‘अगर SIR से नागरिक वोटर लिस्ट से बाहर हो जइहें त फेर एकर मकसद का बा’, बॉम्बे हाई कोर्ट के EC से सवाल

By Shweta Supriya

Published on: Oct 6, 2026

डिजिटल डेस्क, पणजी। बॉम्बे हाई कोर्ट सोमार के चुनाव आयोग से कड़ा सवाल पूछलस। अदालत पूछलस कि परेश सालगांवकर आ उनका परिवार के पांच लोगन के नाम गोवा के वोटर लिस्ट से कइसे हटा दिहल

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डिजिटल डेस्क, पणजी। बॉम्बे हाई कोर्ट सोमार के चुनाव आयोग से कड़ा सवाल पूछलस। अदालत पूछलस कि परेश सालगांवकर आ उनका परिवार के पांच लोगन के नाम गोवा के वोटर लिस्ट से कइसे हटा दिहल गइल, जबकि ऊ लोग भारतीय नागरिक रहलें आ पता बदले खातिर फॉर्म 8 भरले रहलें।

जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस आ जस्टिस अमित जामसांडेकर के बेंच चुनाव आयोग से पूछलस, “…चुनाव आयोग के ई संवैधानिक जिम्मेदारी बा कि ऊ ई पक्का करे कि वोटर लिस्ट में खाली नागरिकन के नाम होखे। अगर एह प्रक्रिया (SIR) से नागरिके बाहर हो जालें त एह आदेश के का मकसद बा?”

अदालत का कहलस?

कोर्ट चुनाव आयोग से कहलस कि एसआईआर के पूरा कवायद के मकसद ई पता लगावल रहे कि वोटर भारतीय नागरिक बा कि ना। कोर्ट कहलस, “एसआईआर के आधार ई देखल ना ह कि वोटर कवनो खास जगह प मौजूद बा कि ना, बाके ई पता लगावल ह कि वोटर भारतीय नागरिक बा कि ना। लागत बा कि एहिए वजह से एसआईआर करावल जा रहल बा।”

‘चुनाव आयोग वोटर के मुसीबत में डाल दिहलस’

कोर्ट चुनाव आयोग के रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के नियम 21 के याद दिलावत कहलस, “हर चीज के मौजूदा वोटर लिस्ट के हिसाब से देखल जाव, ना कि ड्राफ्ट लिस्ट के हिसाब से। ना त वोटर के लगे कवनो रास्ता ना बची।” जज लोग कहलें कि चुनाव आयोग वोटर के कैच-22 वाला स्थिति (अइसन स्थिति, जवना में कवनो भी विकल्प चुने पर परेशानी होखे) में डाल दिहलस।

कोर्ट चुनाव आयोग से पूछलस कि वोटर लिस्ट से नाम हटावे से पहिले परिवार के कवनो नोटिस भेजल गइल रहे कि ना। चुनाव आयोग के ओर से पेश वकील गौरीश अग्नि कहलें कि हर स्तर प नोटिस बोर्ड प नोटिस लगावल गइल रहे, काहेकि हो सकेला कि आयोग के लगे वोटरन के नया जानकारी ना होखे।

अग्नि कहलें कि गाइडलाइंस के मुताबिक, जे लोगन के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से हटा दिहल गइल रहे (काहेकि ऊ लोग एन्यूमरेशन फॉर्म ना भरले रहे), ओह लोग खातिर फॉर्म 8 पर कार्रवाई ना कइल जा सकत रहे।

ऊ कहलें कि सालगांवकर फॉर्म 6 भर सकत रहलें, काहेकि ऊ एगो नया इलाका में नया वोटर बाड़ें आ एसआईआर एह के अइसन मानेला जइसे वोटर लिस्ट बिल्कुल नया सिरे से शुरू हो रहल होखे।

कोर्ट पूछलस तीखा सवाल

एह प बेंच कहलस, “फॉर्म 8 ओह जगह के ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर आपत्ति दर्ज करे खातिर होला। एकर मकसद ड्राफ्ट लिस्ट में सुधार कइल आ वोटर के नाम शामिल कइल ह। फॉर्म 8 असल में एहिए काम खातिर होला।”

बेंच आगे कहलस कि फॉर्म 6 ई बतावे खातिर होला कि वोटर जहवां रहेला, ओह जगह के लिस्ट में ओकर नाम नइखे आ ओकर नाम लिस्ट में शामिल कइल जाए के चाहीं।

जज लोग कहलें, “अगर ऊ रउरा के फॉर्म 6 देला त ई एगो झूठा डिक्लेरेशन (घोषणा) बा। अगर ऊ रउरा के फॉर्म 8 (पता बदले खातिर) देला त ओकरा के स्वीकार मत करीं, बाकिर ओकरा से एन्यूमरेशन फॉर्म (गणना फॉर्म) देवे के कही। एह देश के इतिहास में एन्यूमरेशन फॉर्म जइसन कवनो चीज कबो ना रहल बा।”

कोर्ट पूछलस कि जे आदमी एगो जगह से दोसर जगह चल गइल बा आ ओकर नाम पहिले से वोटर लिस्ट में बा, ओकरा से पहिले से भरल एन्यूमरेशन फॉर्म में फॉर्म 6 के डिक्लेरेशन देवे खातिर कइसे कहल जा सकेला।

बेंच कहलस, “घोषणा अइसन बा कि वोटर के पहिले से भरल फॉर्म में ई बतावे के होई कि ओकर नाम ओही जगह के वोटर लिस्ट में शामिल कइल जाए, जबकि ऊ आदमी ओहिजा रहत ही नइखे। कवनो आदमी अइसन घोषणा कइसे करी, जब ओकरा मालूम बा कि ओकर नाम दोसर जगह पर बा? जइसे ही ऊ अइसन घोषणा करेला, ओकरा पर कानूनी कार्रवाई हो सकेला। ई एगो झूठा बयान बा।”

कोर्ट आगे कहलस, “कवनो वोटर एह पर साइन ना करी। कवनो वोटर के एह पर साइन ना करे के चाहीं। हमनी के कहनाम बा कि ओकरा एह पर साइन ना करे के चाहीं। अगर कवनो आदमी ओहिजा रहत ही नइखे, त ऊ ओह जगह पर नाम शामिल करवावे खातिर कइसे आवेदन कर सकेला?”

कोर्ट चुनाव आयोग से एन्यूमरेशन फॉर्म आ फॉर्म के साथ लगावे वाला एनेक्जर (अनुबंध) जमा करे के कहलस। बेंच एह मामला के सुनवाई मंगल के जारी रखी।

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