नतीजा के चिंता से लेके फैसला लेवे के डर तक: जब जिंदगी में कुछ समझ में ना आवे, त काम आई गीता के ई 10 श्लोक

By Shweta Supriya

Published on: Oct 21, 2026

नई दिल्ली। भगवद्गीता के सबसे प्रमुख श्लोकन में कर्मण्येवाधिकारस्ते, यदा यदा हि धर्मस्य, वासांसि जीर्णानि, सर्वधर्मान्परित्यज्य आ योगस्थः कुरु कर्माणि प्रमुख बाड़ें। ई सभे श्लोक निष्काम कर्म, आत्मा के अमरता, भगवान के शरण में जाए

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नई दिल्ली। भगवद्गीता के सबसे प्रमुख श्लोकन में कर्मण्येवाधिकारस्ते, यदा यदा हि धर्मस्य, वासांसि जीर्णानि, सर्वधर्मान्परित्यज्य आ योगस्थः कुरु कर्माणि प्रमुख बाड़ें।

ई सभे श्लोक निष्काम कर्म, आत्मा के अमरता, भगवान के शरण में जाए आ समभाव (समानता, संतुलन भा मन के स्थिर अवस्था) के सही ज्ञान देलें। आईं, भगवद्गीता के 10 सबसे महत्वपूर्ण श्लोक के बारे में जानीं।

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

(भगवद्गीता 2.47)

मतलब- ई गीता के सबसे प्रसिद्ध श्लोक ह। भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहत बाड़ें कि मनई के अपना कर्तव्य पर ध्यान देवे के चाहीं, ना कि ओकर नतीजा के चिंता करे के। ई श्लोक कर्मयोग पर आधारित बा। आदि शंकराचार्य एह श्लोक के संदर्भ में कहले बाड़ें कि निष्काम कर्म ही मोक्ष के सच्चा रास्ता ह।

यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥

एह श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन से कहत बाड़ें कि जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ेला, तब-तब भगवान खुद प्रकट होखेलें। अगिला श्लोक में ऊ कहत बाड़ें कि साधु-संतन के रक्षा, दुष्टन के विनाश आ धर्म के स्थापना खातिर हम हर युग में प्रकट होखीं।

वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि। तथा शरीराणि विहाय जीर्णानि अन्यानि संयाति नवानि देही॥

एह श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहत बाड़ें कि आत्मा के अमरता के समझल बहुत जरूरी बा। जवना तरह हम पुरान कपड़ा बदल के नया कपड़ा पहिनिले, ओही तरह आत्मा भी पुरान शरीर छोड़ के नया शरीर धारण करेला। शरीर के मृत्यु होला, आत्मा के ना।

योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय। सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते॥

एह श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहत बाड़ें कि जिनगी में सफलता मिले चाहे असफलता, फायदा हो चाहे नुकसान, दुनो हालात में मन के एक समान रखल ही सच्चा योग ह।

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥

एह श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहत बाड़ें कि जब सभ रास्ता पर भ्रम पैदा होखे, त आखिर में बस भगवान के शरण में समर्पित हो जा। ई निराशा के संदेश ना, बलुक अटूट विश्वास के संदेश ह। जब इंसान आपन सगरी कोशिश से थक जाला, तब ईश्वर के शरणे ओकर सबसे बड़ सहारा बनेले।

न जायते म्रियते वा कदाचिन् नायं भूत्वा भविता वा न भूयः। अजो नित्यः शाश्वतोऽयं पुराणो न हन्यते हन्यमाने शरीरे॥

एह श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहत बाड़ें कि आत्मा के ना कबो जन्म होला आ ना कबो ओकर मृत्यु होला। ई ना त पहिले पैदा भइल आ फेर दोबारा पैदा होखे वाली ह। ई अजन्मा, नित्य, शाश्वत आ पुरातन ह। शरीर नष्ट हो जाएला, तबो आत्मा के नाश ना होला।

बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते। तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम्॥

एह श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहत बाड़ें कि समभाव वाली बुद्धि से युक्त इंसान एह लोक में पुण्य आ पाप, दुनो के त्याग देला। एह से तू योग से जुड़ जा। योग के मतलब कर्म में कुशलता ह।

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु। मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः॥

अपना मन हमरा में लगाव, हमार भक्त बनऽ, हमार पूजा करऽ आ हमरा के प्रणाम करऽ। एह तरीका से अपना के हमरा में लीन करके आ हमरा पर पूरा भरोसा रखके तू निश्चित रूप से हमरा के प्राप्त कर लेबऽ।

ध्यानेनात्मनि पश्यन्ति केचिदात्मानमात्मना। अन्ये सांख्येन योगेन कर्मयोगेन चापरे॥

एह श्लोक में भगवान श्रीकृष्ण कहत बाड़ें कि ईश्वर के प्राप्त करे के कई गो रास्ता बा, जइसे ध्यान, कर्म आ ज्ञान। कवनो एगो रास्ता दूसरा से बेहतर नइखे। हर आदमी अपना स्वभाव के हिसाब से रास्ता चुन सकेला। ई गीता के सबसे उदार शिक्षा में से एगो ह।

श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥

अपना धर्म में कुछ कमी होखे, तबो ऊ दोसरा के धर्म के बढ़िया तरीका से पालन करे से बेहतर ह। अपना धर्म के पालन करत-करत प्राण दे दिहल भी कल्याणकारी ह, जबकि दोसरा के धर्म अपनावल भय पैदा करे वाला ह।

अस्वीकरण: एह लेख में बतावल गइल उपाय, फायदा, सलाह आ विचार खाली सामान्य जानकारी खातिर बा। खबर भोजपुरी एह लेख में लिखल बात के समर्थन नइखे करत। एह लेख में दिहल जानकारी अलग-अलग माध्यम, ज्योतिषी, पंचांग, प्रवचन, मान्यता, धर्मग्रंथ आ लोककथा से जुटावल गइल बा। पाठक लोग से अनुरोध बा कि एह लेख के अंतिम सत्य चाहे दावा मत मानीं आ अपना विवेक के इस्तेमाल करीं। खबर भोजपुरीअंधविश्वास के खिलाफ बा।

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