लड़कियन के पढ़ाई पर तालिबान के रोक के जाकिर नाइक कइलें समर्थन, सोशल मीडिया पर उठल विरोध के आवाज

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Oct 31, 2026

अफगानिस्तान में लड़कियन के शिक्षा पर तालिबान सरकार के लगावल पाबंदी एक बेर फेर चर्चा में आ गइल बा। एह मामला में विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के बयान सामने अइला के बाद नया विवाद

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अफगानिस्तान में लड़कियन के शिक्षा पर तालिबान सरकार के लगावल पाबंदी एक बेर फेर चर्चा में आ गइल बा। एह मामला में विवादित इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक के बयान सामने अइला के बाद नया विवाद खड़ा हो गइल बा। जाकिर नाइक तालिबान के फैसला के बचाव करत कहले बाड़ें कि लड़कियन के माध्यमिक आ उच्च शिक्षा पर रोक हमेशा खातिर नइखे लगावल गइल। ई पाबंदी सुरक्षा व्यवस्था आ महिला शिक्षकन के कमी के चलते लगावल गइल बा। उनका एह बयान के बाद सोशल मीडिया पर जमकर आलोचना हो रहल बा।

जाकिर नाइक एगो वीडियो में दावा कइले कि ऊ तालिबान के प्रतिनिधियन से लड़कियन के शिक्षा के मुद्दा पर खुद बातचीत कइले बाड़ें। उनका मुताबिक, मीडिया में आवे वाला हर खबर सही ना होला। तालिबान लड़कियन के छठवीं कक्षा तक पढ़ाई करे के इजाजत देत बा। हालांकि, छठवीं के बाद के पढ़ाई खातिर सुरक्षित माहौल आ महिला शिक्षकन के उपलब्धता जरूरी बतावल जा रहल बा।

नाइक के कहना बा कि जबले लड़कियन खातिर सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण आ पर्याप्त महिला शिक्षक उपलब्ध नइखन, तबले आगे के पढ़ाई टालल जा सकेला। ऊ ईहो दावा कइले कि अफगानिस्तान में महिलाएं इस्लामी विषय के पढ़ाई कर रहल बाड़ी स आ शरिया, अरबी आ कुरान में मास्टर डिग्री से लेके पीएचडी तक हासिल कर सकेली।

जाकिर नाइक के बयान पर मलाला के पिता जतवलें चिंता

जाकिर नाइक के एह बयान पर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई के पिता जियाउद्दीन यूसुफजई कड़ी प्रतिक्रिया दिहलें। ऊ नाइक के तर्क के बेहद निराशाजनक आ चिंताजनक बतवलें। उनका मानना बा कि लड़कियन के शिक्षा से वंचित करे के फैसला के सुरक्षा आ महिला शिक्षकन के कमी के नाम पर सही नइखे ठहरावल जा सकत।

अफगानिस्तान से जुड़ल कई अउरी लोग भी नाइक के बयान पर सवाल उठवले बा। बेल्जियम में रहत अफगानिस्तान के पूर्व सुरक्षा बल सदस्य अजीम शिनवारी पूछले कि अगर लड़कियन के पढ़े के मौका ना मिली त भविष्य में महिला शिक्षक कहां से आईहें? ऊ जाकिर नाइक से अपना दावा के समर्थन में सबूत पेश करे के मांग कइले।

वहीं, अफगानिस्तान के निर्वासित संसद के सदस्य मरियम सोलैमंखिल भी नाइक के तर्क पर तंज कसली। उनका कहनाम बा कि तालिबान पहिले महिला शिक्षकन के काम करे से रोकले बा आ अब ओही महिला शिक्षकन के उपलब्ध होखे के इंतजार कइल जा रहल बा।

26 लाख से अधिक लड़कियन के पढ़ाई बंद

यूनिसेफ के अगस्त में जारी रिपोर्ट के मुताबिक, अफगानिस्तान में 26 लाख से अधिक लड़कियन माध्यमिक शिक्षा से वंचित बाड़ी। 15 अगस्त 2021 के तालिबान के सत्ता में वापसी के बाद सितंबर 2021 से लड़कियन के छठवीं कक्षा से आगे के पढ़ाई पर रोक लगा दिहल गइल।

एकरा बाद दिसंबर 2022 में महिला लोग के विश्वविद्यालय में पढ़ाई करे पर भी पाबंदी लगा दिहल गइल। दिसंबर 2024 में महिला लोग खातिर नर्सिंग आ मिडवाइफरी समेत मेडिकल ट्रेनिंग संस्थानन में पढ़ाई के रास्ता भी बंद कर दिहल गइल।

एह पाबंदियन के चलते अफगानिस्तान में लाखों लड़कियन के भविष्य पर सवाल खड़ा हो गइल बा। फिलहाल अफगानिस्तान दुनिया के एकमात्र अइसन देश बतावल जा रहल बा, जहां लड़कियन आ महिला लोग खातिर माध्यमिक आ उच्च शिक्षा के रास्ता बंद बा।

शिक्षा के अधिकार के सवाल पर जाकिर नाइक के बयान आ तालिबान के नीति दुनियाभर में बहस के विषय बनल बा। सबसे बड़ सवाल ई बा कि आखिर सुरक्षा आ व्यवस्था के नाम पर आधा आबादी के शिक्षा से कब तक दूर रखल जाई?

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