New Delhi : जामिया में 20 साल से काहे ना भइल छात्रसंघ चुनाव? एलान के बादो काहे बा विरोध

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Oct 27, 2026

दिल्ली के मशहूर जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में करीब दू दशक बाद छात्रसंघ चुनाव करावे के एलान भइल बा। बाकिर विश्वविद्यालय प्रशासन के घोषणा के बादो छात्रन के विरोध जारी बा। छात्रन के कहनाम बा

Share

दिल्ली के मशहूर जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में करीब दू दशक बाद छात्रसंघ चुनाव करावे के एलान भइल बा। बाकिर विश्वविद्यालय प्रशासन के घोषणा के बादो छात्रन के विरोध जारी बा। छात्रन के कहनाम बा कि खाली चुनाव करावे के एलान काफी नइखे। प्रशासन के चुनाव के तारीख, प्रक्रिया आ छात्रसंघ के संविधान के मंजूरी के बारे में साफ-साफ जानकारी देबे के चाहीं।

एह मामला के लेके छात्र आंदोलन तेज हो गइल बा। कुछ छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बइठल बाड़े। एह बीच विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसला आ छात्रन के मांग के लेके बहस तेज हो गइल बा। आखिर जामिया में 20 साल से चुनाव काहे ना भइल आ अब छात्र काहे नाराज बाड़े? आइए, पूरा मामला समझल जाव।

जामिया में छात्रसंघ चुनाव के एलान, बाकिर विवाद कायम

जामिया में छात्रसंघ चुनाव बहाल करे के मांग लेके 12 अक्टूबर से विरोध-प्रदर्शन शुरू भइल रहे। एह दौरान पांच छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बइठ गइलें। छात्रन के प्रमुख मांग बा कि छात्रसंघ चुनाव के निश्चित तारीख घोषित होखे आ प्रशासन एह बारे में लिखित आश्वासन देवे।

एह आंदोलन में छात्रन के संयुक्त कार्रवाई समिति (JAC) के भी भूमिका बा। छात्रन के कहना बा कि ऊ लोग सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े के कानूनी राय विश्वविद्यालय प्रशासन के सौंपले बा। एह राय के मुताबिक, उपलब्ध जानकारी के आधार पर अइसन कवनो रिकॉर्ड नइखे लउकत जवना से चुनाव करावल हाईकोर्ट के आदेश के उल्लंघन होखे।

छात्रन के दावा बा कि जब अदालत चुनाव रोके के स्पष्ट आदेश नइखे देले, त विश्वविद्यालय के स्वतंत्र आ निष्पक्ष चुनाव करावे के दिशा में कदम उठावे के चाहीं।

एह बीच विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रोफेसर महताब आलम रिजवी आदेश जारी क के कहलें कि छात्रसंघ के संविधान के मंजूरी मिले के 15 दिन बाद चुनाव करावल जाई।

बाकिर छात्र एह फैसला से संतुष्ट नइखन। उनकर सवाल बा कि जब संविधान के मंजूरी देबे के तारीख तय नइखे, त चुनाव कब होई? छात्र प्रॉक्टर आ सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफा के मांग भी उठा रहल बाड़े।

20 साल से चुनाव काहे नइखे भइल?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में आखिरी बेर 2005 में छात्रसंघ चुनाव भइल रहे। एकरा बाद 31 मार्च 2006 के विश्वविद्यालय प्रशासन निर्वाचित छात्रसंघ के भंग कर देले रहे।

प्रशासन के आरोप रहे कि छात्र प्रतिनिधि प्रशासनिक कामकाज में दखल देवे लगले रहलें आ छात्रसंघ के गतिविधियन से पढ़ाई के माहौल प्रभावित हो रहल रहे। कैंपस में हिंसा आ अव्यवस्था के शिकायत भी सामने आइल रहे।

एकरा बाद विश्वविद्यालय पूरा कैंपस खातिर एक निर्वाचित छात्रसंघ के जगह विभाग आ विषय के स्तर पर छात्र प्रतिनिधित्व के व्यवस्था पर जोर देलस। अलग-अलग पाठ्यक्रम के छात्र अपना विषय से जुड़ल समस्या उठावे आ शैक्षणिक गतिविधि आयोजित करे खातिर संघ बनावत रहलें।

बाकिर एह व्यवस्था से पूरा विश्वविद्यालय के प्रतिनिधित्व करे वाला केंद्रीय छात्रसंघ के कमी बरकरार रहल।

अदालत आ प्रशासनिक फैसला भी बनल मुद्दा

2012 में तत्कालीन कुलपति नजीब जंग पिछला अनुभव के हवाला देत छात्रसंघ चुनाव करावे से इनकार कइले रहलें। ऊ विभागीय स्तर पर छात्र संघ के मजबूत करे के पक्ष में रहलें।

