नई दिल्ली। न्यूयॉर्क में भारत के बिदेस मंत्री डॉ. एस. जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वां सत्र के संबोधित करत घरी बड़ बात कहलें। एस जयशंकर कहलें, “काल्ह आतंकवाद के लगातार बढ़ावा देवे वाला एगो देस एह सभा के सोझा तथ्य के गलत तरीका से पेश कइलस। आतंकवाद के सामान्य बतावे आ ओकर नतीजा से बचे खातिर तर्क दिहल गइल। बाकिर ई तर्क टिके वाला नइखे। आतंकवाद के खिलाफ आपन बचाव करे के अधिकार के इस्तेमाल कइल जाई। दोस्ती आ सद्भावना आतंकवाद के संगे ना चल सकेला आ अइसन सोच पs आधारित समझौता पs स्वाभाविक रूप से सवाल उठी। अब ई आतंकवाद फइलावे वाला पs निर्भर बा कि ऊ आपन हरकत सुधारे…”
एस जयशंकर पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच संयम बरते, तनाव कम करे आ आम नागरिकन के बेहतर सुरक्षा देवे के अपील कइलें। ऊ कहलें कि युद्ध के असर ओहू देसन में महसूस कइल जा रहल बा, जवन सीधे तौर पs एह युद्ध में सामिल नइखे।
एस जयशंकर कहलें कि युद्ध वैश्विक सुरक्षा आ विकास के कमजोर कs रहल बा आ युद्ध वाला इलाका से दूर इस्थित देसन के एकर नतीजा भुगते के पड़ रहल बा।
नाविकन पs निशाना बनावल भारत के मंजूर नइखे
ऊ कहलें कि एह युद्ध के सबसे जादे असर अक्सर ओह लोग पs पड़ेला, जेकर बात सबसे कम सुनल जाला। एह सब के हालात के असलियत के सामना करे के होई।
जयशंकर कहलें, “एह साल हमनी के खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष देखत बानी सs, जवना से पहिले से मुश्किल हालात आउर खराब हो रहल बा। जारी तनाव के लेके हमनी के बहुत चिंतित बानी सs। अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरत कमर्शियल जहाज आ नाविकन के निशाना बनावल बिल्कुल मंजूर नइखे। भारत सब पक्ष से संयम बरते, तनाव कम करे, आम नागरिकन के सुरक्षा सुनिश्चित करे आ ऊर्जा आ बेयपार के प्रवाह बिना कवनो रुकावट जारी रखे के अपील करत बा।”
युद्ध प्रगति खातिर खतरा, पूरा दुनिया पs पड़त बा असर
जयशंकर कहलें, “हमनी के एह महासभा में अइसन समय जुटल बानी सs जब संयुक्त राष्ट्र अपना नउवां दशक में प्रवेश कs रहल बा। एकर स्थापना अंतरराष्ट्रीय शांति आ सुरक्षा कायम रखे आ एह खातिर सामूहिक कार्रवाई करे के उद्देश्य से भइल रहे। सदस्य देस दोस्ताना संबंध विकसित करे आ वैश्विक शांति मजबूत करे के संकल्प लेले रहे।
बाकिर जब हमनी के इहंवा मिलत बानी सs, तबो संघर्ष आ टकराव हमनी के मुख्य चिंता बनल बा। शांति कायम रखे में असफलता ना खाली सुरक्षा के कमजोर करत बा, बलुक प्रगति खातिर खतरा पैदा करत बा आ विकास के बाधित करत बा। आज के वैश्वीकृत दुनिया में युद्ध के असर पूरा दुनिया पs पड़ेला।”







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