गोरखपुर। मोबाइल के चमकत स्क्रीन बचपन प भारी पड़े लागल बा। कुछ देर मनोरंजन खातिर हाथ में दिहल गइल मोबाइल कब ओह लोग के जरूरत आ फेर लत बन जाला, एकर एहसास घरवाले के तब होला, जब लइका ओकरा बिना बेचैन होखे लगेलन। मोबाइल के लत लइकन के भूख-पियास, नींद आ पढ़ाई प असर डाल रहल बा।
सोशल मीडिया प लाइक आ कमेंट कम मिले से कुछ लइका अवसाद के चपेट में आ रहल बाड़ें। स्थिति एतना गंभीर होत जा रहल बा कि मोबाइल छीनला पर लइका घर में झगड़ा करे, तोड़फोड़ करे आ घर से भागे तक पर उतारू हो जात बाड़ें। कुछ मामिलन में आत्महत्या जइसन जानलेवा कदम उठावे के खतरो सामने आ रहल बा।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग ओपीडी में अइसन लइका आ रहल बाड़ें, जिनकर इलाज चल रहल बा। विशेषज्ञन के कहनाम बा कि मोबाइल के बहुत जादे इस्तेमाल के खाली लइकन के जिद भा अनुशासनहीनता समझ के नजरअंदाज कइल ठीक नइखे। जब कवनो लइका मोबाइल के बिना सामान्य व्यवहार नइखे कर पावत, चिड़चिड़ा रहे लागत बा भा ओकर दिनचर्या पर असर पड़े लागत बा, त ई गंभीर चिंता के विषय बा।
इंटरनेट मीडिया के दौर में लइकन खातिर दोसरा लोग के प्रतिक्रिया भी जरूरी होत जा रहल बा। पोस्ट पर लाइक आ कमेंट कम मिले पर ऊ लोग अपना के दोसरा से कमतर समझे लागता। लगातार दोसरा से तुलना करे के आदत उनकर आत्मविश्वास कमजोर कर सकेले।
ओहिजा, देर रात तक मोबाइल देखला से नींद पर असर पड़त बा। एकर असर अगिला दिन के दिनचर्या, एकाग्रता आ पढ़ाई पर पड़ेला। कई लइका खेलकूद आ परिवार के साथ समय बितावे के बजाय मोबाइल के स्क्रीन में ही उलझल रहेलन।
मोबाइल दीं, निगरानी जरूरी
विशेषज्ञन के कहनाम बा कि लइकन के मोबाइल देवे के साथे अभिभावकन के जिम्मेदारी भी बढ़ जाला। ओह लोग के ई देखे के चाहीं कि लइका मोबाइल पर कतना समय बिता रहल बा आ कइसन सामग्री देख रहल बा। छोट उमिर से ही स्क्रीन के इस्तेमाल खातिर समय के साफ सीमा तय कइल जरूरी बा। लइकन के खेलकूद, किताब आ परिवार के साथ बातचीत करे खातिर भी प्रोत्साहित करे के चाहीं।
लइकन के मानसिक रूप से मजबूत बनावे के होई
लइकन के हर इच्छा पूरा होखे के आदत डलवावे के बजाय, ओह लोग के असफलता, निराशा आ असहमति स्वीकार कइल सिखावल जरूरी बा। ओह लोग के समझावे के होई कि जिनगी में हर चीज मनमुताबिक ना मिल सके। मोबाइल के इस्तेमाल सीमित कइला पर लइका परेशान होखे, त ओकर परेशानी के खाली डाँट भा सजा से दूर करे के कोशिश करे के बजाय ओकरा से बातचीत करे के चाहीं।
अगर कवनो लइका लगातार उदास रहे, आक्रामक व्यवहार करे भा अपना के नुकसान पहुँचावे के बात कहे, त मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के मदद लेवे के चाहीं।
मोबाइल की लत से बचावे के खातिर अपनाइ इ उपाय
- स्क्रीन टाइम निर्धारित करी
- खुद बनी उदाहरण
- खेलकूद के खातिर् करी प्रेरित
- बच्चों से संवाद करी
- इंटरनेट मीडिया के उपयोग प रखी नजर
- जिद के आगे न झुकी, लेकिन संवेदनशील रहें
- जरूरत पड़ले प विशेषज्ञ क मदद लेंइ
- लत पड़ गइल बा त अचानक मोबाइल न छीनी
“लइकन में मोबाइल के बहुत जादे इस्तेमाल के गंभीरता से लेवे के जरूरत बा। अभिभावकन के मोबाइल के इस्तेमाल पर नजर रखे के साथे लइकन के सहनशील बनावे के चाहीं। ओह लोग के हर परिस्थिति के सामना कइल सिखाईं आ मनचाहा चीज ना मिलला पर भी सहज रहे के आदत विकसित करीं।”
– डॉ. अमित कुमार शाही, मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल






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