हिंदी सिनेमा में जबो खूबसूरती, शानदार अभिनय आ दमदार महिला किरदारन के चर्चा होई, त अभिनेत्री रेखा के नाम जरूर लिहल जाई। रेखा के असली नाम भानुरेखा गणेशन ह। ऊ भारतीय सिनेमा के मशहूर अभिनेत्रियन में गिनल जालीं। अपना लंबा फिल्मी सफर में ऊ 180 से अधिक फिलिमन में काम कइले बाड़ी आ अलग-अलग तरह के किरदार निभाके दर्शकन के दिल में आपन खास जगह बनवले बाड़ी। हिंदी सिनेमा में उनकर योगदान खातिर ओह लोग के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, फिल्मफेयर पुरस्कार आ पद्मश्री जइसन सम्मान मिल चुकल बा।
रेखा के खासियत ई रहल कि ऊ खाली ग्लैमर तक सीमित ना रहली। ऊ गंभीर, भावनात्मक, मजबूत आ जटिल महिला किरदारन के भी पर्दा पर प्रभावशाली ढंग से पेश कइली। उनकर अभिनय यात्रा संघर्ष, मेहनत आ खुद के लगातार निखारे के कहानी ह।
तमिल आ तेलुगु फिल्मी परिवार में भइल जन्म
रेखा के जन्म 10 अक्टूबर 1954 के भइल रहे। उनकर परिवार के संबंध दक्षिण भारतीय सिनेमा से रहल। उनकर पिता जेमिनी गणेशन तमिल सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता रहले, जबकि महतारी पुष्पावल्ली तेलुगु फिलिमन में अभिनय करत रहली।
बचपने से रेखा के सिनेमा से जुड़ाव हो गइल रहे। साल 1966 में ऊ तेलुगु फिलिम ‘रंगुला रत्नम’ में बाल कलाकार के रूप में नजर अइली। एह समय उनकर नाम बेबी भानुरेखा के रूप में इस्तेमाल भइल। एह शुरुआती अनुभव से उनकर फिल्मी सफर के नींव पड़ल।
हालांकि, हिंदी सिनेमा में आपन पहचान बनावल आसान ना रहल। दक्षिण भारतीय पृष्ठभूमि से अइला के चलते हिंदी भाषा आ हिंदी फिल्म उद्योग के कामकाज के तरीका सीखे के जरूरत पड़ल। रेखा मेहनत कइली, हिंदी सीखली आ धीरे-धीरे अपना अभिनय के दम पर दर्शकन के ध्यान खींचे लगली।
‘सावन भादों’ से शुरू भइल हिंदी सिनेमा के सफर
साल 1970 में रेखा के हिंदी फिलिम ‘सावन भादों’ में काम करे के मौका मिलल। एह फिलिम में उनकर साथ नवीन निश्चल रहले। ई फिलिम उनकर हिंदी सिनेमा के करियर में महत्वपूर्ण पड़ाव साबित भइल।
शुरुआती दौर में रेखा के अभिनय के साथ-साथ उनकर व्यक्तित्व आ पर्दा पर मौजूदगी के भी चर्चा होखे लागल। धीरे-धीरे ऊ हिंदी फिल्म उद्योग में आपन जगह बनवली। लगातार काम करत ऊ अपना अभिनय में सुधार कइली आ अलग-अलग तरह के भूमिका निभावे के मौका हासिल कइली।
हिट फिलिमन से मिलल पहचान
रेखा के फिल्मी करियर में कई अइसन फिलिम आइल जे आजो हिंदी सिनेमा के यादगार फिलिमन में गिनल जालीं। ‘नागिन’ (1976), ‘मुकद्दर का सिकंदर’ (1978) आ ‘मिस्टर नटवरलाल’ (1979) जइसन फिलिमन से उनकर लोकप्रियता बढ़ल।
साल 1980 में रिलीज भइल कॉमेडी फिलिम ‘खूबसूरत’ में रेखा के अभिनय के खूब सराहना मिलल। एह फिलिम में उनकर सहज अंदाज, हाजिरजवाबी आ जीवंत किरदार दर्शकन के पसंद आइल। एह भूमिका खातिर रेखा के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पहिला फिल्मफेयर पुरस्कार मिलल।
‘खूबसूरत’ उनकर करियर के महत्वपूर्ण फिलिम साबित भइल, काहे कि एहसे ई साबित भइल कि ऊ गंभीर आ भावुक किरदारन के साथे हास्य भूमिका में भी आपन प्रतिभा देखावे में सक्षम बाड़ी।
‘उमराव जान’ से मिलल राष्ट्रीय सम्मान
साल 1981 में रिलीज भइल फिलिम ‘उमराव जान’ रेखा के अभिनय यात्रा के एगो खास उपलब्धि ह। एह फिलिम में ऊ उमराव जान के किरदार निभवली, जेकर व्यक्तित्व में दर्द, मोहब्बत, कला आ जिंदगी के संघर्ष के कई पहलू देखे के मिलेला।
