नई दिल्ली। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के लेके राजनीतिक बहस लगातार तेज बा। विपक्ष चुनाव आयोग आ केंद्र सरकार पर सवाल उठावत बा आ आरोप लगावत बा कि SIR के नाम पर करोड़ों मतदाता के नाम मतदाता सूची से बाहर करे के कोशिश हो रहल बा। दोसरा ओर, चुनाव आयोग के तर्क बा कि मतदाता सूची के समय-समय पर दुरुस्त कइल जरूरी बा, ताकि मृत, स्थानांतरित आ डुप्लीकेट मतदाता के नाम हटावल जा सके आ योग्य नागरिकन के नाम सही तरीका से सूची में शामिल रहे।
SIR के बिहार में करावे के फैसला 24 जून 2025 के चुनाव आयोग के आदेश के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचल रहे। कई याचिका में एह प्रक्रिया के संवैधानिक वैधता पर सवाल उठावल गइल रहे। सुप्रीम कोर्ट 27 मई 2026 के फैसला में बिहार में करावल गइल SIR के वैध ठहरावत कहलस कि चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण करावे के अधिकार बा। कोर्ट ईहो मानलस कि प्रक्रिया के उद्देश्य वैध बा आ मतदाता सूची के शुद्धता सुनिश्चित करे खातिर अपनावल गइल तरीका संवैधानिक कसौटी पर खरा उतरता। (Supreme Court of India)
13 करोड़ के आंकड़ा के लेके राजनीतिक बहस
SIR के दौरान सामने आइल आंकड़ा के लेके राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गइल बा। विपक्ष करीब 13 करोड़ मतदाता के नाम के मुद्दा उठा रहल बा। हालांकि एह आंकड़ा के अलग-अलग श्रेणी में देखल जरूरी बा।
दावा ई बा कि 13.3 करोड़ के आंकड़ा में बहुत बड़ा हिस्सा अइसन लोगन के बा जे अब संबंधित पता पर रहत नइखन। कुछ मतदाता के मृत्यु हो चुकल बा, कुछ लोग स्थायी रूप से दोसरा जगह चल गइल बाड़ें, जबकि कुछ नाम मतदाता सूची में एक से अधिक जगह दर्ज मिलल बा।
दिए गइल आंकड़ा के मुताबिक करीब 2.8 करोड़ लोगन के पिछले दू दशक में मृत्यु हो चुकल बतावल गइल बा। एक करोड़ से कुछ अधिक नाम अलग-अलग जगह पर दोहरावल गइल, यानी ई डुप्लीकेट प्रविष्टि के श्रेणी में आवेला। करीब 6.5 करोड़ लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुकल बतावल गइल बा। एह स्थिति में पुरान पता पर उनकर नाम मतदाता सूची में बने रहला से सूची के शुद्धता पर सवाल उठ सकत बा।
चुनाव आयोग के मुताबिक SIR के समय करीब तीन करोड़ लोग अपना दर्ज पता पर मौजूद ना रहले। हालांकि एह सबके मतलब ई ना ह कि सभे लोग मतदाता सूची से स्थायी रूप से बाहर हो गइल। जिन लोगन के नाम पर सवाल उठल, ओह लोगन के नोटिस देके दस्तावेज आ आपत्ति के मौका देवे के प्रक्रिया भी रखल गइल बा।
मृत, डुप्लीकेट आ स्थानांतरित मतदाता के सवाल
मतदाता सूची के सबसे जरूरी उद्देश्य ई बा कि चुनाव के समय सही मतदाता के नाम उपलब्ध रहे। अगर कवनो व्यक्ति के मृत्यु हो गइल बा, लेकिन उनकर नाम सूची में अबहियो मौजूद बा, त ओह नाम के हटावल जरूरी मानल जाला। एही तरह अगर कवनो मतदाता स्थायी रूप से दोसरा जगह रहत बा, त पुरान पता पर उनकर नाम रहला से एके व्यक्ति के नाम अलग-अलग जगह पर होखे के संभावना पैदा हो सकेला।
डुप्लीकेट नाम भी चुनावी सूची खातिर महत्वपूर्ण समस्या ह। एके मतदाता के नाम अगर एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में दर्ज होखे त ओकर सत्यापन जरूरी हो जाला।
हालांकि, SIR के विरोध करे वाला पक्ष के चिंता ई बा कि प्रक्रिया में वास्तविक मतदाता के नाम भी गलती से बाहर हो सकेला। एही कारण से दस्तावेज, नोटिस, सुनवाई आ अपील के प्रक्रिया के पारदर्शी रखल जरूरी बा।
सुप्रीम कोर्ट का कहलस?
