DDU: विकास के धुरी हs शांति पत्रकारिता : प्रो. राममोहन पाठक

By KB Desk

Published on: Oct 1, 2026

गोरखपुर। शांति पत्रकारिता विकास के धुरी हs। जबले पूरा दुनिया में शांति स्थापित ना होई, तबले विकास आ दोसरा उपलब्धियन के महत्व अधूरा रही। शांति के स्थापना में पत्रकारिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेला। पत्रकारिता के

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गोरखपुर। शांति पत्रकारिता विकास के धुरी हs। जबले पूरा दुनिया में शांति स्थापित ना होई, तबले विकास आ दोसरा उपलब्धियन के महत्व अधूरा रही। शांति के स्थापना में पत्रकारिता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेला। पत्रकारिता के उद्देश्य खाली टकराव आ संघर्ष के चित्रण करे भर ना होखे के चाहीं, बलुक दुनिया में मवजूद अशांति के कारणन के पहचान कs के ओकर समाधान के दिशा में प्रयास कइल होखे के चाहीं।

ई विचार दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा के पूर्व कुलपति प्रो. राममोहन पाठक व्यक्त कइलें।

ऊ बियफे के दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के हिंदी आ आधुनिक भारतीय भाषा आउर पत्रकारिता विभाग में गांधी जयंती के पूर्व संध्या पs ‘वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शांति पत्रकारिता’ विषय पs आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करत रहलें।

प्रो. पाठक कहलें कि गांधीजी के पत्रकारिता शांति पत्रकारिता के अनुपम उदाहरण रहल बा। गांधीजी शांति के मूर्तिमान स्वरूप रहलें आ उनकर ई दृष्टिकोण उनकर पत्रकारिता में साफ देखाई देत रहे। प्रो. पाठक कहलें कि गांधीजी पत्रकारिता के माध्यम से जवना शांति के स्थापना के प्रयास कइले रहलें, ओकर आज के समय में पहिले से कहीं जादे प्रासंगिकता बा।

उ कहलें कि शांति के गांधीजी के अवधारणा बुद्ध से प्रेरित रहे। एही वजह से आज युद्ध से जर्जर विश्व खातिर बुद्ध के विचार जरूरी बा।

प्रो. पाठक शांति के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य पs चरचा करत कहलें कि अलग-अलग राजनीतिक दलन के रणनीति बनावे खातिर वाररूम ना, बलुक पीसरूम बनावल जाए के चाहीं।

शांति पत्रकारिता प्राचीन अवधारणा : प्रो. राजवंत राव

कार्यक्रम के अध्यक्षता करत कला संकाय के अधिष्ठाता प्रो. राजवंत राव कहलें कि शांति पत्रकारिता कवनो नया अवधारणा नइखे, बलुक ई एगो प्राचीन अवधारणा हs। पत्रकारिता के उद्देश्य हमेशा शांति के स्थापना में जोगदान देवे के रहल बा।

उ कहलें कि गांधीजी अपना पत्रकारिता के माध्यम से जवन काम कइलें, आज के पत्रकारिता के ओकरा से प्रेरणा लेवे के चाहीं। ई शांति पत्रकारिता के एगो महत्वपूर्ण उदाहरण हो सकेला।

गांधीजी के दृष्टिकोण आज जादे प्रासंगिक : प्रो. विमलेश कुमार मिश्र

एकरा पहिले स्वागत वक्तव्य देत विभागाध्यक्ष प्रो. विमलेश कुमार मिश्र कहलें कि गांधीजी के प्रासंगिकता कालजयी बा आ ऊ हर समय प्रासंगिक बनल रही।

ऊ कहलें कि आज दुनिया अलग-अलग प्रकार के संघर्ष से जूझ रहल बा। अइसन समय में पत्रकारिता आ जनसंचार माध्यम संघर्षन के कम करे आ शांति के स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेला। पत्रकारिता में गांधीजी के दृष्टिकोण के जरूरत आज पहिले से कहीं जादे बा।

कार्यक्रम के आभार ज्ञापन पत्रकारिता पाठ्यक्रम के समन्वयक प्रो. राजेश कुमार मल्ल कइलें, जबकि संचालन डॉ. रजनीश कुमार चतुर्वेदी कइलें।

एह अवसर पs विभाग के विद्यार्थियन के अलावे प्रो. प्रत्यूष दुबे, डॉ. राम नरेश राम, डॉ. अभिषेक शुक्ल, डॉ. अखिल मिश्र, डॉ. अन्वेषण सिंह आ अभय शुक्ल मवजूद रहे लो।

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