नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सभे महीना के खास महत्व बा। शरद पूर्णिमा के बाद कार्तिक महीना (Kartik Month 2026) के शुरुआत होला। एह पवित्र महीना में स्नान, दान, व्रत आ पूजा-पाठ करे के विधान बा। एकरा संगे भगवान विष्णु आ माता लक्ष्मी के पूजा के भी खास महत्व बा।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक महीना में ई सभ काम करे से आदमी के जीवन में शुभ फल मिलेला आ सुख-समृद्धि बढ़ेला। कार्तिक महीना में देवउठनी एकादशी के दिने चातुर्मास के समापन होला आ शुभ-मांगलिक काम के शुरुआत हो जाला। एकरा अलावा एह महीना में कई गो बड़ व्रत आ त्योहार मनावल जाला। आईं, एह लेख में जानीं कि कार्तिक महीना कब से शुरू होई आ एह दौरान स्नान आ दान के का धार्मिक महत्व बा।
कब से कब तक रही कार्तिक महीना 2026 (Kartik Month 2026 Start And End Date)
वैदिक पंचांग के अनुसार, पवित्र कार्तिक महीना के शुरुआत 27 अक्टूबर से होई। ओहिजा एह महीना के समापन 24 नवंबर के होई।
स्नान आ दीपदान के धार्मिक महत्व
कार्तिक महीना में भोर में पवित्र नदी में स्नान आ दीपदान करे के बहुत महत्व बा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक महीना में रोज पवित्र नदी में स्नान आ दीपदान करे से आदमी के शुभ फल मिलेला आ जीवन में खुशियन के आगमन होला। एकरा संगे माता लक्ष्मी के कृपा बरसेला। एतने ना, अइसन करे से सभ पाप के नाश होला आ शरीर आ मन के शुद्धि होला।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, कार्तिक महीना में रोज सबेरे आ साँझ के तुलसी के लगे दीया जरावे से घर में माता लक्ष्मी के आगमन होला आ नकारात्मक ऊर्जा के नाश होला।
जरूर करीं एह चीज के दान
एह महीना में मंदिर में भा गरीब लोग के दान देवे के भी बहुत महत्व बा। सच्चा मन से कइल गइल दान बहुत पुण्यदायी मानल गइल बा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दान करे से भगवान विष्णु आ माता लक्ष्मी के विशेष कृपा मिलेला आ जीवन में सुख-शांति बनल रहेला।
एह महीना से ठंड के शुरुआत हो जाला। एह से कार्तिक महीना में जरूरतमंद लोग के ऊनी कपड़ा, कंबल भा जूता-चप्पल जइसन चीज के दान जरूर करे के चाहीं। अइसन कइला से आदमी के जीवन में कबो कवनो चीज के कमी के सामना ना करे पड़े ला, अइसन धार्मिक मान्यता बा।
अस्वीकरण: एह लेख में बतावल गइल उपाय, लाभ, सलाह आ कथन खाली सामान्य जानकारी खातिर बा। खबर भोजपुरी एह लेख में लिखल बातन के समर्थन नइखे करत। एह लेख में दिहल गइल जानकारी अलग-अलग माध्यम, ज्योतिषी, पंचांग, प्रवचन, मान्यता, धर्मग्रंथ आ दंतकथा से जुटावल गइल बा। पाठकन से अनुरोध बा कि एह लेख के अंतिम सत्य भा दावा मत मानीं आ अपना विवेक के इस्तेमाल करीं। खबर भोजपुरी अंधविश्वास के खिलाफ बा।






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