विनोद मेहरा: बाल कलाकार से बॉलीवुड के चमकता सितारा तक के सफर, 45 साल के उमिर में दुनिया के कहले अलविदा

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Oct 30, 2026

हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार अइसन होलें, जे भले कम उमिर में दुनिया छोड़ जालें, बाकिर आपन अभिनय के छाप दर्शकन के दिल में हमेशा खातिर छोड़ जालें। अइसने कलाकारन में एगो नाम रहे अभिनेता

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हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार अइसन होलें, जे भले कम उमिर में दुनिया छोड़ जालें, बाकिर आपन अभिनय के छाप दर्शकन के दिल में हमेशा खातिर छोड़ जालें। अइसने कलाकारन में एगो नाम रहे अभिनेता विनोद मेहरा के। रोमांटिक अंदाज, सादगी भरल चेहरा आ शानदार अभिनय से ऊ 70 आ 80 के दशक में दर्शकन के बीच खूब लोकप्रिय रहलें। बाल कलाकार के रूप में फिल्मी दुनिया में कदम रखे वाला विनोद मेहरा अपना छोट करियर में 100 से अधिक फिल्मन में काम कइलें।

13 फरवरी 1945 के अमृतसर में भइल रहे जन्म

विनोद मेहरा के जन्म 13 फरवरी 1945 के पंजाब के अमृतसर में भइल रहे। बचपन से ही उनकर झुकाव अभिनय आ सिनेमा के ओर रहे। परिवार के मुंबई आ गइला के बाद उनका फिल्मन में काम करे के मौका मिलल।

महज 10 साल के उमिर में 1955 में फिल्म ‘अदल-ए-जहांगीर’ से बाल कलाकार के रूप में उनकर फिल्मी सफर शुरू भइल। बाद में ऊ ‘रागिनी’ (1958) आ ‘बेवकूफ’ (1960) जइसन फिल्मन में भी नजर अइलें। फिल्म ‘रागिनी’ में ऊ मशहूर गायक आ अभिनेता किशोर कुमार के बचपन के किरदार निभवले रहलें।

‘एक थी रीटा’ से बतौर हीरो कइलें शुरुआत

बाल कलाकार के रूप में पहचान बनावे के बाद विनोद मेहरा साल 1971 में फिल्म ‘एक थी रीटा’ से बतौर वयस्क अभिनेता आपन फिल्मी सफर शुरू कइलें। एह फिल्म में उनका साथ अभिनेत्री तनुजा नजर अइली।

एकरा बाद उनका अभिनय के लगातार सराहना मिले लागल। साल 1972 में फिल्म ‘अनुराग’ में मौसमी चटर्जी के साथ उनकर जोड़ी दर्शकन के खूब पसंद आइल। एह फिल्म से उनकर लोकप्रियता अउरी बढ़ गइल।

100 से अधिक फिल्मन में कइलें अभिनय

विनोद मेहरा अपना फिल्मी करियर में रोमांस, पारिवारिक ड्रामा, एक्शन आ सामाजिक विषय पर आधारित कई तरह के किरदार निभवलें।

उनकर कुछ प्रमुख फिल्में एह तरह बा:

  • लाल पत्थर (1972)
  • अनुराग (1972)
  • नागिन (1976)
  • सबसे बड़ा रुपैया (1976)
  • अनुरोध (1977)
  • घर (1978)
  • स्वर्ग नरक (1978)
  • दादा (1979)
  • कर्तव्य (1979)
  • जानी दुश्मन (1979)
  • अमर दीप (1979)
  • जुर्माना (1979)
  • बेमिसाल (1982)
  • खुद्दार (1982)

फिल्म ‘अनुरोध’, ‘अमर दीप’ आ ‘बेमिसाल’ में उनकर अभिनय खातिर फिल्मफेयर के सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता श्रेणी में नामांकन भी मिलल रहे। ऊ खाली अभिनेता ना रहलें, बल्कि निर्माता आ निर्देशक के रूप में भी काम कइलें।

30 अक्टूबर 1990 के दुनिया के कहले अलविदा

विनोद मेहरा के जिंदगी बहुत लंबा ना रहल। 30 अक्टूबर 1990 के मुंबई में दिल के दौरा पड़ला के चलते महज 45 साल के उमिर में उनकर निधन हो गइल। उनकर अचानक मौत से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री आ प्रशंसक लोग के गहरा झटका लागल।

उनकर निधन के बादो उनकर कई फिल्म रिलीज भइल। एहमें ‘पत्थर के फूल’ (1991), ‘गुरुदेव’ (1993) आ ‘इंसानियत’ (1994) शामिल बाड़ी। फिल्म ‘गुरुदेव’ के निर्देशन आ निर्माण से भी ऊ जुड़ल रहलें।

आजो याद कइल जालें विनोद मेहरा

विनोद मेहरा भले आज हमनी के बीच नइखन, बाकिर उनकर फिल्म आ अभिनय आजो सिनेमा प्रेमियन के दिल में जिंदा बा। ऊ साबित कइलें कि प्रतिभा के पहचान खातिर लंबा जिंदगी जरूरी नइखे। अपना सादगी, शानदार अभिनय आ यादगार किरदार के बदौलत ऊ हिंदी सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखल जइहें।

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