन्होरा के, लड़िका बिना कोरा के
आ विचित्र बिना झोरा के उदास हो जालें…

प. कुबेरनाथ मिश्र ‘विचित्र’ जी के लिखल चार गो किताब पढीं भोजपुरी साहित्यांगन प –

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1- जनवासा

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2- कुबेर कबिताई

https://bhojpurisahityangan.com/wp-content/uploads/2018/07/Kuber-Kabitaaii.pdf

3- भागवत रसायन

https://bhojpurisahityangan.com/wp-content/uploads/2021/04/Bhagwat-Rasayan.pdf

4- बिचित्र समोसा

https://bhojpurisahityangan.com/wp-content/uploads/2021/02/Vichitra%20Samosa.pdf

साभार:- आखर पेज

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