एही साल दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर भइल, जवना में लिंगदोह समिति के सिफारिश के मुताबिक स्वतंत्र, निष्पक्ष आ शांतिपूर्ण चुनाव करावे के मांग कइल गइल।

मार्च 2017 में विश्वविद्यालय जामिया स्टूडेंट काउंसिल के प्रस्ताव रखलस। एह व्यवस्था में कक्षा प्रतिनिधि मुख्य पद खातिर चुनाव लड़ सकत रहलें। बाकिर ई परंपरागत छात्रसंघ चुनाव से अलग व्यवस्था रहे आ एह पर आलोचना भी भइल।

20 दिसंबर 2022 के दिल्ली हाईकोर्ट याचिका के निपटारा कर देलस। सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय के तरफ से कहल गइल कि छात्रसंघ पहिले ही भंग हो चुकल बा। हालांकि, अदालत के आदेश में भविष्य में चुनाव करावे पर साफ रोक नइखे लगावल गइल रहे।

एही कानूनी स्थिति के लेके अब छात्र आ प्रशासन के बीच मतभेद देखे के मिल रहल बा।

AMU के फैसला से बढ़ल आंदोलन

जामिया में चुनाव बहाल करे के मांग के तेज होखे के एगो वजह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के फैसला भी बा। एएमयू में छात्रन के भूख हड़ताल के बाद 9 अक्टूबर के छात्रसंघ चुनाव बहाल करे खातिर औपचारिक अधिसूचना जारी भइल रहे।

एकरा बाद जामिया के छात्र भी अपना विश्वविद्यालय में चुनाव करावे के मांग तेज कर देले।

छात्रन के कहनाम बा कि प्रशासन के संविधान के मंजूरी से लेके चुनाव के तारीख तक पूरा कार्यक्रम जारी करे के चाहीं। खाली भविष्य में चुनाव करावे के वादा से आंदोलन खतम ना होई।

जामिया कब-कब विवाद में रहल?

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के इतिहास में कई अइसन मौका आइल बा, जब विश्वविद्यालय राष्ट्रीय बहस के केंद्र बनल।

  • 1992: सलमान रुश्दी के किताब पर विवाद — द सैटेनिक वर्सेज पर प्रतिबंध के विरोध में तत्कालीन प्रो-वाइस चांसलर मुशीरुल हसन के रुख के लेके विरोध भइल। विश्वविद्यालय के कुछ समय खातिर बंद करे के पड़ल।
  • 2011: अल्पसंख्यक दर्जा — विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जा आ दाखिला नियम के लेके बहस तेज भइल।
  • दिसंबर 2019: CAA विरोध-प्रदर्शन — नागरिकता संशोधन कानून के विरोध के दौरान पुलिस विश्वविद्यालय परिसर में दाखिल भइल। छात्र लाइब्रेरी में मारपीट आ आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोप लगवले।
  • 2020: दिल्ली दंगा मामला — पुलिस के चार्जशीट में जामिया के कुछ छात्र आ पूर्व छात्रन के नाम कथित साजिश के आरोप में शामिल भइल।
  • 2022: छात्रन के बीच झड़प — लाइब्रेरी में छात्र समूह के बीच झड़प आ बाद में गोली चलावे के घटना सामने आइल।
  • 2023: डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग विवाद — इंडिया: द मोदी क्वेश्चन के स्क्रीनिंग के अनुमति ना मिले के बाद कैंपस में तनाव पैदा भइल।
  • 2024: बाबरी मस्जिद से जुड़ल नारा — राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के दिन कुछ छात्रन के नारेबाजी के बाद प्रशासन जांच शुरू कइलस।

जामिया के पूर्व छात्र देश-दुनिया में बनवले पहचान

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कई पूर्व छात्र सिनेमा, पत्रकारिता, राजनीति आ प्रशासन में नाम कमवले बाड़े। एहमें अभिनेता शाहरुख खान, फिल्म निर्देशक कबीर खान, फिल्म निर्माता किरण राव, भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी आ पुलित्जर पुरस्कार विजेता फोटो पत्रकार दानिश सिद्दीकी के नाम शामिल बा।

अब आगे का होई?

जामिया में छात्रसंघ चुनाव के बहाली के एलान जरूर भइल बा, बाकिर आंदोलन खतम होखे के स्थिति अभी साफ नइखे। छात्रन के मांग बा कि प्रशासन संविधान के मंजूरी आ चुनाव के तारीख तय करे खातिर स्पष्ट समयसीमा जारी करे।

अब सबके नजर विश्वविद्यालय प्रशासन के अगिला कदम पर बा। अगर चुनाव के प्रक्रिया आ तारीख पर सहमति बन जाला, त करीब 20 साल बाद जामिया में फेर से छात्रसंघ चुनाव के रास्ता खुल सकेला।

💬 Comments
?

No comments yet. Be the first to comment!

खबरें और भी arrow-right Created with Sketch Beta.