गोरखपुर। सावन के कारी मेघ आ रिमझिम फुहार के बीच ‘भोजपुरी संगम’ के 198वीं बइठकी खरैया पोखरा, बशारतपुर इस्थित संस्था के कार्यालय में आयोजित भइल। साहित्यिक गोष्ठी में भोजपुरी कविता, सावन के भाव आ देसभक्ति से जुड़ल रचनन के सानदार प्रस्तुति भइल। कवियन के रचना से पूरा माहौल काव्यरस से सराबोर हो गइल।
सावन के फुहार संगे भोजपुरी कविता के बहल रसधार
गोष्ठी के दौरान बाहर आसमान में जवना तरे सावन के कारी बदरी रह-रह के फुहार बरसावत रहे। ओही तरे कार्यक्रम स्थल पs कवियन के भोजपुरी रचना के फुहार श्रोता लोगन के मन मोह लेलस।

कवियन आ साहित्यप्रेमियन के मवजूदगी में आयोजित एह बइठकी में सावन आ देसभक्ति पs आधारित कइयन गो रचना प्रस्तुत कइल गइल। रचनन में भोजपुरी भाषा के मिठास के संगे-संगे प्रकृति प्रेम, सामाजिक सरोकार आ राष्ट्रभक्ति के भाव देखे के मिलल।
डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त रहलें अध्यक्ष
198वीं बइठकी के अध्यक्षता डॉ. फूलचंद प्रसाद गुप्त कइलें। कार्यक्रम के कुशल संचालन रामसमुझ ‘सांवरा’ के ओर से कइल गइल। वक्ता आ कवियन के प्रस्तुति के चलते गोष्ठी लगातार जीवंत रहल।
कइयन गो कवियन के रहल महत्वपूर्ण भागीदारी
काव्यपाठ में कवयित्री वंदना मिश्रा के संगे बागेश्वरी प्रसाद मिश्र, नर्वदेश्वर सिंह, अवधेश शर्मा ‘नंद’, अरविंद ‘अकेला’, सुधीर श्रीवास्तव ‘नीरज’, कुमार अभिनीत, अजय यादव, अमरनाथ पांडेय, निर्मल कुमार गुप्त, रवींद्र मोहन त्रिपाठी आ डॉ. विनीत मिश्र के महत्वपूर्ण भागीदारी रहल।
सब कवि अपना-अपना रचना के माध्यम से सावन के सुंदरता, भोजपुरी संस्कृति आ देसभक्ति के भाव के प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत कइल। एह दौरान श्रोता लोग कविता के भरपूर आनंद लिहल।
संस्था के संरक्षक इं. राजेश्वर सिंह जतवलें आभार
कार्यक्रम के अंत में संस्था के संरक्षक इं. राजेश्वर सिंह सब कवि, साहित्यप्रेमी आ सहभागियन के प्रति आभार जतवलें। ऊ कहलें कि भोजपुरी भाषा आ साहित्य के बढ़ावा देवे में अइसन साहित्यिक बइठकी के महत्वपूर्ण भूमिका बा।
‘भोजपुरी संगम’ के 198वीं बइठकी में साहित्य, संस्कृति आ भोजपुरी भाषा के प्रति समर्पण के झलक साफ देखे के मिलल। सावन के फुहार के बीच भइल एह आयोजन से भोजपुरी साहित्यप्रेमियन में उत्साह देखे के मिलल।










