America : अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में ट्रंप को झटका, हार स्वीकार करे के तइयार; डेमोक्रेट्स के साथ काम करे के जतवले इच्छा

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: 11 घंटे पहले

अमेरिका के राजनीति में मध्यावधि चुनाव के नतीजा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खातिर एगो बड़ राजनीतिक चुनौती बन के सामने आ रहल बा। चुनावी नतीजा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आपन पहिलका प्रतिक्रिया देत कहलन

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अमेरिका के राजनीति में मध्यावधि चुनाव के नतीजा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खातिर एगो बड़ राजनीतिक चुनौती बन के सामने आ रहल बा। चुनावी नतीजा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आपन पहिलका प्रतिक्रिया देत कहलन कि ऊ चुनाव के परिणाम स्वीकार करे खातिर तइयार बाड़न। एही के साथ ऊ डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता लोग के संगे मिलके काम करे के इच्छा भी जतवले बाड़न। हालांकि, ट्रंप ई दावा कइलन कि अगर ऊ खुद चुनाव मैदान में उम्मीदवार रहितन त उनकर पार्टी भारी अंतर से जीत हासिल कइले रहित।

ट्रंप के एह बयान के बाद अमेरिकी राजनीति में नया चर्चा शुरू हो गइल बा। खास बात ई बा कि मध्यावधि चुनाव के परिणाम से राष्ट्रपति के राजनीतिक ताकत आ संसद में उनकर पार्टी के स्थिति पर सीधा असर पड़ेला।

ट्रंप कहलें- अगर हम उम्मीदवार रहितीं त बड़ अंतर से जीतत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एगो पोस्ट साझा कइलें। एह पोस्ट में ऊ कहलें कि ऊ खुद चुनाव में उम्मीदवार ना रहलें। अगर ऊ चुनाव लड़त रहितें त उनकर पार्टी बहुत बड़ अंतर से जीत हासिल करत।

ट्रंप के कहना रहे कि उनकर लोकप्रियता आ राजनीतिक समर्थन के चलते चुनाव के परिणाम कुछ अउर हो सकत रहे। हालांकि, चुनावी नतीजा के बीच ऊ अपना पार्टी के प्रदर्शन पर खुलकर प्रतिक्रिया देत डेमोक्रेट्स के संगे मिलके काम करे के संकेत भी दिहलें।

चुनाव के नतीजा स्वीकार करे के तइयार बाड़न ट्रंप

मंगलवार के रात द न्यूयॉर्क टाइम्स के दिहल इंटरव्यू में ट्रंप से जब मध्यावधि चुनाव के नतीजा स्वीकार करे के बारे में सवाल पूछल गइल त ऊ साफ-साफ कहलें कि ऊ परिणाम स्वीकार करे खातिर पूरा तरीका से तइयार बाड़न।

ट्रंप कहलें, “हम एह नतीजा के स्वीकार करे खातिर पूरी तरह तइयार बानी।”

एह बयान के राजनीतिक रूप से काफी अहम मानल जा रहल बा। अमेरिका में चुनाव के परिणाम के बाद सत्ता पक्ष आ विपक्ष के बीच सहयोग के जरूरत पड़ेला। खासकर तब, जब संसद के कवनो सदन में विपक्ष के बहुमत होखे।

डेमोक्रेट्स के संगे मिलके काम करे के जतवले इच्छा

ट्रंप इंटरव्यू में कहलें कि ऊ डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता लोग के संगे काम करे के उम्मीद रखत बाड़न। उनका मुताबिक, दुनो राजनीतिक दल मिलके कवनो रास्ता निकाल सकेलें।

उनकर कहना रहे कि सरकार डेमोक्रेट्स के संगे मिलके काम करी आ अलग-अलग मुद्दा पर सहमति बनावे के कोशिश होई।

हालांकि, अमेरिकी राजनीति में रिपब्लिकन आ डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच कई मुद्दा पर मतभेद रहल बा। इमिग्रेशन, टैक्स, सरकारी खर्च, विदेश नीति आ राष्ट्रीय सुरक्षा जइसन मुद्दा पर दुनो दल के सोच अलग-अलग रहल बा। एह स्थिति में ट्रंप सरकार खातिर विपक्ष के समर्थन हासिल कइल आसान ना होई।

का होला अमेरिका में मध्यावधि चुनाव?

