भारत में कैंसर के इलाज के क्षेत्र में एगो सकारात्मक बदलाव देखे के मिल रहल बा। सस्ता इम्यूनोथेरेपी दवाई उपलब्ध होखे से अब अधिका मरीजन के आधुनिक इलाज के सुविधा मिल सकेला। पहिले जवना इलाज खातिर एक लाख रुपिया से अधिका खर्च करे के पड़त रहे, अब ओही इलाज के एगो साइकिल के खर्च लगभग 30 हजार रुपिया होखे के दावा कइल जा रहल बा। एह बदलाव के मुख्य वजह ‘निवोलुमब’ (Nivolumab) के सस्ता बायोसिमिलर वर्जन के बाजार में आवल बा।
इम्यूनोथेरेपी कैंसर के इलाज के एगो आधुनिक तरीका ह। एहमें मरीज के शरीर के प्रतिरक्षा प्रणाली यानी इम्यून सिस्टम के कैंसर कोशिका से लड़े खातिर सक्रिय कइल जाला। हालांकि, ई दवाई हर मरीज आ हर तरह के कैंसर में एके जइसन असर नइखे करत। एकर इस्तेमाल डॉक्टर के सलाह आ मरीज के स्थिति के आधार पर कइल जाला।
सस्ता दवाई से बढ़ल इलाज के पहुंच
टाटा मेमोरियल सेंटर (TMC) के डॉक्टरन के मुताबिक, निवोलुमब कई तरह के ट्यूमर आ कैंसर के इलाज में उपयोगी साबित हो रहल बा। सस्ता बायोसिमिलर उपलब्ध होखे से ओह मरीजन के राहत मिल रहल बा, जे महंगा इलाज के खर्च उठावे में सक्षम ना रहस।
मुंबई के अंधेरी स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल के डॉ. इमरान शेख के मुताबिक, सस्ता दवाई बाजार में अइला के बाद पिछला छह महीना में उनकरा लगे इम्यूनोथेरेपी लिखे के मामला में 50 फीसदी से अधिका बढ़ोतरी भइल बा।
डॉक्टर के कहनाम बा कि पहिले जवना मरीज के एक साइकिल खातिर एक लाख रुपिया से अधिका खर्च करे में परेशानी होत रहे, ऊ अब करीब 30 हजार रुपिया के कीमत पर इलाज करावे के बारे में सोच सकत बाड़ें। एहसे आर्थिक रूप से कमजोर आ मध्यमवर्गीय परिवारन खातिर इलाज के विकल्प बढ़ल बा।
पहिले बहुत कम मरीज ले पावत रहलें फायदा
साल 2022 में टाटा मेमोरियल सेंटर के एगो अध्ययन के मुताबिक, इम्यूनोथेरेपी खातिर योग्य मरीजन में से महज 2.8 फीसदी मरीज के ई इलाज मिल पावत रहे। महंगा दवाई आ इलाज के खर्च एकर एगो प्रमुख कारण रहल।
अब सस्ता विकल्प उपलब्ध होखे से अधिका मरीजन तक एह इलाज के पहुंच बढ़े के उम्मीद बा। हालांकि, दवाई के कीमत कम होखला के बावजूद जांच, अस्पताल में भर्ती, डॉक्टर के फीस आ बाकी इलाज के खर्च मरीज के कुल खर्च बढ़ा सकत बा।
गंभीर कैंसर में भी बढ़ रहल उम्मीद
टाटा मेमोरियल अस्पताल, परेल के मेडिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. कुमार प्रभास के मुताबिक, इम्यूनोथेरेपी के चलते कुछ प्रकार के कैंसर में मरीज के लंबा समय तक जिए के संभावना में सुधार भइल बा।
स्किन कैंसर के कुछ गंभीर मामिला में इम्यूनोथेरेपी से बेहतर परिणाम देखे के मिलल बा। एडवांस फेफड़ा कैंसर के कुछ मरीज अब पांच साल भा ओकरा से अधिका समय तक जीवित रह पावत बाड़ें।
ओहिजा, कोलन कैंसर के कुछ शुरुआती मामिला में, खासकर जब ट्यूमर में खास जैविक विशेषता मौजूद होखे, इम्यूनोथेरेपी से सर्जरी आ कीमोथेरेपी के जरूरत कम हो सकेला। बाकिर अइसन इलाज हर मरीज खातिर उपयुक्त ना होला।
अभी बाकी बा कई गो चुनौती
भारत में इम्यूनोथेरेपी के उपलब्धता बढ़ल जरूर बा, बाकिर अभी कई गो चुनौती मौजूद बाड़ी स। कुछ आधुनिक दवाई अबहियों विदेश से मंगावल जाली स, जवना के चलते इलाज के खर्च लाखन रुपिया तक पहुंच सकेला।
एह बीच, नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) के 137 एंटी-कैंसर दवाई पर ट्रेड मार्जिन सीमित करे के फैसला से सालाना करीब 2,500 करोड़ रुपिया के बचत के उम्मीद जतावल गइल बा। हालांकि, एह बचत के वास्तविक फायदा मरीज तक पहुंचे खातिर दवाई के उपलब्धता आ अस्पतालन के खरीद नीति भी महत्वपूर्ण बा।
थर्ड वर्ल्ड नेटवर्क के के.एम. गोपीकुमार के चिंता बा कि कुछ अस्पताल अपना मेडिकल स्टोर से दवाई खरीदे के शर्त रख सकेलें। अइसन स्थिति में सस्ता विकल्प उपलब्ध रहला के बावजूद मरीज के महंगा ओरिजिनल दवाई खरीदे के दबाव पड़ सकेला।
₹10 हजार तक आ सकेला दवाई के कीमत
आगे चलके निवोलुमब के चार गो अउरी वर्जन बाजार में आवे के संभावना जतावल गइल बा। अगर एह दवाई के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ल, त एक साइकिल के कीमत करीब 30 हजार रुपिया से घटके 10 हजार रुपिया तक पहुंचे के उम्मीद बा। बाकिर ई भविष्य के संभावना ह, पक्का कीमत ना।
कुल मिलाके, सस्ता इम्यूनोथेरेपी दवाई कैंसर मरीजन खातिर एगो महत्वपूर्ण राहत बन सकेले। जरूरत बा कि सस्ता विकल्प अस्पतालन में उपलब्ध होखे, मरीजन के सही जानकारी मिले आ डॉक्टर के देखरेख में उचित इलाज सुनिश्चित कइल जाए।
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