Navratri 2026 Ashtami Navami Date: शारदीय नवरात्रि में सप्तमी, महाष्टमी आ नवमी के तिथि के लेके भक्तन के बीच अक्सर असमंजस हो जाला। एह साल 2026 में भी अष्टमी आ नवमी के तिथि के समय के चलते व्रत, कन्या पूजन आ हवन के तारीख के लेके सवाल उठ रहल बा। कुछ लोग अष्टमी के दिन कन्या पूजन करेलें, त कुछ लोग नवमी के दिन। अइसन में सही तिथि आ पूजा के समय जानल जरूरी बा।
ज्योतिर्विद डॉ. दिवाकर त्रिपाठी के बतावल जानकारी के अनुसार, महाष्टमी के व्रत 18 अक्टूबर, रविवार के रखल जाई। एह दिन अष्टमी के पूजा, निशा पूजा आ अष्टमी के कन्या पूजन कइल जा सकेला। नवमी तिथि 19 अक्टूबर, सोमवार के सबेरे 7 बजके 53 मिनट के बाद शुरू होई। आइं जानल जाव सप्तमी, अष्टमी आ नवमी के तिथि, व्रत आ कन्या पूजन के समय।
कब बा सप्तमी तिथि? जान लीं पूजा के समय
शारदीय नवरात्रि 2026 में सप्तमी तिथि 17 अक्टूबर, शनिवार के पड़ी। दिहल गइल पंचांग जानकारी के अनुसार, सप्तमी तिथि रात 5 बजके 53 मिनट तक रही।
एह दिन मां दुर्गा के सातवां स्वरूप मां कालरात्रि के पूजा-अर्चना कइल जाई। मां कालरात्रि के संकट दूर करे वाली आ भक्तन के रक्षा करे वाली देवी मानल जाला।
अगर पूजा पंडाल में मां दुर्गा के प्रतिमा स्थापित करे के योजना बा, त ज्योतिर्विद के बतावल समय के अनुसार 17 अक्टूबर के सबेरे 8 बजके 58 मिनट से पहिले प्रतिमा स्थापना कर लेवे के चाहीं।
महाष्टमी कब बा? कब रखल जाई अष्टमी के व्रत?
शारदीय नवरात्रि में महाष्टमी 18 अक्टूबर, रविवार के मनावल जाई। ज्योतिर्विद डॉ. दिवाकर त्रिपाठी के अनुसार, अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर के सूर्योदय से पहिले शुरू होके 19 अक्टूबर, सोमवार के सबेरे 7 बजके 53 मिनट तक रही।
उदया तिथि आ प्रचलित धार्मिक मान्यता के आधार पर महाष्टमी के व्रत 18 अक्टूबर के रखल जाई। एह दिन मां दुर्गा के विशेष पूजा कइल जाई। भक्त लोग फल-फूल, दीप आ नैवेद्य अर्पित करके माता रानी से परिवार के सुख-समृद्धि के प्रार्थना करीहें।
महाष्टमी के दिन निशा पूजा के भी खास महत्व बा। जे भक्त अष्टमी तिथि के कन्या पूजन करेलें, ऊ 18 अक्टूबर, रविवार के कन्या पूजन कर सकत बाड़ें।
अष्टमी के जरूरी तारीख आ समय:
- महाष्टमी के व्रत: 18 अक्टूबर, रविवार
- अष्टमी के कन्या पूजन: 18 अक्टूबर, रविवार
- अष्टमी तिथि के समाप्ति: 19 अक्टूबर, सोमवार के सबेरे 7:53 बजे
- अष्टमी व्रत के पारण: दिहल गइल जानकारी के अनुसार 19 अक्टूबर के दिन में 7:55 बजे के बाद
व्रत के पारण के समय अपना स्थानीय पंचांग आ पारिवारिक परंपरा से जरूर मिला लीं।
नवमी कब बा? कन्या पूजन के सही समय का बा?
