New Delhi : नेपाल भारत से मुआवजा मांगे के बाद अब का कहलस? UN के मंच पर चीन के भी लिहल नाम

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Sep 25, 2026

नेपाल में अगस्त महीना में आइल भीषण बाढ़ आ हिमालयी आपदा से भारी तबाही मचल रहे। एह आपदा के बाद नेपाल के ओर से जलवायु संकट खातिर मुआवजा के मांग उठल रहे। बाकिर अब नेपाल

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नेपाल में अगस्त महीना में आइल भीषण बाढ़ आ हिमालयी आपदा से भारी तबाही मचल रहे। एह आपदा के बाद नेपाल के ओर से जलवायु संकट खातिर मुआवजा के मांग उठल रहे। बाकिर अब नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह संयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत आ चीन दुनो देश के आपदा के बाद मदद खातिर धन्यवाद दिहले बाड़े। साथही ऊ भारत, चीन आ नेपाल के मिल के एगो हिमालयी जलवायु तंत्र बनावे के प्रस्ताव भी रखले बाड़े।

नेपाली PM भारत के कहलन धन्यवाद

24 सितंबर 2026 के संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वां सत्र में संबोधन करत प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह हाल के भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा के जिक्र कइलें। ऊ कहलें कि बाढ़ के बाद नेपाल के तत्काल मदद पहुंचावे में भारत आ चीन दुनो देश तेजी आ उदारता देखवले।

शाह भारत आ चीन के अलावा संयुक्त राष्ट्र सिस्टम, मानवीय सहायता एजेंसियन आ दुनिया भर के सहयोगी देशन के भी धन्यवाद दिहलें।

पहिले मुआवजा के मांग के चर्चा काहे भइल?

अगस्त में विनाशकारी बाढ़ के बाद नेपाल के तरफ से ई बात उठल कि जलवायु परिवर्तन के चलते नेपाल जइसन कम उत्सर्जन वाला देश भारी नुकसान झेल रहल बा। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल प्रमुख ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशन के जिम्मेदारी के सवाल उठवले रहलें।

रिपोर्टन के मुताबिक, नेपाल के ओर से भारत, चीन आ अमेरिका जइसन बड़ उत्सर्जक देशन से जलवायु नुकसान के भरपाई के मुद्दा उठावल गइल रहे। बाद में नेपाल के तरफ से ई स्पष्ट कइल गइल कि मकसद वैश्विक समुदाय के ध्यान जलवायु संकट आ ओकर नुकसान पर खींचल रहे।

हिमालय में बढ़त खतरा पर जतवल चिंता

UN में बालेन्द्र शाह कहलें कि ग्लेशियर पिघल रहल बा, पहाड़ अस्थिर हो रहल बा आ अचानक बाढ़ आ भूस्खलन के खतरा बढ़ रहल बा। उनकर कहना रहे कि नेपाल जइसन देश जलवायु परिवर्तन में बहुत कम योगदान देला, बाकिर ओकर असर के भारी कीमत चुकावे के पड़ रहल बा।

शाह के मुताबिक, ई समस्या खाली नेपाल तक सीमित नइखे। हिमालय क्षेत्र के जल, खेती, पर्यावरण आ करोड़ों लोग के जीवन से सीधा संबंध बा। एहसे जलवायु संकट के समाधान खातिर क्षेत्रीय सहयोग जरूरी बा।

भारत-चीन-नेपाल खातिर रखल खास प्रस्ताव

नेपाल के प्रधानमंत्री भारत, चीन आ नेपाल के नेतृत्व में ‘हिमालयी जलवायु लचीलापन तंत्र’ बनावे के प्रस्ताव रखलें। एह व्यवस्था के तहत सैटेलाइट डेटा आ विशेषज्ञता साझा करे, खतरनाक ग्लेशियल झीलन पर निगरानी रखे, शुरुआती चेतावनी प्रणाली मजबूत करे आ आपदा के समय सीमा पार राहत अभियान के बेहतर ढंग से समन्वित करे के बात कहल गइल बा।

शाह कहलें कि हिमालय के अलग-अलग देशन के बीच बंटल जानकारी के इलाका बनावे के बजाय अंतरराष्ट्रीय सहयोग के प्रयोगशाला बनावल जाए। उनका मुताबिक, हाल के भोटेकोशी-त्रिशूली आपदा खाली नेपाल खातिर त्रासदी ना, बल्कि पूरा दुनिया खातिर एगो चेतावनी बा।

एह तरह नेपाल के हाल के रुख में एक ओर जलवायु नुकसान आ जिम्मेदारी के सवाल उठ रहल बा, त दोसरा ओर आपदा के समय भारत आ चीन से मिलल तत्काल सहायता खातिर आभार भी जतावल गइल बा।

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