लखीमपुर खीरी बायोप्लास्टिक संयंत्र खातिर बेल्जियम से मंगावल 200 टन वजन के विशाल वेसल बस्ती पहुंच गइल बा। एह भारी-भरकम उपकरण के ढोवे वाला महाट्रक से 58 गो पहिया निकाल दिहल गइल बा। अब ई ट्रक 308 गो पहिया के जगह 250 गो पहिया के सहारे आपन सफर पूरा करत आगे बढ़ रहल बा। आखिर एतना पहिया निकाले के जरूरत काहे पड़ल? आइं, पूरा खबर जानल जाव।
बस्ती पहुंचल 200 टन वजन के महाट्रक
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिला के कुंभी में देश के पहिला पॉलीलैक्टिक एसिड (PLA) आधारित बायोप्लास्टिक निर्माण संयंत्र स्थापित कइल जा रहल बा। एह संयंत्र खातिर बेल्जियम से मंगावल करीब 200 टन वजन के विशाल वेसल अब बस्ती पहुंच गइल बा।
करीब 41 मीटर लंबा, छह से सात मीटर चौड़ा आ सात से आठ मीटर ऊंचा एह उपकरण के ढोवे खातिर खास क्षमता वाला जेएम बक्सी पुलर के इस्तेमाल हो रहल बा। जब ई महाट्रक बस्ती शहर के मनौरी आ पॉलिटेक्निक चौराहा पर पहुंचल, त एकरा के देखे खातिर लोग के भीड़ जुट गइल।
आखिर काहे निकालल गइल 58 गो पहिया?
एतना भारी उपकरण के ढोवे वाला ट्रेलर में झारखंड तक 308 गो पहिया लगावल गइल रहे। बाकिर रास्ता में मोड़ लेवे में परेशानी होखत रहे। एह समस्या के दूर करे आ ट्रेलर के आवाजाही आसान बनावे खातिर 58 गो पहिया निकाल दिहल गइल।
अब ई महाट्रक 250 गो पहिया के सहारे आगे बढ़ रहल बा। एकर रफ्तार करीब पांच से आठ किलोमीटर प्रति घंटा बा। चालक के मुताबिक, एह विशाल ट्रक के चलावे में रोज करीब 200 लीटर डीजल के खपत हो रहल बा।
एतना भारी आ बड़ उपकरण के सुरक्षित तरीका से मंजिल तक पहुंचावे खातिर सड़क, मोड़ आ रास्ता के चौड़ाई के खास ध्यान रखल जा रहल बा।
चीनी आ कचरा से बनी बायोप्लास्टिक
लखीमपुर खीरी के कुंभी में बन रहल एह संयंत्र के खासियत ई बा कि इहां चीनी आ ओकरा से जुड़ल अपशिष्ट पदार्थ के इस्तेमाल करके पीएलए आधारित बायोप्लास्टिक बनावल जाई।
एह प्रक्रिया में पहिले शर्करा से लैक्टिक एसिड तैयार होई। ओकरा बाद लैक्टाइड के माध्यम से पीएलए रेजिन बनावल जाई। एह रेजिन से अलग-अलग तरह के प्लास्टिक उत्पाद तैयार कइल जा सकी।
एह परियोजना से देश में पीएलए बायोप्लास्टिक के घरेलू उत्पादन बढ़ावे के उम्मीद बा। एकरा चलते विदेश से एह सामग्री के आयात पर निर्भरता कम करे में भी मदद मिल सकेला।
रास्ता बनावे खातिर हटावल जा रहल बिजली के तार आ खंभा
बलरामपुर चीनी मिल्स लिमिटेड के संयंत्र तक एह विशाल उपकरण के पहुंचावे खातिर बस्ती से लखीमपुर खीरी तक विशेष इंतजाम कइल गइल बा।
जहां सड़क संकरी बा, ओहिजा रास्ता के चौड़ा आ दुरुस्त कइल जा रहल बा। ट्रेलर के सुरक्षित आवागमन खातिर बिजली के तार, खंभा, साइन बोर्ड आ जरूरत के हिसाब से पेड़ हटावल जा रहल बा।
एह काम में पुलिस, यातायात, बिजली विभाग, वन विभाग आ राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग के टीम मिलके काम कर रहल बाड़ी स।
कुल मिलाके, 200 टन वजन के ई महाट्रक अपना विशाल आकार आ 250 पहिया के चलते लोग के आकर्षण के केंद्र बनल बा। एकरा मंजिल तक पहुंचला के बाद कुंभी के बायोप्लास्टिक संयंत्र में उत्पादन शुरू होखे के दिशा में एगो महत्वपूर्ण कदम बढ़ी।
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