करवा चौथ पर सिर्फ निर्जला व्रत रखना ही काफी नहीं, इन परंपराओं का भी है खास महत्व

By Shweta Supriya

Published on: अभी-अभी

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में करवा चौथ (Karwa Chauth 2026) के परब के खास महत्व बा। सुहागिन मेहरारू लोग एह परब के आवे के बेसब्री से इंतजार करेली। हर साल ई व्रत कार्तिक महीना के

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नई दिल्ली। हिंदू धर्म में करवा चौथ (Karwa Chauth 2026) के परब के खास महत्व बा। सुहागिन मेहरारू लोग एह परब के आवे के बेसब्री से इंतजार करेली। हर साल ई व्रत कार्तिक महीना के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि के रखल जाला। एह व्रत में सूर्योदय से लेके चंद्रोदय तक बिना पानी पियले उपवास रखल जाला। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, ई व्रत रखला से अखंड सौभाग्य, पति के लंबा उमिर आ सुखी वैवाहिक जीवन के आशीर्वाद मिलेला।

शास्त्रन में एह व्रत से जुड़ल कई गो नियम बतावल गइल बा। अइसन मानल जाला कि व्रत के दौरान कुछ खास बातन के ध्यान ना रखला से व्रत भंग हो सकेला। एहसे व्रत रखे से पहिले एकर नियम के बारे में जरूर जान लीं। आईं, एह लेख में जानीं कि करवा चौथ व्रत के दौरान कवन-कवन बातन के ध्यान राखे के चाहीं।

कब बा करवा चौथ?

कार्तिक महीना के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि के शुरुआत: 29 अक्टूबर के रात 1 बजके 6 मिनट से।

कार्तिक महीना के कृष्ण पक्ष के चतुर्थी तिथि के समापन: 29 अक्टूबर के रात 10 बजके 9 मिनट पर।

वैदिक पंचांग के मुताबिक, करवा चौथ 29 अक्टूबर के मनावल जाई।

पूजा के शुभ मुहूर्त: साँझ 5 बजके 54 मिनट से साँझ 7 बजके 10 मिनट तक।

करवा चौथ के दिन चंद्रोदय: रात 8 बजके 39 मिनट पर।

1. सूर्योदय से पहिले सरगी ग्रहण करीं

एह व्रत के शुरुआत सरगी से होला। सास अपना पतोह के सरगी देली। एहमें फल, मेवा, मिठाई, सुहाग के सामान आ कपड़ा रहेला। करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहिले उठ के सरगी खा लेवे के चाहीं। एह दौरान पौष्टिक चीज खाईं, जवना से दिन भर शरीर में ऊर्जा बनल रहे।

2. निर्जला व्रत

एह व्रत के दौरान अन्न आ पानी के सेवन ना करे के चाहीं। रात में चंद्रमा के अर्घ्य देला के बादे व्रत खोलीं। सबेरे नहइला के बाद पूरा दिन निर्जला व्रत रखे के संकल्प लिहल जाला। अइसन मानल जाला कि व्रत के दौरान पानी पियला या कुछ खइला से व्रत भंग हो सकेला। अगर रउआ के स्वास्थ्य से जुड़ल कवनो समस्या बा, त व्रत रखे से पहिले डॉक्टर से सलाह जरूर लीं।

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3. सोलह श्रृंगार के खास महत्व

एह दिन सुहागिन मेहरारू लोग खातिर सोलह श्रृंगार करे के खास महत्व बा। अइसन मानल जाला कि सोलह श्रृंगार ना कइला से व्रत अधूरा रह जाला। हाथ में मेहंदी जरूर लगाईं। सिंदूर, मंगलसूत्र, बिंदी, चूड़ी आ गोड़ में महावर लगावल एह व्रत के एगो अहम हिस्सा ह।

4. करवा चौथ के कथा सुनल जरूरी

करवा चौथ के व्रत के दौरान व्रत के कथा पढ़ल या सुनल जरूरी बा। धार्मिक मान्यता के मुताबिक, कथा सुनले बिना ई व्रत अधूरा मानल जाला। पूजा के समय माटी के एगो करवा रखल जाला, जवना के बाद में सास या कवनो दोसर सुहागिन मेहरारू के दान कइल जाला।

अस्वीकरण: एह लेख में बतावल गइल उपाय, लाभ, सलाह आ कथन खाली सामान्य जानकारी खातिर बा। खबर भोजपुरी एह लेख में लिखल बातन के समर्थन नइखे करत। एह लेख में दिहल जानकारी अलग-अलग माध्यम, ज्योतिषी, पंचांग, प्रवचन, मान्यता, धर्मग्रंथ आ लोककथा से जुटावल गइल बा। पाठक लोग से अनुरोध बा कि एह लेख के अंतिम सत्य या दावा मत मानीं आ अपना विवेक के इस्तेमाल करीं। खबर भोजपुरी के खिलाफ बा।

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