दिल्ली में केंद्र के अध्यादेश के कैबिनेट से मिलल मंजूरी: अब संसद में पेश कइल जाई; AAP सहित कइयन विपक्षी दल एकर विरोध करी 

By Anurag Ranjan

Published on: Jul 25, 2023

दिल्ली में अफसरन के पोस्टिंग-ट्रांसफर पs नियंत्रण से जुड़ल अध्यादेश के केंद्रीय कैबिनेट के मंजूरी मिलल बा। NDTV सूत्रन के हवाले से ई जानकारी देले बा। अब केंद्र जल्दिये अध्यादेश के सदन में पेश करी।

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दिल्ली में अफसरन के पोस्टिंग-ट्रांसफर पs नियंत्रण से जुड़ल अध्यादेश के केंद्रीय कैबिनेट के मंजूरी मिलल बा। NDTV सूत्रन के हवाले से ई जानकारी देले बा। अब केंद्र जल्दिये अध्यादेश के सदन में पेश करी। आम आदमी पार्टी (AAP) सदन में एह बिल के विरोध करी। ओकरा एह ममिला में विपक्षी दलन के सपोर्ट हासिल बा।

दरअसल, केंद्र 19 मई के अधिकारियन के ट्रांसफर-पोस्टिंग पs अध्यादेश जारी कइले रहे। अध्यादेश में उ सुप्रीम कोर्ट के 11 मई के ओह फैसला के पलट देले रहे, जेमे ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार दिल्ली सरकार के मिलल रहे।

अध्यादेश से जुड़ल ममिला सुप्रीम कोर्ट में बा 

केंद्र सरकार अध्यादेश के माध्यम से दिल्ली में अफसरन  के ट्रांसफर-पोस्टिंग के अधिकार उपराज्यपाल को दे देले रहे। दिल्ली सरकार एकरा खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचल रहे। एह पs CJI चंद्रचूड़ 17 जुलाई के कहलें कि हम ई ममिला पांच जजन के संविधान पीठ के भेजल चाहत बानी। फेर संविधान पीठ तय करी कि का केंद्र एह तरे के संशोधन सकता बा कि ना?

केंद्र हलफनामा में का कहलस…

केंद्र सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर करत कहले रहे कि संविधान के आर्टिकल 246(4) संसद के भारत के कवनो हिस्सा खातिर आ कवनो ममिला के संबंध में कानून बनावे के अधिकार देला जवन कवनो राज्य में सामिल नइखे।

केंद्र के अध्यादेश के मोताबिक, दिल्ली में अधिकारियन के ट्रांसफर-पोस्टिंग के आखिरी फैसला उपराज्यपाल माने LG lr होई। एमे मुख्यमंत्री के कवनो अधिकार ना होई।

केजरीवाल सरकार 30 जून के कोर्ट में याचिका दाखिल कs के केंद्र के अध्यादेश के चुनौती देले रहे। ममिला में पहिला सुनवाई 4 जुलाई के भइल रहे, तब कोर्ट केंद्र सरकार आ उपराज्यपाल के नोटिस जारी कइले रहे।

केंद्र के ओर से अध्यादेश जारी कइला के बाद आप नेता LG ऑफिस जाके उनका से मिले खातिर हंगामा कइले रहे लो।

ई पूरा विवाद का रहे…

  • AAP सरकार आ उपराज्यपाल के बीच अधिकारन के लड़ाई 2015 में दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचल रहे। हाईकोर्ट अगस्त 2016 में उपराज्यपाल के पक्ष में फैसला सुनवले रहे।
  • AAP सरकार एकरा खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कइलस। 5 मेंबर वाली संविधान बेंच आप सरकार के पक्ष में फैसला सुनवलस। कोर्ट कहलस कि CM दिल्ली के एग्जीक्यूटिव हेड हवे। उपराज्यपाल मंत्रिपरिषद के सलाह आ सहायता के बिना स्वतंत्र रूप से काम नइखे कs सकत।
  • एकरा बाद सर्विसेज माने अधिकारियन पs नियंत्रण जइसन कुछ ममिलन के सुनवाई खातिर दु सदस्यीय रेगुलर बेंच के सामने भेजल गइल। फैसला में दुनो जजन के राय अलग रहे।
  • जजन के राय में मतभेद के बाद ई ममिला 3 मेंबर वाली बेंच के लगे गइल। उ केंद्र के मांग पs पिछला साल जुलाई में एकरा के संविधान पीठ के लगे भेज देलस।
  • संविधान बेंच जनवरी में 5 दिन एह ममिला पs सुनवाई कइलस आ 18 जनवरी के आप फैसला सुरक्षित रख लेले रहे।
  • 11 मई के सुप्रीम कोर्ट अफसरन पs कंट्रोल के अधिकार दिल्ली सरकार के दे देलस। संगही कहलस कि उपराज्यपाल सरकार के सलाह पs काम करिहें।

अध्यादेश का होला?

जब संसद भा विधानसभा के सत्र ना चल रहल होखे तs केंद्र आ राज्य सरकार तात्कालिक जरूरतन के आधार पs राष्ट्रपति भा राज्यपाल के अनुमति से अध्यादेश जारी करेला। एमे संसद/विधानसभा द्वारा पारित कानून जइसन शक्ति होला।

अध्यादेश के छव महीना के अंदर संसद भा राज्य विधानसभा के अगिला सत्र में पेश कइल अनिवार्य होला। जदि सदन ओह विधेयक के पारित कs देव तs ई कानून बन जाला। जबकि तय समय में सदन से पारित ना होखला पs ई समाप्त हो जाला। हालांकि सरकार एके अध्यादेश के बेर-बेर जारी कs सकत बिया।

साभार: दैनिक भास्कर

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