नई दिल्ली। अमेरिका के डोनल्ड ट्रंप सरकार इमिग्रेशन आ विदेशी कामगारन के बहाली के नीतियन प शिकंजा कसत एगो बड़हन आ कड़ा कदम उठवले बिया।
अमेरिकी श्रम विभाग माइक्रोसॉफ्ट आ एडोब जइसन बड़ अमेरिकी कंपनियन के संगे-साथे भारत के प्रमुख आईटी कंपनियन, जइसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस, विप्रो, एचसीएल (HCL), कॉग्निजेंट आ कैपजेमिनी समेत कुल 8 गो बड़हन कंपनियन के स्थायी श्रम प्रमाणन (PERM) प्रोग्राम से प्रतिबंधित कर देले बा।
साफ-साफ शब्दन में समझीं त एह प्रतिबंध के सीधा मतलब ई बा कि अब अमेरिकी सरकार एह आठो कंपनियन के ओर से दाखिल कइल जाए वाला कवनो नया PERM आवेदन स्वीकार ना करी। एतने ना, पहिले से लंबित आवेदनन पर भी आगे कवनो कार्रवाई ना होई।
अइसन में अब सबसे बड़हन सवाल ई बा कि ट्रंप प्रशासन के एह कदम से भारतीयन प का असर पड़ल? क अमेरिका में काम करे के सपना देख रहल भारतीय नवहियन खातिर ई एगो झटका बा? अगर हँ, त ई झटका केतना बड़ बा? आ सभसे बड़ सवाल ई बा कि आखिर ई PERM प्रोग्राम का ह? आईं, हम रउआ सभ के बतावत बानी।
सबसे पहिले समझीं कि आखिर PERM का ह?
बता देई कि अमेरिका में स्थायी रूप से रहे के प्रक्रिया में ई एगो बेहद जरूरी आ शुरुआती चरण ह। एकर शुरुआत 2005 में भइल रहे। एह प्रक्रिया के तहत अमेरिकी कंपनियन विदेशी कर्मचारियन के परमानेंट रेजिडेंसी यानी ग्रीन कार्ड खातिर स्पॉन्सर करे ली।
अब एकर नियम के बात करीं त, एह प्रक्रिया में श्रम विभाग के ई प्रमाणित करे के पड़ेला कि कवनो खास नौकरी खातिर पर्याप्त अमेरिकी नागरिक उपलब्ध नइखन। एही चलते कंपनी कवनो विदेशी नागरिक के नौकरी पर रखतिया।
अब जानीं कि कंपनियन पर रोक काहे लगावल गइल?
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आ ट्रंप प्रशासन के आरोप बा कि ई बड़ कंपनियन एह प्रोग्राम के दुरुपयोग करत बाड़ी स। अमेरिकी स्थानीय नागरिकन के नौकरी से निकाल के उनका जगह पर विदेशी कामगारन, खासकर H-1B वीजा धारकन के कम वेतन पर नौकरी दिहल जा रहल बा। प्रशासन के तर्क बा कि एहसे अमेरिकी नवहियन के रोजगार पर असर पड़ रहल बा।
अब जानीं कि भारतीयन पर एकर का असर पड़ी?
एह बात के अइसन समझल जा सकेला कि अमेरिका में रहे वाला लाखों भारतीय, जे मुख्य रूप से H-1B वीजा पर उहाँ नौकरी करत बाड़ें आ काफी समय से ग्रीन कार्ड के इंतजार में बाड़ें, उनका खातिर ई एगो बड़ झटका बा। एकर कारण ई बा कि H-1B एगो अस्थायी वर्क वीजा ह, जेकर एगो तय समयसीमा होला।
एहसे अलग, अमेरिका में हमेशा खातिर बसे के प्रक्रिया में PERM सर्टिफिकेट एगो बेहद जरूरी सीढ़ी ह। अइसन में अब एह रोक के बाद, एह 8 गो कंपनियन में काम करे वाला भारतीय कर्मचारियन के ग्रीन कार्ड के आवेदन पर आगे के कार्रवाई ना हो पाई।
नौकरी त कर सकत बाड़ें, बाकिर स्थायी रूप से बस ना सकत बाड़ें
अइसनो नइखे कि एह प्रतिबंध के बाद अमेरिका में रहे वाला भारतीय भा कवनो दोसरा देश के कर्मचारियन के उहाँ रहे में तुरंत दिक्कत होखे लागी। राहत के बात ई बा कि एह रोक से कर्मचारियन के मौजूदा H-1B वीजा तुरंते रद्द नइखे भइल।
एह बात में कवनो शक नइखे कि ऊ अभी कानूनी रूप से अमेरिका में रह के आपन नौकरी कर सकत बाड़ें। बाकिर, ओह लोग के स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करे के प्रक्रिया अनिश्चित समय खातिर रुक गइल बा।
अब का करीहें भारतीय पेशेवर?
देखीं, भारत के लाखों आईटी पेशेवर, खासके टाटा, इंफोसिस, विप्रो आ HCL जइसन संस्थानन में काम करे वाला कर्मचारी, अमेरिका में ग्रीन कार्ड खातिर बरिसन-बरिस इंतजार करत बाड़ें। अइसन में एह रास्ता के बंद हो जाइले से ओह लोगन के भविष्य प अनिश्चितता के बादर छाइल लागल बा। अब ओह लोग के अमेरिकी वीजा नियम के तहत आपन वर्क वीजा बार-बार रिन्यू करावे के पड़ सकेला आ लंबा समय ले अस्थायी स्थिति में रहे के पड़ सकेला।
दोसर ओर, मुश्किल ईहो बा कि कंपनियन खातिर अमेरिका में विदेशी कर्मचारियन के रोकल आ ओह लोग के स्थायी भविष्य के भरोसा दिहल कठिन हो जाई। एहसे कई पेशेवर मानसिक तनाव आ अनिश्चितता के सामना कर सकत बाड़ें। ओह लोग के मन में ई चिंता रह सकेले कि अगर स्थिति ना सुधरल, त एक दिन अमेरिका छोड़ के अपना देश लौटेक के पड़ सकेला।






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