कविता: अभियो बचा ली ना बिहार ए नीतीशऽ बाबू

By Anurag Ranjan

Published on: Dec 15, 2022

अभियो बचा ली ना बिहार ए नीतीशऽ बाबू जरऽता आपन बिहार ए नीतीशऽ बाबू साइकिल पोशाक खाना मिले इस्कूल में जी शिक्षा के लेबल मिलल जाता धूल में जी ताश के महल बहार ए नीतीशऽ

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अभियो बचा ली ना बिहार ए नीतीशऽ बाबू
जरऽता आपन बिहार ए नीतीशऽ बाबू

साइकिल पोशाक खाना मिले इस्कूल में जी
शिक्षा के लेबल मिलल जाता धूल में जी
ताश के महल बहार ए नीतीशऽ बाबू
अभियो बचा ली ना बिहार…

सारा बिहार के विकास नालंदा में
हमनी के ज्वाइनिंग लेटर पुलिस के डंडा में
एह खातिर बावे खूब आभार ए नीतीशऽ बाबू
अभियो बचा ली ना बिहार…

कहीं के सूखल भादो लागे आषाढ़ जी
कहीं पे बारहमासा नाली के बाढ़ जी
करी बेवस्थित जलधार ए नीतीशऽ बाबू
अभियो बचा ली ना बिहार…

कुर्सी के नीचे ईंटा साजी के कबले बइठेम
जरल जोर जस आखिर कबले अइठेम
खिसकता नीचे से आधार ए नीतीशऽ बाबू
अभियो बचा ली ना बिहार…

©यशस्वी यशवंत

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