नई दिल्ली। वैदिक पंचांग के मोताबिक फाल्गुन महीना के शुक्ल पक्ष के एकादशी तिथि के दिन रंगभरी एकादशी मनावल जाला। एह एकादशी के आमलकी एकादशियो कहल जाला। एह दिन भगवान विष्णु आ मां लक्ष्मी के पूजा-अर्चना के विधान बा। एह दिन तुलसी मइया के पूजा के खास महत्व मानल जाला।
धार्मिक मान्यता बा कि एकादशी के दिन तुलसी के पूजा करे से घर में मां लक्ष्मी के वास होला आ सुख-समृद्धि बढ़ेला। जदि रउआ मां लक्ष्मी के किरपा पावल चाहत बानी, तs रंगभरी एकादशी के दिन तुलसी से जुड़ल ई उपाय जरूर करीं। एह से साधक के किस्मत चमक सकेला।
आर्थिक तंगी होई दूर
जदि रउआ धन के कमी से जूझत बानी, तs रंगभरी एकादशी के दिन सबेरे नहा-धो के तुलसी मइया के पूजा करीं। सांझ के समय तुलसी के पवधा लगे देसी घी के दीया जराईं। एह दौरान “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र के जप करीं आ तुलसी के 5 भा 7 बेर परिक्रमा करीं। मान्यता बा कि एह उपाय से आर्थिक तंगी दूर होला, धन लाभ के जोग बन जाला आ नकारात्मक ऊर्जा खत्म हो जाला।
वैवाहिक जिनगी में आई खुसहाली
जदि रउआ वैवाहिक जिनगी में सुख-शांति चाहत बानी, तs रंगभरी एकादशी के दिन तुलसी मइया के लाल चुनरी चढ़ाईं। तुलसी मइया से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़े आ कलह दूर होखे के प्रार्थना करीं। मान्यता बा कि एह उपाय से दांपत्य जिनगी खुसहाल बनेला।
बियाह में आ रहल बाधा होई खत्म
जदि बियाह में देरी हो रहल बा, तs एकादशी के दिन तुलसी के पूजा-अर्चना करीं आ भगवान विष्णु के हल्दी के गांठ चढ़ाईं। जल्दी बियाह के कामना करीं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, रंगभरी एकादशी के दिन एह उपाय से बियाह में आ रहल रुकावट दूर होला आ मनचाहा जीवनसाथी मिले के जोग बन जाला।
भोग में जरूर डालीं तुलसी के पत्ता
एकादशी के दिन भगवान विष्णु के भोग में तुलसी के पत्ता जरूर सामिल करीं। मान्यता बा कि रंगभरी एकादशी के दिन भोग में तुलसी पत्ता डलला से पूजा के पूरा फल मिलेला आ श्रीहरि के विशेष किरपा बनल रहेला।