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल पर होला, जबकि मध्यावधि चुनाव राष्ट्रपति के कार्यकाल के बीच यानी दू साल बाद करावल जाला। एह चुनाव में प्रतिनिधि सभा के 435 सीट आ सीनेट के करीब एक तिहाई सीट पर मतदान होला।

अमेरिकी संसद के दुनो सदन में बहुमत के स्थिति तय करे में एह चुनाव के बहुत महत्व होला। अगर राष्ट्रपति के पार्टी दुनो सदन में बहुमत बनवले रखेले त सरकार खातिर नया कानून पास करावल आसान हो जाला। बाकिर विपक्ष के बहुमत मिलला पर राष्ट्रपति के फैसला पर सवाल उठे लागेला।

प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स के बढ़त से बढ़ी मुश्किल

अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेले त ट्रंप प्रशासन के सामने कई तरह के चुनौती खड़ा हो सकेला।

प्रतिनिधि सभा के अलग-अलग संसदीय समिति के नियंत्रण विपक्ष के हाथ में चल जाई। एह समितियन के माध्यम से सरकार के नीति, फैसला आ कामकाज के जांच कइल जा सकेला।

डेमोक्रेटिक सांसद सरकारी अधिकारी के पूछताछ खातिर बुला सकेलें। सरकारी दस्तावेज मंगा सकेलें आ जरूरत पड़ला पर समन भी जारी कर सकेलें। एहसे ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक आ संसदीय दबाव बढ़े के संभावना रही।

सीनेट में बहुमत गंवला पर का होई नुकसान?

सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के बहुमत कमजोर भइला भा खत्म भइला पर ट्रंप सरकार के कई महत्वपूर्ण फैसला प्रभावित हो सकेला।

1. सरकारी नीतियन के जांच बढ़ी

डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद ट्रंप प्रशासन के इमिग्रेशन नीति, निर्वासन अभियान, सरकारी खर्च आ वित्तीय अनियमितता के आरोप के जांच करा सकेलें। एहसे सरकार के कई फैसला पर सार्वजनिक सुनवाई हो सकेला।

2. नया कानून पास करावल मुश्किल

टैक्स, व्यापार, इमिग्रेशन आ सरकारी खर्च से जुड़ल प्रस्ताव के संसद से पास करावल ट्रंप खातिर कठिन हो सकेला। विपक्ष के समर्थन के बिना कई विधायी प्रस्ताव अटक सकेलें।

3. महाभियोग के खतरा

अगर डेमोक्रेट्स के प्रतिनिधि सभा में बहुमत मिल जाला त ऊ राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग के प्रक्रिया शुरू कर सकेलें। हालांकि, राष्ट्रपति के दोषी ठहरावे आ पद से हटावे खातिर सीनेट में मौजूद सदस्यन के दू तिहाई समर्थन जरूरी होला। एहसे महाभियोग के प्रक्रिया शुरू होखल आ राष्ट्रपति के पद से हटावल दुनो अलग-अलग बात बा।

4. जज आ बड़का अधिकारी के नियुक्ति में रुकावट

अमेरिका के संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट के जज, संघीय अदालत के न्यायाधीश, राजदूत आ कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के नामांकन करेलें। बाकिर एह नियुक्तियन खातिर सीनेट के मंजूरी जरूरी होला।

अगर सीनेट में डेमोक्रेट्स के बहुमत हो जाला त ऊ ट्रंप के ओर से प्रस्तावित नियुक्तियन पर रोक लगा सकेलें भा मंजूरी देवे में देरी कर सकेलें।

5. सरकारी बजट पर बढ़ी टकराव

सरकारी बजट आ अलग-अलग योजना खातिर फंडिंग के मंजूरी संसद के भूमिका पर निर्भर करेला। अगर विपक्ष मजबूत हो जाला त ट्रंप प्रशासन के कई खर्चा आ नीतिगत योजना पर समझौता करे के पड़ सकेला। विदेश नीति, ईरान से जुड़ल सैन्य खर्च आ निर्वासन अभियान खातिर फंडिंग के मुद्दा पर भी टकराव हो सकेला।

आगे ट्रंप सरकार खातिर कइसन रही राह?

मध्यावधि चुनाव के परिणाम अमेरिका के राजनीतिक दिशा तय करे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अगर डेमोक्रेट्स संसद के कवनो सदन में बहुमत हासिल कर लेत बाड़ें त ट्रंप सरकार के हर बड़ फैसला पर विपक्ष के सामना करे के पड़ सकेला।

एह स्थिति में ट्रंप खातिर डेमोक्रेटिक पार्टी के संगे बातचीत आ सहमति बनावल जरूरी हो जाई। अब देखे वाला बात ई बा कि चुनावी नतीजा के बाद अमेरिका के संसद में कवन पार्टी के पकड़ मजबूत होला आ राष्ट्रपति ट्रंप अपना राजनीतिक एजेंडा के केतना आगे बढ़ा पावेलें।

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