Lucknow : यूपी में डॉक्टरन के बड़ी राहत, इलाज में लापरवाही के आरोप पर तुरंत ना होई गिरफ्तारी; पहिले मेडिकल बोर्ड करी जांच

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Oct 17, 2026

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इलाज में लापरवाही के आरोप झेले वाला डॉक्टरन खातिर राहत के खबर सामने आइल बा। अब चिकित्सकीय लापरवाही के शिकायत मिलला भर से पुलिस आरोपी डॉक्टर के सीधे गिरफ्तार ना कर

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इलाज में लापरवाही के आरोप झेले वाला डॉक्टरन खातिर राहत के खबर सामने आइल बा। अब चिकित्सकीय लापरवाही के शिकायत मिलला भर से पुलिस आरोपी डॉक्टर के सीधे गिरफ्तार ना कर सकी। अइसन मामिला में पहिले जिला आ प्रदेश स्तर पर गठित मेडिकल बोर्ड जांच करी। बोर्ड के जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे के कार्रवाई तय होई। एह व्यवस्था से डॉक्टरन के खिलाफ दर्ज होखे वाला चिकित्सकीय लापरवाही के मामिला के जांच प्रक्रिया में बदलाव होखे जा रहल बा।

राज्य सरकार चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़ल शिकायतन के निष्पक्ष आ व्यवस्थित तरीका से निपटावे खातिर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी कइले बिया। शासन के ओर से जारी निर्देश के प्रदेश के सभ जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) आ मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के भेज दिहल गइल बा। एह निर्देश के मकसद बा कि इलाज में लापरवाही के आरोप के जांच विशेषज्ञ चिकित्सकन के राय आ तथ्य के आधार पर होखे, ताकि बिना जरूरी जांच के डॉक्टरन के खिलाफ कार्रवाई ना होखे।

शिकायत मिलला पर पहिले होई मेडिकल बोर्ड के जांच

शासन के ओर से जारी आदेश के मुताबिक, चिकित्सकीय लापरवाही से जुड़ल मामिला के जांच खातिर जिला स्तर पर मेडिकल बोर्ड बनावल जाई। शिकायत मिलला के बाद जिला मजिस्ट्रेट ओकरा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के लगे भेजिहें। एकरा बाद संबंधित मेडिकल बोर्ड शिकायत के जांच करी आ तीन दिन के भीतर आपन रिपोर्ट देवे के व्यवस्था कइल गइल बा।

जांच के दौरान मामिला से जुड़ल चिकित्सकीय पहलुअन, इलाज के प्रक्रिया आ उपलब्ध तथ्य के समीक्षा कइल जाई। बोर्ड के रिपोर्ट के आधार पर आगे के कार्रवाई के दिशा तय होई। एह व्यवस्था से चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप के जांच में विशेषज्ञन के राय के महत्व बढ़ी।

प्रदेश स्तर पर भी गठित होई मेडिकल बोर्ड

जिला स्तर पर होखे वाला जांच के अलावा अइसन मामिला के प्रदेश स्तर पर सुनवाई आ समीक्षा खातिर राज्य मेडिकल बोर्ड के गठन कइल जाई। एह बोर्ड के अध्यक्ष चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक होइहें।

राज्य मेडिकल बोर्ड में अलग-अलग चिकित्सा संस्थान आ विभागन के विशेषज्ञ लोग शामिल होइहें। एहमें चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीएमई) के ओर से नामित फॉरेंसिक मेडिसिन के प्रोफेसर, किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई), डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान आ अन्य मेडिकल कॉलेज से दू गो प्रोफेसर शामिल होइहें।

एकरा अलावा नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के एगो प्रतिनिधि आ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के ओर से नामित विधि अधिकारी के सदस्य बनावल जाई। स्वास्थ्य महानिदेशक के ओर से संयुक्त निदेशक स्तर के अधिकारी बोर्ड के सदस्य सचिव के जिम्मेदारी निभइहें।

एह तरह से राज्य स्तर पर मेडिकल आ कानूनी विशेषज्ञन के भागीदारी से शिकायतन के समीक्षा करे के व्यवस्था बनावल गइल बा।

बदली जांच के प्रक्रिया, डॉक्टरन के मिली राहत

नई एसओपी लागू होखे से चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप से जुड़ल मामिला में जांच के प्रक्रिया बदले के उम्मीद बा। अब शिकायत के गंभीरता आ तथ्य के विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड के माध्यम से परखे के व्यवस्था होई। एहसे डॉक्टरन के खिलाफ कार्रवाई में चिकित्सकीय पहलुअन के सही आकलन कइल जा सकेला।

हालांकि, एह व्यवस्था के मतलब ई ना बा कि चिकित्सकीय लापरवाही साबित भइला पर डॉक्टरन के खिलाफ कार्रवाई ना होई। जांच में सामने आवे वाला तथ्य आ लागू कानूनी प्रावधान के आधार पर आगे के कदम उठावल जा सकेला।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद जारी भइल एसओपी

चिकित्सकीय लापरवाही के मामिला में एसओपी जारी करे के निर्देश हाईकोर्ट के ओर से दिहल गइल रहे। एह मुद्दा पर राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ा भी चर्चा में बा।

पांच मई 2026 के जारी एनसीआरबी रिपोर्ट के हवाला से बतावल गइल बा कि देश में चिकित्सकीय लापरवाही के चलते वर्ष 2022 में 118 मामला दर्ज भइल रहे। साल 2024 में ई संख्या बढ़ के 869 हो गइल। एह आंकड़ा के मुताबिक उत्तर प्रदेश एह मामिला में देश में पहिला स्थान पर रहल, जहां 458 मामला दर्ज भइल, जवन कुल संख्या के करीब 52.70 प्रतिशत बा।

एह आंकड़न के बीच राज्य सरकार के नया कदम के डॉक्टरन खातिर राहत के रूप में देखल जा रहल बा। अब चिकित्सकीय लापरवाही के शिकायत के निस्तारण में जिला आ प्रदेश स्तर के मेडिकल बोर्ड के भूमिका महत्वपूर्ण होई। एह व्यवस्था से एक ओर डॉक्टरन के खिलाफ कार्रवाई से पहिले विशेषज्ञ जांच के रास्ता खुली, त दोसरा ओर शिकायतन के तथ्य के आधार पर निष्पक्ष तरीका से निपटावे में मदद मिल सकेला।

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