जितिया व्रत, जेकरा के जीउतिया या जीवित्पुत्रिका व्रत भी कहल जाला, हिंदू धर्म के एगो महत्वपूर्ण व्रत ह। ई व्रत खास तौर पर माई लोग अपना संतान के लंबा उमिर, निरोग जीवन, सुख-समृद्धि आ मंगलकामना खातिर रखेली। बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश आ नेपाल के कुछ इलाका में जितिया व्रत के विशेष महत्व बा।
कब से शुरू भइल जितिया व्रत?
जितिया व्रत के शुरुआत कब आ ठीक कवन साल में भइल रहे, एकर पक्का ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नइखे। धार्मिक मान्यता के अनुसार ई एगो बहुत पुरान व्रत ह, जेकर परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलत आ रहल बा।
जितिया व्रत के धार्मिक परंपरा में राजा जीमूतवाहन के कथा के खास महत्व बा। मान्यता बा कि राजा जीमूतवाहन बहुत दयालु आ त्यागी रहले। एक बेर एगो नाग युवक के जान गरुड़ से बचावे खातिर जीमूतवाहन अपना प्राण तक बलिदान करे खातिर तैयार हो गइलें। उनकर ई त्याग आ दूसर के जीवन बचावे के भावना जितिया व्रत के कथा से जोड़ल जाला।
इसी कारण ई व्रत संतान के जीवन के रक्षा, लंबा उमिर आ सुख-समृद्धि के कामना से जुड़ गइल। हालांकि, इतिहास के आधार पर ई कह पावल मुश्किल बा कि जितिया व्रत के शुरुआत कवन व्यक्ति कइलस या कवन साल से ई परंपरा शुरू भइल।
जितिया व्रत के महत्व
जितिया व्रत में माई लोग कठिन नियम के पालन करेली। कई जगह परंपरा के अनुसार व्रती महिला निर्जला व्रत रखेली, यानी पूरा दिन पानी तक ग्रहण ना करे ली। व्रत के दौरान पूजा-पाठ आ जीमूतवाहन के कथा सुनल-सुनावल जाला।
ई व्रत खाली धार्मिक आस्था तक सीमित नइखे, बल्कि परिवार आ संतान के प्रति माई के प्रेम, त्याग आ मंगलकामना के प्रतीक भी मानल जाला।
2026 में कब बा जितिया?
2026 में जितिया व्रत 3 अक्टूबर, शनिवार के पड़त बा। परंपरा के अनुसार एक दिन पहिले 2 अक्टूबर के नहाय-खाय होई। 3 अक्टूबर के मुख्य जितिया व्रत रखल जाई, जबकि 4 अक्टूबर के पारण कइल जाई।
जितिया व्रत के दौरान अलग-अलग क्षेत्र में पूजा-पद्धति आ परंपरा में थोड़ा अंतर देखे के मिलेला, लेकिन संतान के दीर्घायु आ सुखी जीवन खातिर माई के प्रार्थना एकर मुख्य भावना ह।
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