Ram Navami Special: जानि राम नौमी मे माई दुर्गा के आठवा शक्ति महागौरी के कहानी, आरती, मंत्र , रंग आ पूजा के विधि

By Anurag Ranjan

Published on: Mar 29, 2023

Ram Navami Special: जानि राम नौमी मे माई दुर्गा के आठवा शक्ति महागौरी के कहानी, आरती, मंत्र , रंग आ पूजा के विधि Ram Navami Special: खबर भोजपुरी आप सभे के सोझा लेके आइल बा

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Ram Navami Special: जानि राम नौमी मे माई दुर्गा के आठवा शक्ति महागौरी के कहानी, आरती, मंत्र , रंग आ पूजा के विधि

Ram Navami Special: खबर भोजपुरी आप सभे के सोझा लेके आइल बा राम नौमी के नौ दिन के, नौ रूप के कहानी| आजु २९ मार्च के राम नौमी मे माई दुर्गाजी के आठवा रूप माई महागौरी के बारे मे| आई जानल जा-

महागौरी के कहानी

देवी भागवत पुराण के अनुसार देवी पार्वती अपना तपस्या के समय खाली कंद के फल आ पतई खात रहली। बाद में माई खाली हवा पी के तपस्या करे लगली। माई पार्वती के तपस्या से बहुत महिमा मिलल बा आ एही चलते उनुका महागौरी के नाम मिलल। माई के तपस्या से प्रसन्न होके भगवान शिव उनका से गंगा में नहाए के कहले। जब माता पार्वती गंगा में नहाए गइली त देवी के एगो रूप गहरे रंग से लउकल जवना के कौशिकी कहल गइल आ दोसर रूप चमकदार चंद्रमा नियर लउकल जवना के महागौरी कहल गइल | माँ गौरी अपना हर भक्त के कल्याण करेली आ ओह लोग के हर समस्या से मुक्ति देली।

 

माई के स्वरूप

देवी भागवत पुराण के मोताबिक महागौरी के चरित्र गोर यानी उज्जर होला आ उनकर वस्त्र आ आभूषण भी उज्जर रंग के होला। माँ के वाहन वृषभा ह जवन भगवान शिव के वाहन भी ह। माई के दाहिना हाथ अभयमुद्रा में बा आ निचला हाथ में दुर्गा शक्ति के प्रतीक त्रिशूल बा। शिव के प्रतीक महागौरी के ऊपरी हाथ में डमरू बा। डमरू पहिरला के चलते माई के शिव के नाम से भी जानल जाला। माई के निचला हाथ वरमुद्रा में अपना भक्तन के रक्षा देत बा आ माई शांत मुद्रा में लउकत बाड़ी। भगवती के एह रूप से प्रार्थना करत देवता आ ऋषि लोग कहत बा-

सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।

महागौरी के पूजा विधि 

नवरात्रि के आठवाँ दिन शक्ति स्वरूप महागौरी के दिन होला।आज के दिन लईकिन के पूजा कईल अउरी प्यार से खाना खियावल बहुत जरूरी बा ,शुभकामना के साथे माई के चुनरी चढ़ावे के भी एह दिन विशेष महत्व बा। माई के पूजा करे खातिर सबसे पहिले देवी महागौरी के ध्यान करीं। हाथ जोड़ के मंत्र के जप करीं।

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

 

महागौरी के आरती

जय महागौरी जगत की माया।

जया उमा भवानी जय महामाया॥

हरिद्वार कनखल के पासा।

महागौरी तेरी वहां निवासा॥

चंद्रकली ओर ममता अंबे।

जय शक्ति जय जय माँ जगंदबे॥

भीमा देवी विमला माता।

कौशिकी देवी जग विख्यता॥

हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।

महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा॥

सती {सत} हवन कुंड में था जलाया।

उसी धुएं ने रूप काली बनाया॥

बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।

तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया॥

तभी माँ ने महागौरी नाम पाया।

शरण आनेवाले का संकट मिटाया॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता।

माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता॥

भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।

महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो॥

महागौरी के मंत्र :

1- श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।

2- या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

 

महागौरी स्तोत्र :

सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।

ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।

डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥

त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।

वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

 

माई महागौरी के शुभ रंग

बैंगनी रंग माँ महागौरी के बहुत प्रिय ह। अष्टमी के दिन बैंगनी रंग के कपड़ा पहिन के माई के पूजा करे के चाही। पूजा में माँ महागौरी के मोगरा रंग चढ़ाई काहे कि देवी गौरी के ई फूल बहुत पसंद बा।

 

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