नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष के ओर से प्रधानमंत्री पद के बेहतर चेहरा केहू हो सकेला? एह सवाल पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला आपन राय रखले बाड़ें। हाल के एगो इंटरव्यू में जब उनका सामने कांग्रेस नेता राहुल गांधी, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आ आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल में से कवनो एक नाम चुने के कहल गइल, त ऊ राहुल गांधी के नाम लिहलें।
उमर अब्दुल्ला खाली राहुल गांधी के नामे ना बतवलें, बलुक एकरा पीछे के वजह भी समझवलें। उनका मुताबिक, भारत में फिलहाल कांग्रेस आ भारतीय जनता पार्टी (BJP) अइसन दू गो राजनीतिक दल बाड़ें, जिनकर मौजूदगी देश के अलग-अलग हिस्सा में बा। उमर के मानना बा कि राष्ट्रीय स्तर पर राजनीति करे खातिर पार्टी के देशभर में मौजूदगी जरूरी बा।
शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला विपक्ष के नेतृत्व, राष्ट्रीय राजनीति आ राहुल गांधी के राजनीतिक सफर पर खुलकर आपन विचार रखलें।
राहुल गांधी के काहे चुनलें उमर अब्दुल्ला?
इंटरव्यू के दौरान जब उमर अब्दुल्ला से पूछल गइल कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष के बेहतर नेता के रूप में ऊ राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल आ ममता बनर्जी में से केकरा देखत बाड़ें, त ऊ राहुल गांधी के नाम बतवलें।
अपना फैसला के वजह बतावत ऊ कहले कि भारत में कांग्रेस आ भाजपा अइसन पार्टी हई स, जिनकर संगठन आ राजनीतिक मौजूदगी देश के अलग-अलग हिस्सा में बा। बाकी कई क्षेत्रीय दल अपना सीमित इलाका में मजबूत होखला के बावजूद खुद के राष्ट्रीय राजनीति के प्रमुख ताकत मान लेत बाड़ें।
उमर अब्दुल्ला के कहनाम रहे कि कवनो नेता के राष्ट्रीय पहचान तबे मजबूत होला, जब ओकर पार्टी के मौजूदगी पूरा देश में होखे। एह लिहाज से राहुल गांधी के कांग्रेस से जुड़ल होखल उनका खातिर एगो बड़ फायदा बा।
‘हम खुद के राष्ट्रीय नेता ना मानत बानी’
उमर अब्दुल्ला बातचीत में आपन राजनीतिक स्थिति के उदाहरण देत कहलें कि ऊ खुद के राष्ट्रीय नेता ना मानेलें। उनकर राजनीति मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर तक सीमित बा।
उनका मुताबिक, कवनो राज्य या छोट इलाका में राजनीतिक प्रभाव रखे भर से कवनो नेता राष्ट्रीय स्तर के नेता ना बन जाला। राष्ट्रीय नेता बने खातिर देश के अलग-अलग हिस्सा में राजनीतिक स्वीकार्यता आ संगठनात्मक मौजूदगी जरूरी बा।
ऊ इहो कहलें कि कई क्षेत्रीय नेता अपना राज्य में मजबूत होखलें, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर ओह लोग के प्रभाव सीमित रहेला। एह वजह से राहुल गांधी के राष्ट्रीय राजनीतिक पहचान उनका बाकी विकल्पन से अलग बनावेला।
राहुल गांधी बेहतर इंसान कि बेहतर राजनेता?
इंटरव्यू के दौरान राहुल गांधी के व्यक्तित्व पर भी सवाल पूछल गइल। जब उमर अब्दुल्ला से पूछल गइल कि राहुल गांधी बेहतर इंसान बाड़ें कि बेहतर राजनेता, त ऊ कहलें कि राहुल एगो बेहतर इंसान हवे, लेकिन साथही तेजी से खुद के तैयार करत एगो राजनेता भी हवे।
उमर अब्दुल्ला राहुल गांधी के आम लोग से मिले-जुले के तरीका के खास तौर पर सराहना कइलें। उनका कहनाम रहे कि राहुल गांधी लोग से मिलत घरी खाली औपचारिक बातचीत ना करेलें, बलुक उनकर बात ध्यान से सुनेंले आ गहराई से संवाद करेलें।
ऊ बतवलें कि राहुल गांधी आम लोग के बीच बइठ के उनकर समस्या समझे के कोशिश करेलें। अइसन करे खातिर समय आ धैर्य दुनो के जरूरत होला। उमर के मुताबिक, राजनीति में कई लोग के लगे एतना समय नइखे रहत कि ऊ आम जनता के साथ लंबा बातचीत कर सके।
हाल के समय में बढ़ल राहुल गांधी के राजनीतिक प्रभाव
उमर अब्दुल्ला के मानना बा कि हाल के समय में राहुल गांधी के राजनीतिक प्रभाव बढ़ल बा। ऊ कहले कि एह बदलाव से इनकार कइल सही ना होई।
उनका मुताबिक, अब केंद्र सरकार भी राहुल गांधी के बात के पहिले से अधिक गंभीरता से ले रहल बा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राहुल गांधी सरकार के फैसला पर सवाल उठावत बाड़ें आ विपक्ष के मुद्दा के सामने रखत बाड़ें।
फरवरी 2026 में भी उमर अब्दुल्ला राहुल गांधी के विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन कइले रहलें। ऊ कहले रहलें कि सरकार से सवाल पूछल आ ओकरा के जवाबदेह बनावल विपक्ष के मुख्य जिम्मेदारी ह। <Cite refs={[“turn707613search8″,”turn707613search10”]}/>
कांग्रेस के साथ जम्मू-कश्मीर में सरकार चला रहल बाड़ी एनसी
उमर अब्दुल्ला के ई बयान राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानल जा रहल बा, काहेकि जम्मू-कश्मीर में उनकर नेशनल कॉन्फ्रेंस कांग्रेस समेत सहयोगी दलन के समर्थन से सरकार चला रहल बिया।
90 सदस्यीय जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस सबसे बड़ पार्टी बनके उभरल रहे। पार्टी के 41 विधायक बाड़ें। सरकार के सामने पूर्ण राज्य के दर्जा बहाल करावे के मांग एगो प्रमुख मुद्दा बनल बा।
एह बीच विपक्षी गठबंधन INDIA में नेतृत्व के सवाल पर भी समय-समय पर चर्चा होत रहल बा। राहुल गांधी, ममता बनर्जी आ अरविंद केजरीवाल जइसन नेता के भूमिका के लेके अलग-अलग राजनीतिक राय सामने आवत रहेला।
अइसन माहौल में उमर अब्दुल्ला के राहुल गांधी के समर्थन विपक्षी राजनीति के लिहाज से चर्चा के विषय बन गइल बा। हालांकि, उनका बयान के विपक्षी गठबंधन के आधिकारिक फैसला ना मानल जा सकेला। गठबंधन के नेतृत्व के बारे में अंतिम फैसला ओकर सहयोगी दल आपसी बातचीत से ही कर सकत बाड़ें।
फिलहाल उमर अब्दुल्ला के बयान से साफ बा कि ऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने विपक्ष के बेहतर राष्ट्रीय चेहरा के रूप में राहुल गांधी के देखत बाड़ें।






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