New Delhi: आईआरडीएआई मिस-सेलिंग पर सख्ती खातिर बदलाव के देलस प्रस्ताव, का बीमा खरीदारन के मिली राहत?

By Gaurav Mani Tripathi

Published on: Sep 25, 2026

नई दिल्ली: गलत दावा आ अधूरा जानकारी देके बीमा बेचला पर अब रोक लगावे के तैयारी हो रहल बा। भारतीय बीमा नियामक आ विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) देश के पूरा बीमा वितरण व्यवस्था में बड़ बदलाव

Share

नई दिल्ली: गलत दावा आ अधूरा जानकारी देके बीमा बेचला पर अब रोक लगावे के तैयारी हो रहल बा। भारतीय बीमा नियामक आ विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) देश के पूरा बीमा वितरण व्यवस्था में बड़ बदलाव करे के प्रस्ताव रखले बा। बीमा नियामक 24 सितंबर 2026 के ‘रीकैलिब्रेटिंग इकोनॉमिक्स ऑफ इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन’ नाम से एगो सार्वजनिक परामर्श पत्र जारी कइले बा।

एह प्रस्ताव के मुख्य मकसद बीमा क्षेत्र में सरल तीन-स्तरीय व्यवस्था लागू कइल, प्रबंधन खर्च के सीमा घटावल, कमीशन व्यवस्था में बदलाव कइल आ पॉलिसी के गलत बिक्री यानी मिस-सेलिंग के खिलाफ ग्राहक सुरक्षा के मजबूत बनावल बा।

बीमा वितरण आ कमीशन में पारदर्शिता खातिर का प्रस्ताव बा?

प्रस्तावित नियम के तहत बीमा कंपनी आ बड़ वितरण संस्थानन के आपन कमीशन नीति आ कमीशन के ढांचा आसान भाषा में सार्वजनिक करे के पड़ सकेला। कुछ निर्धारित व्यावसायिक पॉलिसी में भी कमीशन के जानकारी साफ-साफ बतावल जाई।

एहसे ग्राहक के ई समझे में आसानी होई कि ओकर पॉलिसी के कुल कीमत में वितरण लागत आ कमीशन के केतना हिस्सा शामिल बा। नियामक के मानना बा कि कमीशन व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ला से ग्राहकन के भरोसा बढ़ी आ बीमा उत्पाद के कीमत तय करे में भी ज्यादा तर्कसंगत तरीका अपनावल जा सकेला।

मिस-सेलिंग रोके खातिर कवन कड़ा कदम प्रस्तावित बा?

बीमा के गलत तरीका से बेचला आ दोसर वित्तीय उत्पाद के साथ जबरदस्ती बीमा पॉलिसी जोड़ला पर रोक लगावे खातिर कई गो उपाय प्रस्तावित कइल गइल बा।

ग्राहक के जरूरत के दस्तावेज: बीमा बेचत समय ग्राहक के वास्तविक जरूरत आ ओकरा खातिर पॉलिसी के उपयुक्तता के दस्तावेज तैयार कइल जरूरी हो सकेला।

कमीशन के नया परिभाषा: प्रत्यक्ष आ अप्रत्यक्ष दुनो तरह के पारिश्रमिक के कमीशन के नियामकीय दायरा में शामिल कइल जाई।

इंसेंटिव पर रोक: बैंक आ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) के कर्मचारी के बीमा बिक्री के मात्रा या इनाम से जोड़ल इंसेंटिव देला पर रोक के प्रस्ताव बा।

विक्रेता टैगिंग आ क्लॉ-बैक: हर पॉलिसी के साथ व्यक्तिगत विक्रेता के पहचान जोड़ल जा सकेला। मिस-सेलिंग के घटना के सार्वजनिक कइल जा सकेला आ गलत बिक्री साबित भइला पर पहिले दिहल कमीशन वापस लेवे के प्रावधान हो सकेला।

बीमा कंपनी के प्रबंधन खर्च में कतना कटौती हो सकेला?

प्रस्तावित सुधार में बीमा कंपनियन के Expense of Management (EoM) सीमा घटावल भी शामिल बा।

जीवन बीमाकर्ता: जीवन बीमा कंपनी खातिर EoM सीमा के कंपनी स्तर पर ग्रॉस डायरेक्ट प्रीमियम इनकम (GDPI) से जोड़ल जाई। एह सीमा के दू साल में घटा के 15 प्रतिशत आ पांच साल में 12.5 प्रतिशत करे के प्रस्ताव बा।

सामान्य बीमाकर्ता: सामान्य बीमा कंपनी खातिर गणना के आधार ग्रॉस रिटेन प्रीमियम (GWP) से बदल के घरेलू GDPI करे के प्रस्ताव बा। साथे, पांच साल में EoM सीमा GWP के 30 प्रतिशत से घटा के GDPI के 20 प्रतिशत करे के प्रस्ताव बा।

ग्राहकन पर का असर पड़ सकेला?

अगर ई प्रस्ताव अंतिम नियम के रूप में लागू होला, त बैंक आ एनबीएफसी कर्मचारी पर बीमा बेचला के अनुचित दबाव कम हो सकेला। एहसे ग्राहकन के उनकर जरूरत से अलग बीमा खरीदे के स्थिति से बचावे में मदद मिल सकेला।

साथे, कमीशन में पारदर्शिता आ प्रबंधन खर्च पर नियंत्रण से बीमा कारोबार के लागत संरचना में बदलाव आ सकेला। हालांकि, ग्राहकन पर प्रीमियम या सेवा के अंतिम असर नियम लागू भइला आ बाजार के प्रतिक्रिया पर निर्भर करी।

अब आगे का होई?

आईआरडीएआई के ई प्रस्ताव बीमा वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही आ ग्राहक सुरक्षा बढ़ावे के दिशा में एगो महत्वपूर्ण नियामकीय पहल बा। सार्वजनिक परामर्श पत्र पर बीमा कंपनियन, उद्योग जगत आ दोसर हितधारकन से राय लिहला के बाद प्रस्तावित नियमन के अंतिम रूप दिहल जाई।

एह प्रक्रिया के बाद साफ होई कि मिस-सेलिंग रोकला, कमीशन पारदर्शिता बढ़ावे आ बीमा कंपनियन के खर्च नियंत्रित करे खातिर कवन-कवन प्रावधान अंतिम रूप से लागू होई।

💬 Comments
?

No comments yet. Be the first to comment!

खबरें और भी arrow-right Created with Sketch Beta.