इजरायल में अरब पार्टियन के बढ़ल ताकत, 19 सीट जीत के दावा; नेतन्याहू लगवलें वोट चोरी के आरोप

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Oct 29, 2026

यरुशलम: इजरायल के हालिया चुनाव में अरब पार्टियन के प्रदर्शन देश के राजनीति में नया मोड़ लेत लउकत बा। वोट के गिनती के मुताबिक, अरब समुदाय के दू गो प्रमुख पार्टी जॉइंट लिस्ट आ राम

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यरुशलम: इजरायल के हालिया चुनाव में अरब पार्टियन के प्रदर्शन देश के राजनीति में नया मोड़ लेत लउकत बा। वोट के गिनती के मुताबिक, अरब समुदाय के दू गो प्रमुख पार्टी जॉइंट लिस्ट आ राम (Ra’am) मिल के लगभग 19 सीट जीते के राह पर बाड़ी स। अगर ई अनुमान सही साबित होला, त इजरायली संसद नेसेट में अरब पार्टियन के ताकत काफी बढ़ सकेला। एह स्थिति में सरकार बनावे आ गिरावे में ई पार्टियन ‘किंगमेकर’ के भूमिका निभा सकेली स।

चुनाव के एह नतीजा के बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिकुड पार्टी अरब पार्टियन पर चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगवले बिया। एह आरोप के चलते राजनीतिक माहौल अउरी गरमा गइल बा।

जॉइंट लिस्ट के रणनीति का बा?

अरब-बहुल जॉइंट लिस्ट के नेता यूसुफ जबरीन के कहनाम बा कि उनकर पार्टी संभावित 12 सीट के इस्तेमाल नेतन्याहू सरकार के सत्ता से हटावे आ इजरायल के राजनीतिक दिशा बदले खातिर करी।

हालांकि, जबरीन साफ कइले बाड़न कि उनकर पार्टी आइजेनकोट के नेतृत्व वाली सरकार में सीधे शामिल ना होई। एकर प्रमुख वजह गाजा में इजरायली सैन्य अभियान आ दक्षिणी लेबनान पर कब्जा के समर्थन बा।

बाकिर जॉइंट लिस्ट बाहर से आइजेनकोट के गुट के समर्थन दे सकेले, ताकि संसद में विश्वास मत के दौरान सरकार के बहुमत मिल सके। जबरीन के मुताबिक, अरब समुदाय के सुरक्षा, नागरिक अधिकार आ समानता उनकर पार्टी के प्राथमिकता बा।

उनकर कहनाम बा कि पार्टी के समर्थन के बदले अरब नागरिकन के जायज मांग पूरा करे के दिशा में ठोस कदम उठावे के होई।

राम पार्टी भी बन सकेले किंगमेकर

अरब समुदाय के दूसरा प्रमुख पार्टी राम के नेतृत्व मंसूर अब्बास करत बाड़न। ऊ पार्टी के अइसन राजनीतिक सहयोगी के रूप में पेश करे के कोशिश करत बाड़न, जेकर समर्थन से सरकार बन सके।

अब्बास के रणनीति बाकी अरब पार्टियन से कुछ अलग बा। ऊ फिलिस्तीन मुद्दा के साथे-साथे अरब नागरिकन के रोजमर्रा के समस्या पर अधिका जोर देत बाड़न। अपराध पर नियंत्रण, रोजगार, बुनियादी सुविधा, सामाजिक-आर्थिक असमानता आ नगरपालिका के फंडिंग उनकर प्रमुख मुद्दा हउवें।

मतदान खत्म होखला के बाद अब्बास कहलें कि ऊ गठबंधन बनावे के संभावना के लेके आशावान बाड़न। उनका मुताबिक, आइजेनकोट गुट के वरिष्ठ नेता चुनाव से पहिले संभावित समझौता पर बातचीत कइले रहलें। अब्बास ईहो दावा कइलें कि सिर्फ विपक्षी खेमे ना, बलुक दक्षिणपंथी खेमे के कुछ नेता भी उनकर पार्टी से संपर्क कइले रहलें।

हालांकि, चुनाव प्रचार के दौरान आइजेनकोट अरब पार्टियन के साथ सरकार बनावे के संभावना खारिज कइले रहलें। उनकर तर्क रहे कि दुनो पक्ष के साझा राजनीतिक मूल्य में अंतर बा।

नेतन्याहू के रुख का बा?

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिकुड पार्टी साफ कर दिहले बिया कि ऊ सरकार बनावे खातिर कवनो अरब पार्टी से बातचीत ना करी। पार्टी के प्रवक्ता गाइ लेवी यरुशलम में कहलें कि अरब पार्टियन के साथ गठबंधन के सवाले नइखे उठत।

एह बीच, नेतन्याहू अरब पार्टियन पर चुनाव में धांधली आ वोट चोरी के आरोप लगवले बाड़न। हालांकि, एह आरोप के समर्थन में कवनो स्वतंत्र रूप से सत्यापित सबूत के जानकारी एह रिपोर्ट में नइखे दिहल गइल।

अगर अरब पार्टियन के सीट के अनुमान सही साबित होला, त सरकार गठन के गणित काफी बदल सकेला। बहुमत खातिर अलग-अलग राजनीतिक गुटन के अरब पार्टियन के समर्थन के जरूरत पड़ सकेला।

मंसूर अब्बास के हउवें?

मंसूर अब्बास 52 साल के अरब-इजरायली नेता आ पेशा से डेंटिस्ट हउवें। ऊ राम पार्टी के प्रमुख चेहरा हउवें। साल 2019 में नेसेट खातिर चुनल गइला के बाद ऊ अरब राजनीति में व्यावहारिक रुख अपनवले बाड़न।

उनकर जोर अरब नागरिकन के नागरिक सुविधा, अपराध नियंत्रण, सामाजिक विकास आ बुनियादी ढांचा पर रहल बा। साल 2021 से 2022 के बीच उनकर पार्टी नफ्ताली बेनेट आ यायर लापिड के गठबंधन सरकार में शामिल भइल रहे। ई इजरायल के राजनीति में एगो महत्वपूर्ण बदलाव मानल गइल रहे।

इजरायल में अरब नागरिकन के स्थिति

इजरायल के कुल आबादी में अरब नागरिकन के हिस्सा लगभग 20 प्रतिशत बा। इनकर संख्या करीब 21 लाख बतावल जाला। चिकित्सा, शिक्षा, इंजीनियरिंग, साहित्य आ खेल समेत कई क्षेत्र में अरब समुदाय के लोग महत्वपूर्ण भूमिका निभावत बाड़े।

इजरायल के स्वास्थ्य क्षेत्र में अरब समुदाय के भागीदारी खास तौर पर उल्लेखनीय बा। डॉक्टर, नर्स आ फार्मासिस्ट के बीचो-बीच इनकर उपस्थिति देश के सामाजिक जीवन में इनकर योगदान के देखावेला।

साल 2021 में राम पार्टी के गठबंधन सरकार में शामिल होखला से अरब पार्टियन के राजनीतिक भागीदारी के नया रास्ता खुलल रहे। अब चुनाव में संभावित बढ़त के चलते एक बेर फेर सवाल उठ रहल बा कि का अरब पार्टियन सरकार गठन के फैसला करे में निर्णायक भूमिका निभइहें?

आखिरी तस्वीर सीट के आधिकारिक नतीजा, गठबंधन के बातचीत आ संसद में बहुमत जुटावे के क्षमता पर निर्भर करी।

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