रेखा अपना हाव-भाव, संवाद अदायगी आ भावनात्मक अभिनय से एह किरदार के यादगार बना दिहली। एह फिलिम खातिर ओह लोग के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलल।
‘उमराव जान’ आजो रेखा के सबसे चर्चित फिलिमन में शामिल बा। एह भूमिका से उनकर पहचान एगो अइसन अभिनेत्री के रूप में मजबूत भइल जे जटिल आ संवेदनशील किरदारन के गहराई से निभा सकेली।
आर्ट सिनेमा में भी देखवली प्रतिभा
रेखा खाली व्यावसायिक फिलिमन तक सीमित ना रहली। ऊ समानांतर सिनेमा में भी काम कइली, जहाँ कहानी, सामाजिक सवाल आ किरदारन के मनोवैज्ञानिक पहलू पर अधिक ध्यान दिहल जाला।
‘कलयुग’ (1981), ‘विजेता’ (1982) आ ‘उत्सव’ (1984) जइसन फिलिमन में उनकर काम के चर्चा भइल। एह फिलिमन से ई साफ भइल कि रेखा अलग-अलग विषय आ शैली के सिनेमा में सहजता से काम कर सकेली।
साल 1988 में रिलीज भइल ‘खून भरी मांग’ में ऊ एगो मजबूत महिला के भूमिका निभवली। एह फिलिम में उनकर किरदार बदला, आत्मसम्मान आ संघर्ष के कहानी के केंद्र में रहल। एह भूमिका खातिर रेखा के सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के दूसरा फिल्मफेयर पुरस्कार मिलल।
एह तरह के महिला-केंद्रित फिलिमन में उनकर अभिनय हिंदी सिनेमा में महिला किरदारन के बदलत स्वरूप के भी सामने ले आइल।
‘जुबैदा’, ‘लज्जा’ आ ‘कोई मिल गया’ में नया अंदाज
साल 2000 के दशक में रेखा कई अलग-अलग तरह के भूमिका में नजर अइली। ‘जुबैदा’ आ ‘लज्जा’ जइसन फिलिमन में उनकर सहायक भूमिकन के सराहना मिलल।
साल 2003 में रिलीज भइल विज्ञान-कथा फिलिम ‘कोई मिल गया’ में ऊ रोहित के महतारी सोनिया मेहरा के किरदार निभवली। एह भूमिका में उनकर ममता आ भावनात्मक अभिनय दर्शकन के प्रभावित कइलस। साल 2006 में ‘कृष’ में भी ऊ एह किरदार के आगे बढ़वली।
एह दौर में रेखा परिपक्व महिला आ महतारी के भूमिका में भी नजर अइली। बदलत समय के साथ ऊ अपना अभिनय के नया रूप देत रहली।
पद्मश्री से सम्मानित भइली रेखा
रेखा के फिल्मी योगदान खातिर भारत सरकार साल 2010 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित कइलस। ई सम्मान भारतीय कला आ सिनेमा में उनकर योगदान के मान्यता देवे वाला महत्वपूर्ण पड़ाव रहल।
साल 2012 में रेखा के राज्यसभा खातिर नामित कइल गइल। उनकर कार्यकाल 2018 में समाप्त भइल। एह तरह से सिनेमा के अलावा सार्वजनिक जीवन में भी उनकर भूमिका रहल।
रेखा के विरासत
रेखा के कहानी खाली एगो सफल अभिनेत्री के कहानी नइखे। ई मेहनत, आत्मविश्वास आ समय के साथ खुद के बदले के क्षमता के कहानी भी ह। दक्षिण भारतीय फिल्मी पृष्ठभूमि से निकलके हिंदी सिनेमा में आपन अलग पहचान बनावे तक के सफर में ऊ कई चुनौती के सामना कइली।
‘खूबसूरत’, ‘उमराव जान’, ‘खून भरी मांग’ आ ‘कोई मिल गया’ जइसन फिलिम उनकर अभिनय के अलग-अलग रंग देखावेली। उनकर खूबसूरती, साड़ी पहिने के अंदाज, नृत्य, संवाद अदायगी आ पर्दा पर मौजूदगी आजो दर्शकन के आकर्षित करेला।
भारतीय सिनेमा में रेखा के योगदान एह बात के उदाहरण बा कि एगो कलाकार के पहचान खाली ओकर लोकप्रियता से ना, बल्कि ओकर विविधता, मेहनत आ यादगार किरदारन से भी बनल रहेला।
Read More: विधान परिषद चुनाव 2026 : चार राज्यन के 28 सीट पर वोटिंग जारी, मतदान केंद्रन पर लागल मतदाता के लाइनhttps://khabarbhojpuri.com/mlc-election-2026-voting-up-bihar-maharashtra-karnataka/






No comments yet. Be the first to comment!