नर्वदेश्वर सिंह के पुस्तक ‘बगइचा’ के भइल लोकार्पण 

By Anurag Ranjan

Published on: Nov 20, 2022

गोरखपुर। आज दिनांक 20 नवम्बर 2022 के ‘भोजपुरी संगम’ के तत्वावधान में तारामंडल रोड इस्थित क्षत्रिय कार्यालय के प्रताप सभागार में भोजपुरी के रचनाकार नर्वदेश्वर सिंह ‘मास्टर साहब’ के कविता आ कहानी संग्रह ‘बगइचा’ के

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गोरखपुर। आज दिनांक 20 नवम्बर 2022 के ‘भोजपुरी संगम’ के तत्वावधान में तारामंडल रोड इस्थित क्षत्रिय कार्यालय के प्रताप सभागार में भोजपुरी के रचनाकार नर्वदेश्वर सिंह ‘मास्टर साहब’ के कविता आ कहानी संग्रह ‘बगइचा’ के लोकार्पण कार्यक्रम सम्पन्न भइल। जवना के अध्यक्षता आचार्य राम देव शुक्ल आ संचालन प्रो.भगवान सिंह कइलें।

कार्यक्रम के सुरुआत अतिथियन द्वारा दीप प्रज्वलन आ माँ सरस्वती के प्रतिमा पs माल्यार्पण से भइल। सुप्रसिद्ध कवयित्री श्वेता सिंह सरस्वती वंदना प्रस्तुत कइली। ओकरा बाद संयोजक कुमार अभिनीत अपना वक्तव्य में संस्था के क्रियाकलाप के बारे में जानकारी देलें आ सभे अतिथि आ श्रोता लोगन के स्वागत कइलें। एकरा बाद रचनाकार नर्वदेश्वर सिंह पुस्तक से आपन चुनिंदा रचना सुनाके श्रोता लोगन के वाहवाही बटोरलें।

 वरिष्ठ साहित्यकार डाॅ.आद्या प्रसाद द्विवेदी वक्तव्य क्रम के सुरुआत करत एह नया कृति खातिर लेखक के बधाई देला के संगे-संगे भविष्य में आउर समृद्ध साहित्य लोगन के बीच ले आवे खातिर सुभकामना देलें।

पूर्व प्राचार्य डाॅ.वेद प्रकाश पाण्डेय कविता के व्याकरण पs विस्तार से चरचा कs के नवोदित रचनाकारन के मार्गदर्शन कइलें। एह पुस्तक के ऊ भोजपुरी साहित्य संवर्धन के एगो महत्वपूर्ण कड़ी बतवलें।

एकरा बाद भाषाविद् प्रो.राम दरस राय नर्वदेश्वर सिंह के पुस्तक ‘बगइचा’ के तरे-तरे के कहानी, कविता आ गीत रूपी फुलन आ फेंडन से समृद्ध बतवलें जवना गंध साहित्य में खूब फइली।

अपना अध्यक्षीय संबोधन में आचार्य राम देव शुक्ल नवहा रचनाकारन से भाखा के मर्यादा आ शुद्धता के विशेष धेयान राखे के कहलें। ऊ भोजपुरी के वैविध्य आ सामर्थ्य पs विस्तार से चर्चा करत एकरा के जन-जीवन से जुड़ल विषयन पs सम्प्रेषणीयता में बहुते समृद्ध बतवलें।

अंत में प्रताप सभागार के संरक्षक रामदेव सिंह आयोजक संस्था आ आगंतुकन के प्रति आभार प्रकट कइलें। कार्यक्रम में एह लोगन के अलावे भोजपुरी संगम के संरक्षक इं.राजेश्वर सिंह, जय प्रकाश नायक, सुभाष यादव, श्रीधर‌ मिश्र, प्रेम नाथ मिश्र, धर्मेन्द्र त्रिपाठी, सरिता सिंह, डा राम कृपाल राय, भीम प्रसाद प्रजापति, सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’, डाॅ.(श्रीमती) तारा सिंह, राम समुझ साँवरा, राधेश्याम चंद, योगेन्द्र सिंह, समय बहादुर सिंह, सत्य प्रकाश शुक्ल, संतोष ‘संगम’ समेत साहित्य प्रेमी लोगन के उपस्थिति रहल।

आयोजन में बृजेश राय आ गौरव सिंह के महत्वपूर्ण भूमिका रहल।

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