नवमी तिथि 19 अक्टूबर, सोमवार के सबेरे 7 बजके 53 मिनट के बाद शुरू होई। नवमी के दिन मां दुर्गा के पूजा, हवन आ कन्या पूजन करे वाला भक्तन खातिर तिथि के समय जानल जरूरी बा।
दिहल गइल जानकारी के अनुसार, नवमी के कन्या पूजन 19 अक्टूबर के सबेरे 7 बजके 53 मिनट के बाद से 20 अक्टूबर, मंगलवार के सबेरे 9 बजके 35 मिनट से पहिले कइल जा सकेला।
नवरात्रि के व्रत से जुड़ल हवन आ पूजा के बाकी काम 19 अक्टूबर के सबेरे 7:53 बजे से 20 अक्टूबर के सबेरे 9:35 बजे तक करे के जानकारी दिहल गइल बा। हालांकि, पूजा के शुभ मुहूर्त आ तिथि के सही गणना स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकेला।
नवमी के जरूरी तारीख आ समय:
- नवमी तिथि शुरू: 19 अक्टूबर, सोमवार, सबेरे 7:53 बजे के बाद
- नवमी के कन्या पूजन: 19 अक्टूबर के सबेरे 7:53 बजे के बाद से 20 अक्टूबर के सबेरे 9:35 बजे से पहिले
- हवन आ नवरात्रि से जुड़ल पूजा: बतावल गइल अवधि के भीतर, स्थानीय पंचांग के अनुसार
अष्टमी आ नवमी के कन्या पूजन काहे होला?
नवरात्रि में कन्या पूजन के विशेष धार्मिक महत्व बा। एह परंपरा में छोट-छोट कन्या लोग के देवी के स्वरूप मान के पूजा कइल जाला। उनकर पैर धोवल, तिलक लगावल, भोजन करावल आ सामर्थ्य के अनुसार उपहार भा दक्षिणा दिहल जाला।
कई परिवार अष्टमी के दिन कन्या पूजन करेलें, जबकि कुछ परिवार नवमी के दिन ई परंपरा निभावेलें। दुनो दिन पूजा करे के परंपरा अलग-अलग परिवार आ क्षेत्र में प्रचलित बा। एहसे अपना घर के परंपरा आ स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा के दिन तय कइल जा सकेला।
नवरात्रि के व्रत करत समय एह बात के रखीं ध्यान
नवरात्रि के व्रत रखे वाला भक्त साफ-सफाई, सात्विक भोजन आ पूजा-पाठ के नियम के पालन करेलें। व्रत के दौरान अपना स्वास्थ्य के भी ध्यान रखल जरूरी बा। कन्या पूजन आ हवन करे से पहिले पूजा के सामग्री तैयार रखीं आ तिथि के समय के पुष्टि कर लीं।
निष्कर्ष: शारदीय नवरात्रि 2026 में बतावल पंचांग जानकारी के अनुसार सप्तमी 17 अक्टूबर, महाष्टमी 18 अक्टूबर आ नवमी 19 अक्टूबर के शुरू होई। अष्टमी के कन्या पूजन करे वाला भक्त 18 अक्टूबर के पूजा कर सकत बाड़ें, जबकि नवमी के कन्या पूजन करे वाला लोग 19 अक्टूबर के सबेरे 7:53 बजे के बाद के समय पर ध्यान दीं। अलग-अलग पंचांग में समय के अंतर संभव बा, एहसे अंतिम निर्णय से पहिले स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिर्विद से पुष्टि जरूर करीं।
डिस्क्लेमर: ई लेख उपलब्ध करावल गइल ज्योतिषीय जानकारी पर आधारित बा। तिथि आ पूजा के मुहूर्त स्थान के अनुसार बदल सकेला। व्रत, पारण आ कन्या पूजन से पहिले स्थानीय पंचांग से समय के पुष्टि करीं।






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