New Delhi : ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस के आर-पार के लड़ाई, 1 नवंबर के रामलीला मैदान में महारैली के तैयारी

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: 12 घंटे पहले

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपन विरोध प्रदर्शन तेज करे के तैयारी में जुट गइल बिया। पार्टी ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ आंदोलन के माध्यम से

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नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी चुनाव आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपन विरोध प्रदर्शन तेज करे के तैयारी में जुट गइल बिया। पार्टी ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ आंदोलन के माध्यम से विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया आ वोटर लिस्ट से नाम काटे के मुद्दा के जनता के बीच ले जाए के कोशिश करत बिया। एह सिलसिला में कांग्रेस 1 नवंबर के दिल्ली के रामलीला मैदान में एगो बड़हन महारैली आयोजित करे के तैयारी करत बिया।

पार्टी के एह अभियान के मकसद खाली चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध जतावल ना, बलुक संगठन के मजबूत बनावल आ कार्यकर्तन के सक्रिय कइल भी बा। कांग्रेस के रणनीति से साफ संकेत मिल रहल बा कि ऊ वोट चोरी के आरोप के राष्ट्रीय स्तर पर एगो बड़हन राजनीतिक मुद्दा बनावे के कोशिश में जुटल बिया।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के तेज करे के तैयारी

कांग्रेस चुनाव आयोग के एसआईआर प्रक्रिया के विरोध में लगातार आवाज उठा रहल बिया। पार्टी के आरोप बा कि एह प्रक्रिया के चलते मतदाता सूची से कई लोगन के नाम हटावे के आशंका बा। कांग्रेस एह मुद्दा पर चुनाव आयोग से जवाबदेही तय करे के मांग करत आ रहल बिया।

एह आंदोलन के जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करे आ निगरानी करे खातिर कांग्रेस 200 से अधिक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) पर्यवेक्षक तैनात करे के फैसला कइले बिया। ई पर्यवेक्षक अलग-अलग इलाका में संगठन के गतिविधियन पर नजर रखिहें आ आंदोलन के आगे बढ़ावे में मदद करिहें।

पार्टी के एह कदम से ई संकेत मिल रहल बा कि कांग्रेस अब एह मुद्दा के खाली बयानबाजी तक सीमित ना रखे चाहत बिया। ऊ आपन नेता, कार्यकर्ता आ संगठन के अलग-अलग स्तर पर सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे के कोशिश करत बिया।

राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोप के जनता तक पहुंचावे के रणनीति

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी चुनावी प्रक्रिया आ वोटर लिस्ट से जुड़ल मुद्दा पर पहिले भी सवाल उठावत रहल बाड़ें। कांग्रेस अब उनका ‘वोट चोरी’ के दावा के आम जनता तक पहुंचावे खातिर व्यापक अभियान चलावे के तैयारी में बिया।

राजधानी दिल्ली से लेके अलग-अलग राज्यन में हो रहल विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता सक्रिय भूमिका निभावत बाड़ें। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व एह प्रदर्शनन के निगरानी भी करत बा, ताकि आंदोलन के दिशा आ संगठनात्मक गतिविधि पर लगातार नजर रखल जा सके।

कांग्रेस के रणनीति बा कि वोटर लिस्ट से जुड़ल शिकायतन के मुद्दा पर लोगन के जागरूक कइल जाव आ लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाता के अधिकार के महत्व बतावल जाव।

1 नवंबर के रामलीला मैदान में होई महारैली

कांग्रेस खातिर 1 नवंबर के रामलीला मैदान में होखे वाली महारैली काफी महत्वपूर्ण मानल जा रहल बा। पार्टी के सामने एह रैली में बड़ संख्या में लोग जुटावे के चुनौती बा। कांग्रेस चाहत बिया कि देश के अलग-अलग राज्यन से कार्यकर्ता आ समर्थक दिल्ली पहुंचें आ आंदोलन के समर्थन में आवाज उठावें।

एह रैली में विपक्षी गठबंधन आईएनडीआईए के प्रमुख नेता लोग के भी आमंत्रित करे के योजना बा। अगर गठबंधन के प्रमुख नेता एह कार्यक्रम में शामिल होखेलें, त कांग्रेस के आंदोलन के व्यापक राजनीतिक समर्थन मिल सकेला।

पार्टी खास तौर पर ओह लोगन के भी रैली में शामिल करे के कोशिश करी, जिनकर दावा बा कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से उनकर नाम काट दिहल गइल बा। कांग्रेस एह मुद्दा के माध्यम से मतदाता अधिकार आ चुनावी पारदर्शिता के सवाल के प्रमुखता से उठावे के तैयारी में बिया।

कांग्रेस खातिर संगठन मजबूत करे के मौका

राजनीतिक जानकारन के नजर में कांग्रेस के ई अभियान संगठनात्मक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण बा। देश के अलग-अलग हिस्सा में आंदोलन चलावे, कार्यकर्तन के सक्रिय करे आ जनता के बीच मुद्दा पहुंचावे से पार्टी के जमीनी मौजूदगी मजबूत हो सकेले।

हालांकि, 1 नवंबर के महारैली में जुटे वाला भीड़ आ विपक्षी दलन के भागीदारी से पता चली कि कांग्रेस के एह अभियान के केतना समर्थन मिलत बा।

फिलहाल, कांग्रेस ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपन विरोध जारी रखे आ एसआईआर से जुड़ल सवालन के राजनीतिक बहस के केंद्र में ले आवे के कोशिश करत बिया। अब सबकर नजर रामलीला मैदान में होखे वाली महारैली पर टिकल बा, जहां पार्टी ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारा के साथ आपन अगिला राजनीतिक रणनीति सामने रख सकेले।

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