27 मई 2026 के फैसला में सुप्रीम कोर्ट चार प्रमुख सवाल पर विचार कइलस। पहिला, का चुनाव आयोग के SIR करावे के अधिकार बा? दोसरा, का एह प्रक्रिया के उद्देश्य वैध बा आ अपनावल गइल तरीका ओह उद्देश्य के अनुपात में बा? तिसरा, का प्रक्रिया Representation of the People Act, 1950 आ Registration of Electors Rules, 1960 के प्रावधानन के खिलाफ बा? आ चौथा, का चुनाव आयोग मतदाता सूची में शामिल होखे वाला व्यक्ति के नागरिकता के सीमित जांच कर सकेला?
कोर्ट एह सवालन पर फैसला देत कहलस कि चुनाव आयोग के SIR करावे के अधिकार बा। कोर्ट के मुताबिक मतदाता सूची में योग्य लोगन के शामिल कइल आ अयोग्य प्रविष्टियन के हटावल निष्पक्ष चुनाव के संवैधानिक उद्देश्य से जुड़ल बा। (Supreme Court of India)
सुप्रीम कोर्ट ईहो स्पष्ट कइलस कि चुनाव आयोग नागरिकता के अंतिम फैसला करे वाला प्राधिकारी ना ह। आयोग मतदाता सूची में नाम शामिल करे खातिर नागरिकता से जुड़ल सीमित जांच कर सकेला। अगर नागरिकता के लेके गंभीर सवाल होखे त मामला संबंधित सक्षम प्राधिकारी के भेजल जा सकेला। (Supreme Court of India)
आधार के लेके भी कोर्ट के स्थिति साफ
SIR के दौरान आधार कार्ड के पहचान खातिर स्वीकार करे के मुद्दा भी सामने आइल रहे। सुप्रीम कोर्ट साफ कइलस कि आधार पहचान के दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल हो सकेला, लेकिन आधार नागरिकता के प्रमाण ना ह। यानी मतदाता सूची में नाम शामिल करे खातिर पहचान आ नागरिकता के सवाल अलग-अलग चीज ह। (Supreme Court of India)
बहस अबहियो जारी
सुप्रीम कोर्ट बिहार में SIR के वैधता पर फैसला दे चुकल बा, बाकिर SIR से जुड़ल अलग-अलग प्रक्रिया आ व्यवस्थापन के मुद्दा पर न्यायिक सुनवाई जारी रह सकेला। एह पूरा विवाद में एक ओर मतदाता सूची के शुद्ध आ विश्वसनीय बनावे के जरूरत बा, त दोसरा ओर ई सुनिश्चित कइल भी जरूरी बा कि कवनो योग्य मतदाता के नाम गलती से ना हटे।
चुनाव आयोग के वेबसाइट पर SIR-2026 से जुड़ल सुविधा उपलब्ध बा, जहाँ मतदाता आपन नाम पिछला SIR के सूची में खोज सकेलें आ नोटिस से संबंधित दस्तावेज जमा करे के सुविधा भी बा। (Voter Services)
एह पूरा मामला के समझे खातिर 13 करोड़ के आंकड़ा के एके संख्या के रूप में देखे के बजाय ओकर अलग-अलग श्रेणी—मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित, अनुपस्थित आ दस्तावेज से जुड़ल मामिला—के समझल जरूरी बा। राजनीतिक दल आपन-आपन पक्ष रख रहल बाड़ें, जबकि अंतिम रूप से मतदाता सूची के विश्वसनीयता आ वास्तविक मतदाता के अधिकार दुनो के संतुलन में राखल एह प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण पहलू बा।






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