हर हिन्दू के सीखे के चाहीं,  ई 15 गो मंत्र

By Anurag Ranjan

Published on: Feb 7, 2023

अगर आदमी जीवन में सफल होखे के चाहत बा आ तनाव मुक्त रहे के चाहत बा त जीवन में कुछ बदलाव कइल बहुते जरूरी बा अइसना में भगवान के मंत्र बहुत जीवन मे शांति देला।

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हर हिन्दू के सीखे के चाहीं,  ई 15 गो मंत्र 

 

अगर आदमी जीवन में सफल होखे के चाहत बा आ तनाव मुक्त रहे के चाहत बा त जीवन में कुछ बदलाव कइल बहुते जरूरी बा अइसना में भगवान के मंत्र बहुत जीवन मे शांति देला।

 ई 15 मंत्र बा

१-महादेव

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे,

सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ,

उर्वारुकमिव बन्धनान्,

मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् !!

 

२- श्री गणेश

वक्रतुंड महाकाय,

सूर्य कोटि समप्रभ

निर्विघ्नम कुरू मे देव,

सर्वकार्येषु सर्वदा !!

 

3. श्री हरी विष्णु

मङ्गलम् भगवान विष्णुः,

मङ्गलम् गरुणध्वजः।

मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः,

मङ्गलाय तनो हरिः॥

 

4. श्री ब्रह्म जी

ॐ नमस्ते परमं ब्रह्मा,

नमस्ते परमात्ने ।

निर्गुणाय नमस्तुभ्यं,

सदुयाय नमो नम:।।

 

5. श्री कृष्ण

वसुदेवसुतं देवं,

कंसचाणूरमर्दनम्।

देवकी परमानन्दं,

कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम।

 

6. श्री राम

श्री रामाय रामभद्राय,

रामचन्द्राय वेधसे ।

रघुनाथाय नाथाय,

सीताया पतये नमः !

7. माँ दुर्गा

ॐ जयंती मंगला काली,

भद्रकाली कपालिनी ।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री,

स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते।।

8. माँ महालक्ष्मी

ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो,

धन धान्यः सुतान्वितः ।

मनुष्यो मत्प्रसादेन,

भविष्यति न संशयःॐ ।

9. माँ सरस्वती

ॐ सरस्वति नमस्तुभ्यं,

वरदे कामरूपिणि

विद्यारम्भं करिष्यामि,

सिद्धिर्भवतु मे सदा ।।

 

10. माँ महाकाली

ॐ क्रीं क्रीं क्रीं,

हलीं ह्रीं खं स्फोटय,

क्रीं क्रीं क्रीं फट !!

 

11. हनुमान जी

मनोजवं मारुततुल्यवेगं,

जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं,

श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

 

12. श्री शनिदेव

ॐ नीलांजनसमाभासं,

रविपुत्रं यमाग्रजम ।

छायामार्तण्डसम्भूतं,

तं नमामि शनैश्चरम् ||

 

13. श्री कार्तिकेय

ॐ शारवाना-भावाया नम:,

ज्ञानशक्तिधरा स्कंदा ,

वल्लीईकल्याणा सुंदरा।

देवसेना मन: कांता,

कार्तिकेया नामोस्तुते ।

 

14. काल भैरव जी

ॐ ह्रीं वां बटुकाये,

क्षौं क्षौं आपदुद्धाराणाये,

कुरु कुरु बटुकाये,

ह्रीं बटुकाये स्वाहा।

 

15. गायत्री मंत्र

ॐ भूर्भुवः स्वः,

तत्सवितुर्वरेण्यम्

भर्गो देवस्य धीमहि

धियो यो नः प्रचोदयात्॥

खुदे भी सीखीं और परिवार / लाइकं के भी सिखाइ।

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