पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी के नेतृत्व में ‘प्रकृति पथ यात्रा’ गोरखपुर पहुँचल, जोरदार स्वागत भइल

By Shweta Supriya

Published on: Oct 26, 2026

गोरखपुर। प्रकृति के संरक्षण आ पर्यावरण के प्रति लोगन में जागरूकता बढ़ावे के मकसद से नेपाल के जनकपुरधाम से निकलल ‘प्रकृति पथ यात्रा’ अतवार के गोरखपुर पहुँच गइल। देवरिया के रास्ते शहर में पहुँचल एह

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गोरखपुर। प्रकृति के संरक्षण आ पर्यावरण के प्रति लोगन में जागरूकता बढ़ावे के मकसद से नेपाल के जनकपुरधाम से निकलल ‘प्रकृति पथ यात्रा’ अतवार के गोरखपुर पहुँच गइल। देवरिया के रास्ते शहर में पहुँचल एह यात्रा के गौरी बाजार आ चौरीचौरा में नागरिकन के ओर से स्वागत कइल गइल।

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के गेट नंबर दू पर पर्यावरणविद् डॉ. गोविंद पांडेय आ डॉ. अंकित यात्रियन के स्वागत कइलें। एकरा बाद यात्रा गोरखनाथ मंदिर पहुँचल, जहाँ यात्री लोग आराम करत बा। सोमार के ई यात्रा बस्ती खातिर रवाना होई।


एह यात्रा के नेतृत्व पद्म भूषण आ पद्मश्री से सम्मानित पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी करत बाड़ें। महात्मा गांधी के जयंती पर 2 अक्टूबर के जनकपुरधाम से शुरू भइल ई साइकिल यात्रा गांधीवादी विचार, स्वराज आ स्वस्थ पारिस्थितिकी के अवधारणा के आगे बढ़ावे के एगो प्रयास बा।

करीब 50 से 55 दिन में तीन हजार किलोमीटर के दूरी तय करे के लक्ष्य लेके निकलल ई यात्रा अब तक करीब 1200 किलोमीटर के सफर पूरा कर चुकल बा। अलग-अलग पड़ाव पर विद्यार्थी, शिक्षक, सामाजिक संगठन, नागरिक आ जनप्रतिनिधियन से बातचीत करके पर्यावरण संरक्षण के संदेश दिहल जा रहल बा।

‘प्रकृति ही जीवन के आधार ह’

यात्रा के संयोजक राम बाबू तिवारी बतवलें कि यात्रा के मूल संदेश बा कि प्रकृति खाली संसाधन के भंडार ना ह, बलुक जीवन के आधार ह। हवा, माटी, जंगल, नदी आ पानी के बिना मानव सभ्यता के कल्पना नइखे कइल जा सकत। एकरा बावजूद विकास के दौड़ में प्राकृतिक संसाधन के दोहन पर जोर दिहल गइल, जबकि ओह लोग के संरक्षण आ दोबारा बहाल करे के पर्याप्त महत्व नइखे मिल पावल।

जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, पानी के संकट, जंगल के कटाई, जैव विविधता में गिरावट आ बढ़त प्रदूषण आज गंभीर चुनौती बन गइल बा। प्रकृति पथ यात्रा के माध्यम से लोगन के एह समस्या सभ के प्रति जागरूक करे के साथे अपना जीवनशैली आ व्यवहार में बदलाव लावे के प्रेरणा दिहल जा रहल बा।

जनभागीदारी से ही संभव बा संरक्षण

यात्रा के दौरान पानी के संरक्षण, साफ-सफाई, पेड़ लगावे, जैव विविधता आ पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली पर चर्चा कइल जा रहल बा। एकर मकसद युवा, महिला, किसान आ स्थानीय समुदाय के प्रकृति संरक्षण से जोड़ल बा। यात्रा के संदेश बा कि पर्यावरण के बचावल खाली सरकार भा कवनो संस्था के जिम्मेदारी ना ह, बलुक हर नागरिक के कर्तव्य बा।

‘प्रकृति पथ यात्रा’ विकास आ पर्यावरण के बीच संतुलन बनावे आ आवे वाली पीढ़ियन खातिर सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करे के एगो पहल बा। एह यात्रा के माध्यम से लोगन के ई समझावे के कोशिश कइल जा रहल बा कि प्रकृति के संरक्षण ही मानवता, संस्कृति आ भविष्य के रक्षा के आधार ह।

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