नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके सुप्रीम कोर्ट आ चुनाव आयोग के भूमिका पर सवाल उठवले बाड़ें। ऊ मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा के मांग करत कहले बाड़ें कि जबले ऊ अपना पद से इस्तीफा ना देस, तबले देश भर में विरोध प्रदर्शन जारी रहे के चाहीं। दीपके विपक्षी INDIA गठबंधन के दिल्ली मार्च के समर्थन करत एह आंदोलन के जरूरी बतवले बाड़ें।
दीपके के ई बयान अइसन समय में आइल बा, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR आ चुनाव आयोग के कामकाज के लेके विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहल बाड़ें। 12 अक्टूबर के कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत INDIA गठबंधन के कई नेता दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के ओर विरोध मार्च निकालले रहलें। विपक्ष के मांग बा कि मतदाता सूची से नाम हटावे के प्रक्रिया के जांच होखे आ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दीं।
केरल कांग्रेस के पोस्ट पर का कहले दीपके?
भारत के मुख्य न्यायाधीश यानी CJI सूर्यकांत के लेके केरल कांग्रेस के सोशल मीडिया पोस्ट पर विवाद खड़ा हो गइल बा। केरल कांग्रेस अपना सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर पोस्ट करत कहले रहे कि अगर कानून-व्यवस्था बनवले राखल मुख्य न्यायाधीश के अधिकार क्षेत्र में नइखे, त उनुका इस्तीफा दे देवे के चाहीं। पोस्ट में ईहो कहल गइल रहे कि उनुका जगह पर दोसर आदमी खोज लिहल जाई।
विवाद बढ़ला के बाद पोस्ट हटा लिहल गइल। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कहनाम रहे कि ई पोस्ट ओकर नेतृत्व के जानकारी आ सहमति के बिना कइल गइल रहे। एह पोस्ट खातिर जिम्मेदार व्यक्ति के पद से हटा दिहल गइल।
जब एह मामला पर अभिजीत दीपके से प्रतिक्रिया पूछल गइल, त ऊ फिलहाल कुछ कहे से इनकार कर दिहलें। उनकर कहनाम रहे कि मुख्य न्यायाधीश आ सुप्रीम कोर्ट हाल में कह चुकल बाड़ें कि कानून-व्यवस्था बनवले रखे के जिम्मेदारी अदालत के नइखे।
‘चुनाव आयोग के खिलाफ का कार्रवाई भइल?’
अभिजीत दीपके चुनाव आयोग आ मतदाता सूची से नाम हटावे के मुद्दा पर सुप्रीम कोर्ट के भूमिका पर सवाल उठवले। ऊ पूछलें कि चुनाव आयोग के खिलाफ अबले का कार्रवाई भइल बा।
दीपके पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटावे के बाद पैदा भइल स्थिति के जिक्र करत अदालत के रुख पर सवाल उठवलें। उनकर कहनाम रहे कि अगर कवनो मतदाता अभी वोट ना दे पावत बा, त का ओकरा अगिला बेर वोट देवे के कहल जा सकेला?
एह संदर्भ में ऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उदाहरण देत सवाल उठवलें कि का सुप्रीम कोर्ट मोदी से भी कह सकेला कि एह बेर चुनाव मत लड़ीं, अगिला बेर लड़ लिहब। दीपके के तर्क रहे कि अगर अइसन बात प्रधानमंत्री से नइखे कहल जा सकत, त मतदाता लोग के वोट देवे के अधिकार के मामला में अइसन रुख काहे अपनावल जा रहल बा?
INDIA गठबंधन के मार्च के बतवलें जरूरी
CJP संस्थापक 12 अक्टूबर के दिल्ली में INDIA गठबंधन के ओर से निकालल गइल विरोध मार्च के समर्थन कइलें। ऊ एह प्रदर्शन के महत्वपूर्ण बतावत कहले कि देश के लोग के एकजुट होके अइसन आंदोलन में हिस्सा लेवे के चाहीं।
दीपके के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन के जिम्मेदारी बा कि ऊ लोकतंत्र आ चुनावी प्रक्रिया से जुड़ल मुद्दा पर आवाज उठावे। ऊ चाहत बाड़ें कि देश के अलग-अलग हिस्सा में विरोध प्रदर्शन जारी रहे आ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा होखे तक आंदोलन ना रुके।
SIR के मुद्दा पर विपक्ष के विरोध जारी
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) आ चुनाव आयोग के कामकाज के लेके विपक्ष के नाराजगी लगातार सामने आ रहल बा। 12 अक्टूबर के मार्च में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे आ अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई नेता शामिल रहलें। प्रदर्शनकारी मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के जांच आ ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा के मांग करत रहलें।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस मार्च के सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचे से पहिले रोक दिहलस। एकरा बाद चुनाव आयोग से जुड़ल मुद्दा पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करे के प्रक्रिया आगे बढ़ावल गइल।
विपक्ष के आरोप बा कि मतदाता सूची से नाम हटावे के प्रक्रिया के चलते पात्र मतदाता अपना मतदान के अधिकार से वंचित हो सकेलें। एह मुद्दा पर राजनीतिक विवाद जारी बा। अभिजीत दीपके के बयान से चुनाव आयोग के जवाबदेही, मतदाता के अधिकार आ सुप्रीम कोर्ट के भूमिका पर बहस फेर तेज हो गइल बा।







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