दिल्ली-एनसीआर: दिल्ली पुलिस के इतिहास में जवानन के विरोध-प्रदर्शन के तीन बड़ घटना दर्ज बा। करीब 60 साल के दौरान दिल्ली पुलिस के जवान तीन बेर आपन मांग आ अधिकार खातिर सड़क पर उतरले बाड़ें। पहिला बेर मई 1966 में, दूसरा बेर नवंबर 2019 में आ अब तीसरा बेर नवंबर 2026 में पुलिसकर्मी प्रदर्शन कइले बाड़ें। हालांकि, तीनों आंदोलन के वजह अलग-अलग रहल बा। पहिला आंदोलन में जवान बेहतर कामकाजी माहौल, सही ड्यूटी समय आ वेतन-भत्ता बढ़ावे के मांग उठवले रहलें, जबकि बाद के दुनो आंदोलन वकीलन के साथ विवाद आ पुलिसकर्मियन के कथित पिटाई के विरोध में भइल।
1966 में 7 हजार से अधिक पुलिसकर्मी कइले रहलें आंदोलन
दिल्ली पुलिस के इतिहास में मई 1966 के आंदोलन पहिला बड़ पुलिसकर्मी विरोध-प्रदर्शन मानल जाला। ओह समय 7 हजार से अधिक पुलिसकर्मी आपन मांग के लेके सड़क पर उतर गइल रहलें। जवानन के मांग रहे कि ओह लोग के काम करे के परिस्थिति बेहतर बनावल जाए, ड्यूटी के समय निर्धारित होखे आ वेतन के साथे भत्ता में बढ़ोतरी कइल जाए।
ओह समय दिल्ली में मुख्यमंत्री के पद ना रहे आ राजधानी राष्ट्रपति शासन के तहत केंद्र सरकार के सीधा प्रशासन में रहे। सरकार एह आंदोलन के काफी सख्ती से दबावे के फैसला कइलस।
गृह मंत्रालय के निर्देश पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान दिल्ली पुलिस के प्रदर्शनकारी जवानन के बैरक में बंद कर दिहलें। एह दौरान कई पुलिसकर्मियन के गिरफ्तार करके तिहाड़ जेल भेज दिहल गइल। बाकी जवानन के बैरक से बाहर निकले तक के अनुमति ना मिलल।
सरकार के सख्त कार्रवाई के चलते आंदोलन समाप्त हो गइल। एह घटना के बाद काफी लंबा समय तक दिल्ली पुलिस के जवान वेतन बढ़ोतरी आ दोसरा मांगन के लेके कवनो बड़ आंदोलन ना कइलें।
2 नवंबर 2026: तबादला के विरोध में तीसरी बेर प्रदर्शन
दिल्ली पुलिसकर्मियन के तीसरा बड़ प्रदर्शन सोमवार, 2 नवंबर 2026 के शुरू भइल। एह बेर विवाद के शुरुआत शाहदरा थाना में वकीलन आ पुलिसकर्मियन के बीच भइल झड़प के बाद भइल कार्रवाई से जुड़ल रहे।
घटना के बाद एसीपी मनस्वी वशिष्ठ आ थाना प्रभारी अरुण कुमार के गैर-सक्रिय इकाइयन में तबादला कर दिहल गइल। पुलिसकर्मियन के आरोप रहे कि वकीलन के दबाव में अधिकारी लोग के खिलाफ ई कार्रवाई कइल गइल बा।
एह फैसला से नाराज बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी, जवना में महिला पुलिसकर्मी भी शामिल रहली, सोमवार के नया पुलिस मुख्यालय के बाहर जुट गइलें। जवान अपना अधिकारी लोग के तबादला के फैसला के विरोध कइलें आ विभाग के भीतर आपन नाराजगी जाहिर कइलें।
स्थिति गंभीर होत देख पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार समेत सभ विशेष आयुक्त आपात बैठक बोलवलें। आदर्श ऑडिटोरियम में वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारी जवानन के शिकायत सुनलें। बातचीत के पहिला दौर में कवनो समाधान ना निकलल। एकरा बाद भी वरिष्ठ अधिकारी लगातार जवानन से बातचीत करके मामला सुलझावे के कोशिश करत रहलें।
आखिरकार रात करीब आठ बजे पुलिसकर्मी आपन आंदोलन वापस ले लिहलें। एह तरह ई प्रदर्शन करीब 11 घंटा तक चलल।
2019 में तीस हजारी कोर्ट विवाद के बाद 11 घंटा धरना
दिल्ली पुलिसकर्मियन के दूसरा बड़ प्रदर्शन 5 नवंबर 2019 के भइल रहे। एह आंदोलन के वजह तीस हजारी अदालत परिसर में वकीलन आ पुलिसकर्मियन के बीच भइल हिंसक झड़प रहे।
अदालत परिसर में भइल विवाद के बाद पुलिसकर्मियन के आरोप रहे कि वकील लोग उनकरा साथ मारपीट कइले बा। एह घटना के विरोध में हजारन पुलिसकर्मी आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस के पुरान मुख्यालय के बाहर जुट गइल रहलें।
पुलिसकर्मी करीब 11 घंटा तक धरना पर बइठल रहलें। एह दौरान जवानन के नाराजगी आ विभाग के भीतर के असंतोष खुलकर सामने आइल। काफी देर तक चले बातचीत आ वरिष्ठ अधिकारियों के आश्वासन के बाद प्रदर्शन समाप्त भइल।
अधिकारियन जवानन के भरोसा दिहलें कि दिल्ली पुलिस हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करी।
हाईकोर्ट में दाखिल पुनर्विचार याचिका भी हो गइल रहे खारिज
2019 के आंदोलन समाप्त करावे खातिर वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से दिहल गइल आश्वासन के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय आ दिल्ली पुलिस दिल्ली हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कइलें।
ई याचिका 3 नवंबर 2019 के पारित हाईकोर्ट के आदेश के स्पष्टीकरण आ संशोधन के मांग खातिर दाखिल कइल गइल रहे। अदालत के पिछला आदेश में वकीलन के खिलाफ कवनो तरह के दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगावल गइल रहे।
हालांकि, 6 नवंबर 2019 के दिल्ली हाईकोर्ट दिल्ली पुलिस आ केंद्रीय गृह मंत्रालय के पुनर्विचार याचिका खारिज कर दिहलस। अदालत के कहनाम रहे कि ओकर पिछला आदेश पूरी तरह स्पष्ट बा आ ओहमें कवनो बदलाव के जरूरत नइखे।
तीन आंदोलन, लेकिन हर बेर अलग रहल वजह
दिल्ली पुलिस के तीन बड़ आंदोलन के इतिहास देखल जाए त तीनों बेर जवानन के सड़क पर उतरे के परिस्थिति अलग-अलग रहल बा।
1966 में जवान बेहतर वेतन, भत्ता, कामकाजी परिस्थिति आ ड्यूटी के समय खातिर आंदोलन कइले रहलें। 2019 में तीस हजारी कोर्ट विवाद के बाद पुलिसकर्मी वकीलन के साथ भइल झड़प आ कथित मारपीट के विरोध में प्रदर्शन कइले रहलें। अब नवंबर 2026 में शाहदरा थाना के घटना के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादला के विरोध में जवान सड़क पर उतर गइलें।
ई घटनाएं बतावेली कि पुलिस विभाग के भीतर जवानन के सम्मान, कामकाजी माहौल आ प्रशासनिक फैसला के लेके उठे वाला सवाल समय-समय पर बड़ विरोध के रूप लेत रहल बा।






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