अतवारी छौंक: ‘बात कुछ पुरनका दौर के’ प्यार तs भइल बाकिर ताउम्र रहली अकेले…एह सुपरस्टार हीरोइन के जानीं कहानी

By Anurag Ranjan

Published on: Dec 8, 2024

खबर भोजपुरी रउरा लोग के सोझा एगो नया सेगमेंट लेके आइल बा , जवना में रउरा के पढ़े के मिली फिलिम इंडस्ट्री से जुड़ल रोचक कहानी आ खिसा जवन बितsल जमाना के रही।आजू पढ़ी कि

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आशा पारेख

खबर भोजपुरी रउरा लोग के सोझा एगो नया सेगमेंट लेके आइल बा , जवना में रउरा के पढ़े के मिली फिलिम इंडस्ट्री से जुड़ल रोचक कहानी आ खिसा जवन बितsल जमाना के रही।
आजू पढ़ी कि आशा पारेख आपन पूरा जिनिगी बियाह काहे ना कइली?

आशा पारेख लगभग 3 दशक ले बॉलीवुड के टॉप हीरोइन में गिनल जाली। आपन 40 साल के करियर में आशा पारेख 90 से अधिका फिलिमन में काम कs चुकल बाड़ी. आशा पारेख के 1972 में फिल्म ’कटी पतंग’ खातिर सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार भी मिलल रहे।


एकरा साथे-साथे आशा पारेख के 5 बेर से अधिका फिल्मफेयर अवार्ड खातिर नामांकित कइल गइल.आशा पारेख के असली जिनिगी फिल्मी कहानी से कम ना रहे. आशा पारेख जिनगी भर बियाह ना कइली। एतने ना आशा पारेख आपन माई-बाबूजी के एकलौती संतान रहली। एकरा बाद भी आशा आपन प्यार खातीर आपन इच्छा के त्याग कs देली।

के रहे आशा पारेख के प्यार?
उs कबो बियाह ना कइली. आशा पारेख के नासिर हुसैन से प्यार हो गइल रहे। आशा पारेख आ नासिर हुसैन के भी बढ़िया दोस्ती रहे। बाकिर आशा उनकरा से प्यार करत रहली। हालांकि नासिर हुसैन के बियाह पहिलही हो चुकल रहे। एही कारन आशा पारेख आपन कदम पीछे कs लिहली।

नासिर हुसैन के साथे आशा पारेख कईयो फिल्मन में काम कइले रहली, जेमें ‘जब प्यार किसी से होता है’ (1961), ‘फिर वही दिल लाया हूं’ (1963), ‘तीसरी मंजिल’ (1966), ‘बहारों के सपने’ (1967), ‘प्यार का मौसम’ (1969) आ ‘कारवां’ (1971) जइसन फिल्म के नाव शामिल बा.

नासिर आ आशा के जोड़ी के चर्चा ना खाली ओह लोग के फिलिमन खातिर होखे लागल बलुक दोस्ती खातिर भी होत रहे. पूरा कहानी तबे सोझा आइल जब आशा पारेख आपन बायोग्राफी ‘द हिट गर्ल’ में एह बात के जिक्र कइली. एह किताब के विमोचन के दौरान आशा मान लिहली कि नासिर अकेला अइसन आदमी हउवें जिनका से ऊ प्यार कइले रहली.
आशा अपना बायोग्राफी ‘द हिट गर्ल’ में बतवले बाड़ी कि नासिर के साथे सात गो फिलिमन में काम कइले बाड़ी. उनकरा से प्यार कइला के बावजूद ऊ कबो उनकरा से बियाह करे के ना सोचली काहे कि ऊ ‘गृहिणी’ ना बनल चाहत रहली चुकी हुसैन पहिलहीं से बियाह कs चुकल रहले एहसे परिवार टूटे के डर से ऊ आपन प्यार ना जता पवली आ एकर नतीजा ई भइल कि ऊ आपन जिनिगी खतम कs दिहली अकेले रही के। उs केहु से बियाह ना कईली अवुरी आज ले अकेले रहत बाड़ी।

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