गोरखपुर में आज से शुरू होई चौथा रंग महोत्सव 2026, ‘नटसम्राट’ नाटक में दिखी कलाकार के जीवन के मार्मिक कहानी

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Oct 31, 2026

गोरखपुर के सांस्कृतिक आ माहौल में रंगमंच के एगो नया उत्सव के शुरुआत होखे जा रहल बा। 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक शहर में चौथा गोरखपुर रंग महोत्सव 2026 के आयोजन होई। एह

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गोरखपुर के सांस्कृतिक आ माहौल में रंगमंच के एगो नया उत्सव के शुरुआत होखे जा रहल बा। 31 अक्टूबर से 4 नवंबर 2026 तक शहर में चौथा गोरखपुर रंग महोत्सव 2026 के आयोजन होई। एह पांच दिवसीय राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव के आयोजन अभियान थिएटर ग्रुप, गोरखपुर के ओर से कइल जा रहल बा। एह आयोजन में देश के अलग-अलग रंगमंचीय परंपरा, लोककला, अभिनय आ नाट्य प्रस्तुति के देखे आ समझे के मौका मिली।

महोत्सव के पोस्टर में साहित्य, लोकसंस्कृति आ रंगमंच के विविध रूप के आकर्षक ढंग से प्रस्तुत कइल गइल बा। एह आयोजन के माध्यम से गोरखपुर के सांस्कृतिक पहचान के नया विस्तार देवे आ रंगमंच से जुड़ल कलाकारन के एगो साझा मंच उपलब्ध करावे के प्रयास कइल जा रहल बा। एह महोत्सव के आयोजन में हीरो मोटर्स के सहयोग बा।

‘नटसम्राट’ नाटक बनी आकर्षण के केंद्र

रंग महोत्सव के शुरुआत 31 अक्टूबर के ‘नटसम्राट’ नाटक के प्रस्तुति से हो रहल बा। एकर प्रस्तुति मुंबई के एकरंग नाट्य संस्था करी। नाटक के परिकल्पना आ निर्देशन जयंत देशमुख कइले बाड़ें। एह नाटक के अवधि 1 घंटा 40 मिनट बा आ एकर भाषा हिंदी रखल गइल बा।

‘नटसम्राट’ मराठी के प्रसिद्ध नाटककार विष्णु वामन शिरवाडकर के कालजयी रचना ह। साहित्य जगत में ऊ ‘कुसुमाग्रज’ के नाम से प्रसिद्ध रहलें। ई नाटक भारतीय रंगमंच के महत्वपूर्ण कृति में गिनल जाला। एहमें एगो महान रंगकर्मी के जीवन के अंतिम पड़ाव के कहानी बेहद भावुक आ प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत कइल गइल बा।

कलाकार के जीवन, अकेलापन आ पारिवारिक रिश्ता के कहानी

‘नटसम्राट’ खाली एगो अभिनेता के कहानी नइखे, बलुक ई कलाकार के जीवन के संघर्ष, सम्मान, अकेलापन आ पारिवारिक संबंधन के जटिलता के गहिराई से सामने ले आवेला। मंच पर जिनगी भर दूसरका के चेहरा आ किरदार जीये वाला कलाकार जब अपना निजी जीवन में अकेलापन आ उपेक्षा के सामना करेला, त ओकर मनोदशा कइसन हो जाला, नाटक एह सवाल के बहुत संवेदनशील तरीका से उठावेला।

नाटक में आत्मसम्मान, पारिवारिक रिश्ता, पीढ़ियन के बीच बदलत सोच आ कलाकार के पहचान के संकट जइसन विषय के प्रमुखता दिहल गइल बा। एगो महान कलाकार के मंच से जीवन के अंतिम पड़ाव तक के सफर दर्शकन के भावुक करे के साथे समाज के सामने कई गो गंभीर सवाल भी खड़ा करेला।

गोरखपुर के रंगमंच के मिली नया पहचान

चौथा गोरखपुर रंग महोत्सव के आयोजन शहर के सांस्कृतिक गतिविधियन खातिर महत्वपूर्ण मानल जा रहल बा। अइसन आयोजन से स्थानीय कलाकारन, रंगकर्मियन, साहित्यकारन आ युवा पीढ़ी के रंगमंच से जुड़े के अवसर मिलेला। साथही देश के अलग-अलग हिस्सा के नाट्य परंपरा आ अभिनय शैली के समझे के मौका भी मिलेला।

गोरखपुर में रंगमंच के पुरान परंपरा रहल बा। अब जरूरत बा कि एह परंपरा के नया पीढ़ी तक पहुंचावल जाव। अभियान थिएटर ग्रुप के ई पहल एह दिशा में एगो महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकेला।

31 अक्टूबर से 4 नवंबर तक चले वाला एह महोत्सव में नाटक, अभिनय आ सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के विविध रंग देखे के उम्मीद बा। ‘नटसम्राट’ जइसन गंभीर आ संवेदनशील नाटक से शुरुआत होखल एह आयोजन के साहित्यिक आ कलात्मक महत्व के अउरी बढ़ावता।

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