गोरखपुर। पूर्वांचल के एगो बड़हन चिकित्सा संस्थान एम्स गोरखपुर के स्वास्थ्य सुविधा एक बेर फेर चर्चा में आ गइल बा। एह बेर संस्थान के आम मरीज ना, बल्कि कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता के तबीयत अचानक खराब हो गइल, जवना के बाद उनका के इलाज खातिर निजी अस्पताल में भर्ती करावे के पड़ल।
मिलल जानकारी के मुताबिक, बुधवार के डॉ. विभा दत्ता अपना आवास पर अचानक बेहोश हो गइली। आनन-फानन में उनका के एम्स गोरखपुर के इमरजेंसी विभाग में पहुंचावल गइल। उहाँ डॉक्टरन के टीम इलाज शुरू कइलस। बाकिर स्थिति में अपेक्षित सुधार ना होखला के चलते डॉक्टर लोग उनका के निजी अस्पताल रेफर करे के फैसला लिहलस।
एम्स के इमरजेंसी से एंबुलेंस के जरिए डॉक्टर आ स्वास्थ्यकर्मियन के टीम उनका के दोसरा अस्पताल पहुंचवलस। एह घटना के बाद एम्स के चिकित्सा सुविधा पर सवाल उठे लागल बा।
सात साल बादो कैथ लैब नइखे तैयार
डॉ. विभा दत्ता के निजी अस्पताल भेजे जाए के घटना के बाद एम्स गोरखपुर में कैथ लैब के कमी फेर चर्चा में आ गइल बा। गंभीर हृदय रोगियन के इलाज खातिर कैथ लैब बहुत जरूरी होला। बतावल जाता कि संस्थान शुरू भइला के सात साल बादो इहाँ कैथ लैब के सुविधा उपलब्ध नइखे। अगर ई सुविधा रहित त संभव रहे कि कार्यकारी निदेशक के इलाज एम्स में ही हो पावत।
एह घटना से मरीज आ उनका परिवार के लोग के मन में संस्थान के स्वास्थ्य व्यवस्था के लेके कई सवाल उठे लागल बा।
मीडिया सेल बतवलस- स्वस्थ बाड़ी डॉ. दत्ता
एम्स के मीडिया सेल के अनुसार, डॉ. विभा दत्ता अब स्वस्थ बाड़ी। उनका सभे जांच रिपोर्ट सामान्य आइल बा। बियफे के ऊ अपना कार्यालय पहुंचली आ रोजमर्रा के कामकाज कइली। एतने ना, ऊ आयुष विंग में मेडिकल ऑफिसर के इंटरव्यू में भी शामिल भइली।
बतावत चलीं कि डॉ. विभा दत्ता 30 जनवरी 2025 के एम्स गोरखपुर के कार्यकारी निदेशक के जिम्मेदारी संभरले रहली। एहसे पहिले ऊ 2018 से 2023 तक एम्स नागपुर के निदेशक रह चुकल बाड़ी। ऊ एम्स गोरखपुर के पांचवीं कार्यकारी निदेशक हईं।
डॉ. दत्ता के तबीयत खराब होखे आ निजी अस्पताल में इलाज करावे के घटना से एम्स गोरखपुर में उपलब्ध चिकित्सा संसाधन आ सुविधा पर फेर बहस शुरू हो गइल बा।







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