Gorakhpur : ‘लौटेंगे हम एक दिन’ के भइल विमोचन, प्रो. चितरंजन मिश्र कहलें- जेकरा लगे भाषा बा, ओकरा मौन ना रहे के चाहीं

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गोरखपुर। वरिष्ठ शिक्षाविद्, वैज्ञानिक, साहित्यकार आ समाजसेवी प्रो. (डॉ.) शिव शरण दास के नया काव्य-संग्रह ‘लौटेंगे हम एक दिन’ के विमोचन गोरखपुर के सिविल लाइंस इस्थित सभागार में भव्य समारोह के बीच भइल। जुवा चेतना समिति, गोरखपुर के ओर से आयोजित कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा, विज्ञान आ सामाजिक चेतना से जुड़ल कइयन गो प्रमुख लोग सामिल भइल।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पूनम टंडन रहली। उनका संगे गोरखपुर के महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव आ आउर अतिथियन के मवजूदगी में पुस्तक के विमोचन भइल। कार्यक्रम के अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वेद प्रकाश पांडेय कइलें।

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साहित्य समाज के संवेदना के पीढ़ी तक पहुंचावेला

प्रो. पूनम टंडन कहली कि साहित्य समाज के संवेदना, अनुभव आ वैज्ञानिक चेतना के अगिला पीढ़ी तक पहुंचावे के मजबूत माध्यम हs। प्रो. शिव शरण दास के वैज्ञानिक सोच आ साहित्यिक संवेदना के समन्वय के सराहना करत ऊ कहलें कि ‘लौटेंगे हम एक दिन’ पाठक में जिनगी के प्रति विश्वास जगावेला।

कृति विमोचन के बाद प्रो. शिव शरण दास अपना चुनिंदा कविता के पाठ कइलें। उनका रचनन में जिनगी के प्रति आस्था, मानवीय संबंध, वर्तमान के खुसी आ सामाजिक विसंगतियन के प्रति चिंता के स्वर साफ देखाई देला।

‘जेकरा लगे भाषा बा, ओकरा मौन ना रहे के चाहीं’

प्रो. चितरंजन मिश्र कहलें कि “जेकरा लगे पास भाषा बा, ओकरा मौन ना रहे के चाहीं।” उनका मोताबिक चुप्पी संवेदनशील इंसान के गहिराह पीड़ा हs। ऊ संग्रह में मवजूद चेतावनी के चरचा करत कहलें कि ऊंचाई तक पहुंचे के चाहत जरूरी बा, बाकिर विवेक, संयम आ सजगता ओतने जरूरी बा।

वरिष्ठ साहित्यकार रणविजय सिंह कहलें कि ई कृति जिनगी अनुभव आ मानवीय संवेदना से उपजल रचना हs। प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा किताब में लोकमंगल आ सामाजिक जिम्मेदारी के भावना के प्रमुख बतवलें।

वर्तमान के खुसी के संगे जीये के सनेस

प्रो. शिव शरण दास कहलें कि साहित्य खाली निजी भावना व्यक्त करे के माध्यम ना हs, बलुक समाज में मवजूद कुरीति, भ्रष्टाचार आ समस्या के खिलाफ आवाज उठावे के जरिया हs। ऊ कहलें कि बुद्धिजीवी वर्ग के कहीं गलत दिखाई देवे तs ओकरा पs बोलल आ लिखल जरूरी बा।

ऊ कहलें कि जिनगी के सबसे जरूरी सत्य वर्तमान के जीना हs। आदमी जदि बीतल समय के इयाद आ भविष्य के चिंता में उलझल रहे तs वर्तमान के छोट-छोट खुसी से वंचित हो जाला।

प्रो. दास के वैज्ञानिक आ शैक्षणिक उपलब्धि

समारोह में प्रो. दास के वैज्ञानिक उपलब्धियन के चरचा भइल। उनका निरदेसन में 14 शोधार्थी शोधकार्य पूरा कइले बाड़ें। उनकर 90 से जादे शोध-पत्र राष्ट्रीय आ अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकन में प्रकाशित भइल बा। रसायन विज्ञान के अलग-अलग क्षेत्र पs उनकर आठ पुस्तक प्रकाशित बा।

पर्यावरण संरक्षण में प्रो. दास के जोगदान के उल्लेख भइल। विश्वविद्यालय परिसर में 11 हजार से जादे सागौन आ नीम के पवधा लगावे आ ओकर संरक्षण में उनकर महत्वपूर्ण भूमिका रहल बा।

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