परिसीमन बिल पर अखिलेश यादव देइहें BJP के साथ? DMK के मनावे में जुटल NDA, जान लीं संसद के पूरा नंबर गेम

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: अभी-अभी

लोकसभा में परिसीमन विधेयक पास करावे के कोशिश में केंद्र सरकार जुटल बिया। एह बिल के पास करावे खातिर मोदी सरकार के संसद में दू तिहाई बहुमत के जरूरत पड़ी। फिलहाल एनडीए के लगे जरूरी

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लोकसभा में परिसीमन विधेयक पास करावे के कोशिश में केंद्र सरकार जुटल बिया। एह बिल के पास करावे खातिर मोदी सरकार के संसद में दू तिहाई बहुमत के जरूरत पड़ी। फिलहाल एनडीए के लगे जरूरी संख्या बल नइखे, एहसे सरकार विपक्षी दलन आ क्षेत्रीय पार्टियन के समर्थन जुटावे के कोशिश करत बिया। एह बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आ तमिलनाडु के सत्तारूढ़ दल डीएमके के रुख पर सभकर नजर टिकल बा।

परिसीमन बिल के लेके संसद के विशेष सत्र होखे के संभावना भी बनल बा। सरकार के उम्मीद बा कि कुछ विपक्षी दल के समर्थन भा वोटिंग से दूर रहे के फैसला ओकरा खातिर फायदेमंद साबित हो सकेला। हालांकि, बिल पर अंतिम फैसला होखे से पहिले राजनीतिक समीकरण में बदलाव के संभावना बनल बा।

लोकसभा में का बा NDA के नंबर गेम?

मिलल जानकारी के मुताबिक, लोकसभा के तीन सीट खाली होखे के चलते सदन में फिलहाल 540 सांसद बाड़ें। अगर सभे सांसद मौजूद रहके वोटिंग में हिस्सा लेला त संविधान संशोधन खातिर दू तिहाई बहुमत के हिसाब से 360 वोट के जरूरत पड़ी।

एनडीए के लगे फिलहाल करीब 320 सांसदन के समर्थन होखे के दावा कइल जा रहल बा। एहमें कुछ बागी सांसद आ क्षेत्रीय दलन के सांसद भी शामिल बतावल गइल बाड़ें। अगर सरकार के समर्थन करे वाला सभे सांसद एकजुट रहेलें त ओकर संख्या बढ़ सकेला। बाकिर बिल पास करावे खातिर जरूरी आंकड़ा तक पहुँचल अबहियो चुनौती बा।

राज्यसभा में भी सरकार के बहुमत जुटावे के जरूरत पड़ी। उपलब्ध आंकड़ा के मुताबिक, 244 सदस्य वाला सदन में दू तिहाई बहुमत के गणित 164 वोट के आसपास बा, जबकि एनडीए के समर्थन करीब 158 सांसदन के बतावल जा रहल बा। वास्तविक जरूरत सदन में मौजूद सदस्यन आ मतदान के स्थिति पर निर्भर करी।

DMK के मनावे के कोशिश में भाजपा

तमिलनाडु के राजनीतिक दल डीएमके परिसीमन के मुद्दा पर आपन विरोध जता चुकल बिया। पार्टी के चिंता बा कि परिसीमन के चलते दक्षिण भारतीय राज्यन के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकेला। डीएमके के मानना बा कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करे वाला राज्यन के संसद में प्रतिनिधित्व के नुकसान ना होखे के चाहीं।

भाजपा के उम्मीद बा कि सीट बढ़ोतरी पर 50 प्रतिशत के सीमा तय करे जइसन प्रावधान से डीएमके के सहमत कइल जा सकेला। हालांकि, डीएमके से जुड़ल सूत्रन के रुख बा कि बिल के वास्तविक प्रावधान देखला के बादे पार्टी आपन अंतिम राय देई।

डीएमके के समर्थन हासिल कइल एनडीए खातिर आसान ना होई, काहे कि ई मुद्दा तमिलनाडु के राजनीति आ दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़ल बा।

अखिलेश यादव पर काहे टिकल बा नजर?

समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में विपक्ष के एगो प्रमुख दल ह। परिसीमन के चलते लोकसभा के सीट बढ़े के संभावना के राजनीतिक असर यूपी पर भी पड़ सकेला। एह वजह से भाजपा के रणनीतिकार सपा के रुख पर नजर रखले बाड़ें।

राजनीतिक गलियारा में चर्चा बा कि अगर अखिलेश यादव के पार्टी बिल के समर्थन करे भा वोटिंग से दूर रहे के फैसला लेवे त सरकार के गणित कुछ आसान हो सकेला। हालांकि, सपा के ओर से समर्थन के कवनो पक्का फैसला के पुष्टि नइखे।

कांग्रेस आ समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद के चर्चा जरूर बा, बाकिर एही आधार पर ई मान लिहल ठीक ना होई कि सपा परिसीमन बिल पर भाजपा के साथ दे दी।

YSRCP आ बाकी दल भी बन सकेलें निर्णायक

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP), एनसीपी (शरद पवार गुट), शिवसेना (उद्धव गुट), एआईएमआईएम आ बीजेडी जइसन दलन के रुख भी सरकार खातिर महत्वपूर्ण हो सकेला। अगर एह दलन में से कुछ समर्थन देत बाड़ें त एनडीए के संख्या बल बढ़ सकेला।

हालांकि, हर पार्टी अपना राजनीतिक हित, राज्य के प्रतिनिधित्व आ बिल के प्रावधान के आधार पर फैसला करी। एहसे अभी से कवनो अंतिम नतीजा निकालल जल्दबाजी होई।

अगिला हफ्ता हो सकेला निर्णायक

परिसीमन बिल पर सरकार के रणनीति, विपक्षी दलन के एकजुटता आ क्षेत्रीय पार्टियन के फैसला संसद के राजनीति के नया दिशा दे सकेला। 30 अक्टूबर से 4 नवंबर के बीच के समय सरकार खातिर महत्वपूर्ण बतावल जा रहल बा।

अब सवाल ई बा कि अखिलेश यादव आ डीएमके सरकार के समर्थन करिहें, वोटिंग से दूर रहीहें कि बिल के विरोध में खड़ा रहीहें। फिलहाल एह सवाल के जवाब राजनीतिक बातचीत आ बिल के वास्तविक प्रावधान सामने अइला के बादे साफ होई।

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