Gorakhpur: डी०ए० वी० पी०जी० गोरखपुर कालेज में भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पs एकदिनी कार्यशाला आयोजित

By Anurag Ranjan

Published on: Apr 19, 2025

आजु गोरखपुर में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार, सिद्वांत नालेज फाउन्डेशन आ डी0ए0वी0पी0जी0 कालेज, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पs एक दिवसीय शिक्षक कार्यशाला के आयोजन कइल गइल। मुख्य वक्ता आ प्रथम

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डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज

आजु गोरखपुर में शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार, सिद्वांत नालेज फाउन्डेशन आ डी0ए0वी0पी0जी0 कालेज, गोरखपुर के संयुक्त तत्वावधान में भारतीय ज्ञान परम्परा विषय पs एक दिवसीय शिक्षक कार्यशाला के आयोजन कइल गइल। मुख्य वक्ता आ प्रथम सत्र के मास्टर ट्रेनर डॉ0 विकास कुमार (ए0एन0 कालेज, पटना), पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परम्परा के प्राचीनता आ वर्तमान में उनके पs आपन व्याख्यान दिहले।
उs कहले कि भारतीय ज्ञान परम्परा एगो समृद्ध आ प्राचीन ज्ञान प्रणाली हs जवन अखण्ड भारत के सतत ज्ञान पs आधारित बा। “ई परंपरा समग्र दृष्टिकोण आ मजबूत प्रमाण पर आधारित बा, एही से एह भारतीय ज्ञान परंपरा के बौद्धिक संपदा के बचावे के जरूरत बा। दूसरा पेपर के मास्टर ट्रेनर डॉ जितेंद्र कुमार नैतिकता आ ओकर शब्दकोश पर आपन व्याख्यान देत घरी जीवन के मूल्य आ प्रयास के अपना आचरण में डाले पर जोर दिहलन।


कार्यक्रम के संयोजक आ तीसरा सत्र के मास्टर ट्रेनर डॉ. संजय कुमार पाण्डेय, डी.ए.वी.पी.जी. कॉलेज, गोरखपुर के प्राध्यापक कहलें कि भारतीय ज्ञान परंपरा में वैज्ञानिक दृष्टिकोण के संगे-संगे प्राकृतिक संतुलन, आध्यात्मिक ज्ञान अवुरी आत्म-विकास पs जोर दिहल जाला। ऊ प्राचीन भारतीय ग्रंथन में छह गो रस आ बीस गो पदार्थ के गुणन के मानव स्वास्थ्य पs प्रभाव के बारें में विस्तार से बतवलें।

वृक्षार्युवेद अउरी भारतीय ग्रंथन में वर्णित पौधन के वर्गीकरण, गुण आ औषधीय महत्व पs प्रकाश डलले। अपना अध्यक्षीय संबोधन में कॉलेज के प्राचार्य प्रो. शैल पाण्डेय कहली कि भारतीय ज्ञान परम्परा के जरूरत बा काहे कि एह से हमनी के सांस्कृतिक विरासत के समझे में मदद मिली, अपना जड़ से जुड़ल आ एह ज्ञान से नवका पीढ़ी के जिनगी के जोड़ के हमनी के जिनगी के सार्थक बनावे में मदद मिली।

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