दस में से चार लोग के मोटापा के चलते हो रहल बा कैंसर

By Anurag Ranjan

Published on: Jul 10, 2024

अमेरिकी संगठन 17 लाख लोग पs एगो अध्ययन कइलस। कैंसर एगो खतरनाक आ जानलेवा बेमारी हऽ आ एकरा असर के चलते दुनिया भर में हर साल लाखों लोगन के मौत हो जाला। एगो नाया अध्ययन

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अमेरिकी संगठन 17 लाख लोग पs एगो अध्ययन कइलस। कैंसर एगो खतरनाक आ जानलेवा बेमारी हऽ आ एकरा असर के चलते दुनिया भर में हर साल लाखों लोगन के मौत हो जाला। एगो नाया अध्ययन में वैज्ञानिक दावा कइले कि अब जवन कैंसर के मामला के रिपोर्ट होखता, ओकरा में से करीब 40 प्रतिशत मामला मोटापा के चलते बा।

शोधकर्ता के कहनाम बा कि मोटापा से पीड़ित लोग में कैंसर के खतरा जादे होखेला। केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी ऑफ अमेरिका के वैज्ञानिक लोग ई शोध कइले बा। शोधकर्ता के रिपोर्ट में कहल गइल कि, टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित जादा वजन वाला लोग में कैंसर के 10 लक्षण होखे के संभावना जादे होखेला। एह आंकड़ा के एकट्ठा करे खातिर टाइप 2 डायबिटीज आ मोटापा से पीड़ित करीब 17 लाख लोग पर नजर राखल गइल। जामा नेटवर्क ओपन जर्नल में प्रकाशित एह अध्ययन में पाता चलल कि टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित जादा वजन वाला लोग में कैंसर के दर बढ़े के संभावना जादे बा।

शोधकर्ता के कहनाम बा कि शरीर में मोटापा के कारण एडिपोज टिश्यू (चर्बी के एगो खास रूप) के जमाव होखेला। कैंसर के ट्यूमर कोशिका सभ एह वसा ऊतक पर निर्भर हो के बिकसित होला।

साल 2022 में 9.16 लाख लोग के मौत

इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईएआरसी) के रिपोर्ट के मोताबिक, 2022 में कैंसर के चलते 9.16 लाख लोग के मौत भइल रहे। एकरा में स्तन, गर्भाशय ग्रीवा आ मुंह के कैंसर के मरीज के संख्या जादे रहल। साल 2023 में दुनिया भर में 14.13 लाख कैंसर के मामला सामने आइल रहे जवन एह साल बढ़ के 20 लाख हो गइल बा। रिपोर्ट के मोताबिक, साल 2040 तक हर साल कैंसर के नाया केस के संख्या बढ़ के 2.99 मिलियन आ कैंसर से जुड़ल मौत के संख्या 1.53 करोड़ होखे के उम्मेद बा। रोकथाम खातिर जीवनशैली में सुधार जरूरी बा। कबाड़ आ प्रोसेस्ड फूड खाए से बचे के चाही। नियमित व्यायाम आ शारीरिक गतिविधि जरूरी बा साथहीं सिगरेट आउर शराब से दूर रहे के चाही।

भारतो में मोटापा एगो गंभीर समस्या बा

भारतो में मोटापा एगो गंभीर समस्या बा। द लैंसेट के रिपोर्ट के मोताबिक, साल 2022 में 2.6 करोड़ पुरुष आ 4.4 करोड़ महिला एह समस्या से जूझत रहे। वयस्क लोग में ई संख्या 1990 के मोकाबला में दुगुना बा।

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